क्या कम हो जाएंगे सोने और चांदी के दाम, सरकार ने घटा दी…- भारत संपर्क

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क्या कम हो जाएंगे सोने और चांदी के दाम, सरकार ने घटा दी…- भारत संपर्क
क्या कम हो जाएंगे सोने और चांदी के दाम, सरकार ने घटा दी इंपोर्ट ड्यूटी

सोना-चांदी

सरकार ने सोने और चांदी की इंपोर्ट कीमतों में कटौती की है. इससे कस्टम ड्यूटी तय करने के लिए इस्तेमाल होने वाली तयशुदा कीमत कम हो गई है और इंपोर्ट पर लगने वाला टैक्स बोझ भी घट गया है, जबकि सोने और चांदी की अंतरराष्ट्रीय कीमतें अभी भी अपने ऊंचे स्तर के आसपास बनी हुई हैं. सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स (CBIC) के जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, ड्यूटी कम हुई है. इस फैसले से आने वाले दिनों सोने-चांदी की कीमतें कम हो सकती हैं.

सोने की बेस इंपोर्ट कीमत करीब 50 डॉलर घटाकर 1,518 डॉलर प्रति 10 ग्राम कर दी गई है. वहीं, चांदी की कीमत में 800 डॉलर से ज्यादा की कटौती की गई है और इसे 2,657 डॉलर प्रति किलोग्राम तय किया गया है. ये बदली हुई कीमतें तय टैरिफ कैटेगरी के तहत किसी भी रूप में इंपोर्ट किए जाने वाले सोने और चांदी पर लागू होंगी. अगर ग्लोबल मार्केट में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट होती है तो भारत में सोने और चांदी के दाम कम हो जाएंगे. पहले इंपोर्ट ड्यूटी ज्यादा होने से दामों में कमी कम होती मगर कटौती के बाद कमी ज्यादा हो जाएगी. यानी गोल्ड सिल्वर ज्यादा सस्ते हो जाएंगे.

किन पर हुई कमी

ड्यूटी में यह कमी हाई-प्योरिटी सोने की छड़ों और सिक्कों के साथ-साथ चांदी के बुलियन और मेडल पर भी लागू होगी. हालांकि, इसमें गहने, कीमती धातुओं से बनी अन्य चीजें और पोस्ट, कूरियर या सामान के साथ लाए गए इंपोर्ट शामिल नहीं हैं.

चांदी की बेस इंपोर्ट कीमत में आखिरी बार 27 जनवरी को बदलाव किया गया था, जबकि सोने की कीमतों को 22 जनवरी को आखिरी बार बदला गया था. सरकार आमतौर पर हर पंद्रह दिन में सोने और चांदी की इंपोर्ट कीमतों की समीक्षा करती है.

कटौती के मायने

सोने और चांदी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंचने के कारण माना जा रहा है कि अगर इंपोर्ट की मात्रा में कोई बदलाव न भी हो, तो भी इंपोर्ट की कुल कीमत तेजी से बढ़ेगी. इससे व्यापार घाटे को लेकर चिंता बढ़ सकती है और रुपये पर दबाव और बढ़ सकता है, जो पहले से ही डॉलर के मुकाबले कमजोर चल रहा है.

इंपोर्ट कीमतों में यह कटौती ऐसे समय हुई है जब व्यापार और उद्योग से जुड़े अधिकारी पहले से सतर्क थे. उन्होंने चेतावनी दी थी कि बढ़ते जोखिम सरकार को आने वाले हफ्तों में सोने और चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने पर सोचने के लिए मजबूर कर सकते हैं. मगर सरकार ने सारे अनुमानों के उलट कटौती करने का फैसला लिया है.

सोने-चांदी का इंपोर्ट

भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता और चांदी का सबसे बड़ा बाजार है. हालांकि, देश अपनी सोने की लगभग पूरी जरूरत इंपोर्ट से पूरी करता है और चांदी की 80 प्रतिशत से ज्यादा मांग के लिए विदेशों पर निर्भर है.

पिछले साल भारत ने अपने कुल विदेशी मुद्रा भंडार का करीब दसवां हिस्सा सोने और चांदी के इंपोर्ट पर खर्च किया था. उम्मीद है कि 2026 में यह इंपोर्ट बिल और बढ़ेगा, क्योंकि दोनों कीमती धातुओं की कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं.

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