ट्रंप ने दुनिया के सबसे बड़े युद्धपोत को मिडिल-ईस्ट भेजा, क्यों अहम है ये तैनाती? – भारत संपर्क
अमेरिका ने USS जेराल्ड आर. फोर्ड को मिडिल-ईस्ट भेजाImage Credit source: Mass Communication Specialist 2nd Class Ridge Leoni/U.S. Navy via Getty Images
अमेरिका ईरान के बीच तनाव लगातार तनाव बढ़ रहा है. इस बीच अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी भी बढ़ा रहा है. अभी हाल ही खबर आई है कि अमेरिका अब अपना सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर USS जेराल्ड आर. फोर्ड वहां भेज रहा है. रॉयटर्स को दो अमेरिकी अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी है.
अधिकारी के मुताबिक, जेराल्ड को मिडिल ईस्ट पहुंचने में एक हफ्ता लगेगा. वहां पहले से अब्राहम लिंकन कैरियर और दूसरे युद्धपोत तैनात हैं. इस कदम से समुद्र और आसमान दोनों से ईरान पर सैन्य दबाव बढ़ने की आशंका है.
दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट
यह एक न्यूक्लियर-पावर्ड कैरियर एयरक्राफ्ट है और इसमें 75 से ज्यादा सैन्य विमान तैनात किए जा सकते हैं. इनमें एफ-18 सुपर हॉर्नेट फाइटर जेट और ई-2 हॉकआई जैसे अर्ली वार्निंग विमान शामिल हैं. इसमें अत्याधुनिक रडार सिस्टम भी लगा है, जो हवाई यातायात और नेविगेशन को नियंत्रित करने में मदद करता है.
USS जेराल्ड आर. फोर्ड इससे पहले यूरोप में तैनात होना था, लेकिन नवंबर में अचानक इसे कैरेबियन सागर में भेज दिया गया. यह इस साल वेनेजुएला में हुए अमेरिकी ऑपरेशन में भी हिस्सा ले चुका है. इसके अलावा हाल के हफ्तों में कई गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर, फाइटर जेट और निगरानी विमान भी मिडिल ईस्ट में भेजे गए हैं.
क्यों अहम है यह तैनाती?
अमेरिकी नौसेना के पास कुल सिर्फ 11 एयरक्राफ्ट कैरियर हैं, इसलिए ये बहुत कीमती संसाधन हैं और इनकी तैनाती का कार्यक्रम पहले से तय होता है. पिछले साल जून में जब ईरान इजराइल के बीच जंग शुरू हुई थी, तब ईरान के न्यूक्लियर साइट्स पर हमलों के समय भी अमेरिका के पास क्षेत्र में दो कैरियर थे. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप साथ ही ये भी कह चुके हैं कि अगर ईरान के साथ कोई समझौता नहीं हुआ तो वे दूसरा कैरियर भेजने पर विचार कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि अगले एक महीने में ईरान के साथ समझौता हो सकता है, नहीं तो अंजाम बुरे होंगे.
अरब सागर में USS अब्राहम लिंकन पहले से तैनात
अमेरिकी जंगी जहाज USS अब्राहम लिंकन अरब सागर में ईरान पहुंच चुका है. ईरान के कई शहर इसकी स्ट्राइक रेंज में हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक यह अरब सागर में अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENCOM) की जोन में आ चुका है. साथ ही अमेरिका का C 37-B एयरक्राफ्ट भी ईरान पहुंच गया है. तो कुल मिलाकर अमेरिका अब ईरान के परमाणु ठिकानों, सैन्य अड्डों व कमांड सेंटरों पर समुद्र और आसमान दोनों से हमले की स्थिति में आ गया है.
