Randhir Kapoor: ‘मुझे गोद ले लो…’ अमीर बेटियां करिश्मा-करीना से मांगी थी पिता… – भारत संपर्क
रणधीर कपूर
Kapoor Family History: हिंदी सिनेमा में कपूर खानदान सबसे बड़े खानदानों में से एक है. कई जेनरेशंस से कपूर परिवार के बच्चे सिनेमा में हैं और लगभग सभी का एक सफल करियर रहा है. जहां राज कपूर, ऋषि कपूर, रणबीर, करीना और करिश्मा ने इंडस्ट्री पर राज किया, वहीं एक ऐसे भी कपूर थे, जिनको वैसे तो फैंस का खूब प्यार मिला, लेकिन अपनी पर्सनल लाइफ में वो हमेशा कुछ न कुछ ढूंढते रहे.
हम बात कर रहे हैं करिश्मा कपूर और करीना कपूर खान के पिता रणधीर कपूर की. रणधीर जब इंडस्ट्री में आए थे तो पिता का नाम रोशन करने का सपना लेकर आए थे. उनको शुरुआती करियर में सफलता देखने को भी मिली. रणधीर ने अपने प्रोफेशनल करियर में एक से एक फिल्में कीं, लेकिन बबिता से शादी में वो सफल नहीं हो पाए.
राज कपूर ने करवाई थी शादी
रणधीर ने हाल ही में इस बारे में बात की. वो अक्सर अपनी पर्सनल लाइफ और की हुई गलतियों के बारे में मुखर होकर बात करते हैं. रणधीर ने बताया कि उनकी सिनेमा में असफलता ने उनकी शादीशुदा जिंदगी पर काफी प्रभाव डाला. उन्हें शराब की लत लग गई और वो उसी में डूब गए. रणधीर की पत्नी बबिता से मुलाकात पिता राज कपूर की फिल्म ‘संगम’ के सेट पर हुई थी. रणधीर तुरंत ही बबिता के प्यार में पड़ गए थे. हालांकि, उनका शादी करने का कोई इरादा नहीं था, लेकिन पिता के कहने पर उन्होंने बबिता से शादी की थी. कपिल के शो में एक बार रणधीर ने बताया था- ‘मैं टाइमपास किए जा रहा था, लेकिन पापा ने कहा शादी-वादी करने का इरादा है या नहीं?’ इसके बाद दोनों की शादी हो गई.
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बेटियों संग कैसा है रिश्ता?
बबिता और रणधीर की शादी साल 1971 में हुई थी. बबिता उस वक्त एक सफल एक्ट्रेस थीं, लेकिन उन्होंने इंडस्ट्री छोड़ दी क्योंकि कपूर फैमिली में औरतें फिल्मों में काम नहीं करती थीं. 1980 आते-आते रणधीर का करियर भी खत्म होने की कगार पर आ गया और उन्हें एक फ्लॉप एक्टर का तमगा मिल गया. 1988 में बबिता और दोनों बेटियों को छोड़कर रणधीर माता-पिता के साथ रहने लगे, और 14 साल की करिश्मा और 8 साल की करीना को बबिता ने अकेले के दम पर पाला. बबिता ने कभी दूसरी शादी नहीं की. रणधीर ने बेटियों की सक्सेस के बारे में बात करते हुए बताया था कि उन्होंने एक बार बेटियों से कहा था कि वो उन्हें गोद ले लें.
रणधीर ने खुद कहा था कि उन्हें जो मिला, मिलता चला गया और ऐसे में वो कहीं न कहीं भटक गए. बबिता ने अकेले के दम पर दोनों बेटियों की परवरिश की और आज वो दोनों ही सफल हैं. रणधीर ने कहा कि वो खुश हैं कि उनकी बेटियों के पास उनसे ज्यादा दौलत है और वो चाहते हैं कि वो हमेशा खुश रहें. बबिता भले उनसे अलग रहती हैं लेकिन कभी-कभी दोनों लंच के लिए एक दूसरे से मिलते हैं और पुरानी गलतियों पर हंसते हैं.
