बिहार में सड़क हादसों में 50,000 लोगों की मौत, सरकार बोली- पूरे राज्य में…

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बिहार में सड़क हादसों में 50,000 लोगों की मौत, सरकार बोली- पूरे राज्य में…
बिहार में सड़क हादसों में 50,000 लोगों की मौत, सरकार बोली- पूरे राज्य में 1,044 ब्लैक स्पॉट

7 साल में बिहार में सड़क हादसों में 50 हजार मौतें और करीब 44 हजार लोग हुए घायल

राज्य में पिछले 7 वर्षों में सड़क हादसों के कारण 50,000 से भी ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं. केवल इतना ही नहीं, इन हादसों में घायल होने वालों की संख्या भी हजारों में है. दरअसल, यह बातें सोमवार को बिहार विधान परिषद की कार्यवाही के दौरान सामने आईं, जब विधान पार्षद महेश्वर सिंह ने पूर्वी चंपारण जिले में सड़क हादसों को लेकर सरकार से सवाल किया.

निर्दलीय विधान पार्षद महेश्वर सिंह ने तारांकित प्रश्न के माध्यम से राज्य के मोतिहारी जिले में वर्ष 2025 में सड़क हादसों में 393 लोगों की जान गंवाने को लेकर प्रश्न किया था. उनका यह भी सवाल था कि सड़क हादसों में होने वाली मानव क्षति पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार क्या उपाय कर रही है?

महेश्वर सिंह के सवाल का जवाब देने के लिए राज्य के पथ निर्माण विभाग के मंत्री दिलीप जायसवाल ने आंकड़े प्रस्तुत किए. इस पर महेश्वर सिंह ने कहा कि अगर राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों पर यकीन करें तो वर्ष 2019 से लेकर 2026 तक राज्य में सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या 50,941 है. जबकि इनमें घायल होने वालों की संख्या 44,000 के करीब है. इसमें भी खास बात यह है कि 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग के करीब 50% लोग ऐसे हैं, जिन्होंने इन हादसों में अपनी जान गंवाई है.

बिहार में 1,044 ब्लैक स्पॉट

महेश्वर सिंह के सवाल पर सहमति जताते हुए मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि वह इस बात से इत्तेफाक रखते हैं कि राज्य में सड़क हादसों की संख्या बढ़ी है और ये हादसे राज्य की लगभग सभी सड़कों पर हो रहे हैं. हालांकि, उन्होंने सदन को जवाब दिया कि राज्य सरकार सड़क सुरक्षा को लेकर उपाय कर रही है. उन्होंने बताया कि पूरे राज्य में 1,044 ऐसी जगहें हैं, जिन्हें ब्लैक स्पॉट के रूप में चिन्हित किया गया है.

इन ब्लैक स्पॉट पर विभागीय स्तर पर कार्रवाई की जा रही है. उनका कहना था कि पथ निर्माण विभाग विशेष रूप से जागरूकता अभियान चलाने की तैयारी में है. इसके अलावा सड़कों पर जरूरी सुरक्षा निर्देश और साइनेज लगाने की भी तैयारी है. आवश्यकता पड़ने पर ज़ेब्रा क्रॉसिंग की संख्या भी बढ़ाई जाएगी.

अटल पथ क्या देश की सबसे असुरक्षित सड़क?

तारांकित प्रश्न की श्रेणी में कांग्रेस के विधान परिषद सदस्य मदन मोहन झा के एक सवाल पर भी खूब बवाल मचा. दरअसल, मदन मोहन झा ने राज्य सरकार से पूछा था कि राज्य की आधुनिक सड़कों में शुमार अटल पथ क्या देश की सबसे असुरक्षित सड़कों में शामिल हो गई है? क्या अब यह डेथ ट्रैप के रूप में देखा जा रहा है? मदन मोहन झा के अनुपस्थित रहने पर कांग्रेस के एक अन्य विधान परिषद सदस्य समीर कुमार सिंह ने यह सवाल उठाया.

फुट ओवर ब्रिज का नहीं होता इस्तेमाल

समीर कुमार सिंह ने कहा कि दिन हो, रात हो या सुबह, अक्सर चीखने की आवाज आती है और जब कारण पता चलता है तो मालूम होता है कि अटल पथ पर हादसा हुआ है. सरकार से उनका सवाल था कि अटल पथ पर क्या गति नियंत्रण की कोई प्रभावी व्यवस्था है, जो लोगों के सफर को सुरक्षित बना सके?

सरकार की ओर से जवाब देते हुए पथ निर्माण विभाग के मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि अटल पथ पर फुट ओवर ब्रिज बनाया गया है, लेकिन सीसीटीवी फुटेज के अनुसार केवल 5 से 10 लोग ही इसका उपयोग करते हैं. अटल पथ पर पर्याप्त संख्या में साइन बोर्ड, सुरक्षा निर्देश वाले बोर्ड, सर्विस रोड और फुट ओवर ब्रिज मौजूद हैं, लेकिन लोगों में जागरूकता की कमी है. लोग ओवरब्रिज का इस्तेमाल नहीं करते. जहां तक अटल पथ के निर्माण की बात है, तो इसका निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप किया गया है.

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