कहानी इटावा के दौलत सिंह की, जो 20 साल बाद लौटे अपने घर; पढ़ें उनके गायब हो… – भारत संपर्क

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कहानी इटावा के दौलत सिंह की, जो 20 साल बाद लौटे अपने घर; पढ़ें उनके गायब हो… – भारत संपर्क

इटावा जिले के बकेवर थाना क्षेत्र के कुशगंवा अहीरान गावं के नगला मोतीराम निवासी दौलत सिंह करीब 20 साल बाद अपने घर लौट आए हैं. मानसिक हालत बिगड़ने के बाद वह वर्षों पहले लापता हो गए थे और भटकते हुए नेपाल पहुंच गए. वहां जनकपुर के मानव सेवा आश्रम में उन्हें संरक्षण और इलाज मिला. बाद में महाराष्ट्र की एक संस्था की मदद से उन्हें परिवार तक पहुंचाया गया. गांव के परिजनों ने उन्हें पहचान लिया, लेकिन बहन ने पहचानने से इनकार कर दिया, जिससे इलाके में तरह तरह की चर्चाएं भी हो रही हैं.
भटकते हुए नेपाल पहुंचे, पिर आश्रम में रहे
परिवार के अनुसार, दौलत सिंह बचपन से ही मानसिक रूप से कमजोर थे. करीब 20 साल पहले वह घर से लापता हो गए थे. इसी दौरान उन्होंने कई शहरों और कस्बों में भटकते हुए जीवन गुजारा. कभी सड़क किनारे पड़ा खाना खाया तो कभी लोगों के सहारे पेट भरा. भटकते हुए वह नेपाल के जनकपुर पहुंच गए. वहां उनकी हालत की जानकारी मानव सेवा आश्रम के संचालक को मिली. आश्रम में उन्हें रखा गया और इलाज शुरू कराया गया. धीरे-धीरे उनकी स्थिति में सुधार होने लगा. इलाज के दौरान उन्होंने बताया कि वह भारत के इटावा जिले के रहने वाले हैं और अपने परिवार से बिछड़ गए हैं.

महाराष्ट्र के रास्ते हुई घर वापसी
मानव सेवा आश्रम के संचालक ने जनवरी 2026 में महाराष्ट्र में संचालित श्रद्धा फाउंडेशन से संपर्क किया. संस्था की मदद से उन्हें नेपाल से महाराष्ट्र लाया गया, जहां आगे इलाज और कागजी प्रक्रिया पूरी की गई. स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद फरवरी 2026 में उन्हें उत्तर प्रदेश लाने की तैयारी की गई.

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फाउंडेशन की एक कार्यकर्ता उन्हें औरैया जिले के अजीतमल स्थित उनकी बहन प्रेमलता के घर लेकर पहुंची. वहां मोहल्ले के लोगों ने उन्हें देखते ही पहचान लिया और पुरानी बातें भी याद कीं. हालांकि उनकी बहन ने भाई को पहचानने से इनकार कर दिया. इस बात को लेकर आसपास के इलाके में अलग-अलग तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं.
पुलिस की मौजूदगी में पैतृक गांव पहुंचे
मामले की जानकारी मिलने पर अजीतमल कोतवाल लालतेश त्रिपाठी ने सहयोग किया. बीते मंगलवार की शाम पुलिस बल के साथ दौलत सिंह को उनके पैतृक गांव कुशगंवा अहीरान लाया गया. गांव पहुंचते ही दौलत सिंह ने अपने चचेरे भाई, चाचा और चाची को पहचान लिया. परिजनों ने भी उन्हें पहचान कर गले लगाया और सही सलामत घर लौटने पर खुशी जताई.
परिवार ने बताया कि उनकी मां रामबेटी का निधन करीब 40 साल पहले हो गया था. इसके तीन साल बाद पिता रामसेवक भी चल बसे. तब से उनकी चाची बगुला देवी ने उनकी देखभाल की थी. वर्ष 2006 के आसपास वह अजीतमल के राजीव नगर में अपनी बहन के साथ रह रहे थे. उस समय उनकी स्थिति सामान्य थी और मोहल्ले में सबके साथ मेलजोल था.
बहन ने पहचानने से किया इनकार
इसी दौरान संदिग्ध हालात में उन्हें गंभीर चोट लग गई. उनका मानसिक संतुलन धीरे-धीरे बिगड़ता चला गया. आर्थिक तंगी और सही इलाज के अभाव में हालत और खराब हो गई. कुछ समय बाद वह घर से निकल गए और फिर कोई पता नहीं चला. अब करीब दो दशक बाद उनकी घर वापसी से परिवार को सुकून मिला है. हालांकि बहन द्वारा पहचानने से इनकार करने की बात अभी भी चर्चा का विषय बनी हुई है. गांव में लोग इसे किसी फिल्मी कहानी जैसा मान रहे हैं, लेकिन परिवार के लिए यह लंबे इंतजार के बाद मिली बड़ी राहत है.

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