मिडिल ईस्ट में तुर्किये से आगे निकला सऊदी, इन चार मामलों में बढ़त हासिल की – भारत संपर्क

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मिडिल ईस्ट में तुर्किये से आगे निकला सऊदी, इन चार मामलों में बढ़त हासिल की – भारत संपर्क
मिडिल ईस्ट में तुर्किये से आगे निकला सऊदी, इन चार मामलों में बढ़त हासिल की

मिडिल ईस्ट की रणनीतिक राजनीति में सऊदी अरब लगातार अपनी पकड़ मजबूत करता दिख रहा है. हाल के घटनाक्रम बताते हैं कि कई अहम मामलों में सऊदी, तुर्किये से आगे निकलता नजर आ रहा है. परमाणु सुरक्षा से लेकर लड़ाकू विमानों तक. आइए जानते हैं किन चार बड़े मोर्चों पर रियाद की स्थिति मजबूत हुई है.

1. पाकिस्तान से परमाणु गारंटी हासिल, तुर्किये को नहीं मिला फायदा

सऊदी अरब ने पाकिस्तान के साथ सितंबर 2025 में एक रणनीतिक समझौता किया था. इसके बाद पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा था कि पाकिस्तान का परमाणु कार्यक्रम जरूरत पड़ने पर सऊदी अरब को उपलब्ध कराया जाएगा. इस समझौते पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने साइन किए थे. दूसरी तरफ तुर्किये को पाकिस्तान से इस तरह की कोई परमाणु गारंटी नहीं मिल पाई है. यही वजह है कि क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में सऊदी की स्थिति ज्यादा मजबूत मानी जा रही है.

2. अमेरिका से 48 F-35 की डील, तुर्किये को झटका

सऊदी अरब ने अमेरिका से 48 F-35 लड़ाकू विमान मिलने खरीदने की डील की है. F-35 को दुनिया के सबसे एडवांस स्टील्थ फाइटर जेट्स में गिना जाता है, जो दुश्मन की रडार पकड़ से बचकर सटीक हमला कर सकते हैं. इधर सऊदी, तुर्किये से कान फाइटर जेट्स की खरीदारी भी करने वाला है. हालांकि अमेरिका ने इस पर नाराजगी जताई है. दरअसल, वाशिंगटन नहीं चाहता है कि एफ-35 का इस्तेमाल करने वाला कोई मुल्क किसी दूसरे देश का फाइटर जेट इस्तेमाल करे.

3. यमन, सूडान और अल्जीरिया में बढ़ता सऊदी प्रभाव

क्षेत्रीय राजनीति में भी सऊदी ज्यादा सक्रिय दिख रहा है. यमन में यूएई समर्थित दक्षिणी ताकतों के बढ़ते प्रभाव के बीच सऊदी के दबाव के बाद यूएई को पीछे हटना पड़ा. सूडान में यूएई समर्थित RSF के संकट के बीच सऊदी ने अमेरिका की एंट्री कराकर हालात पर असर डाला. अब अल्जीरिया में भी सऊदी तेजी से अपनी पकड़ बना रहा है. अल्जीरिया ने यूएई के कुछ पुराने समझौते रद्द कर दिए हैं और सऊदी के साथ नई सुरक्षा डील पर बातचीत चल रही है. अगर यह समझौता होता है तो अल्जीरिया की सुरक्षा में सऊदी की भूमिका बढ़ सकती है.

4. अमेरिका के साथ-साथ रूस से भी गहरे होते रिश्ते

सऊदी अरब अब वैश्विक स्तर पर संतुलित कूटनीति अपनाता दिख रहा है. अमेरिका के पारंपरिक सहयोग के साथ-साथ उसने रूस से भी रिश्ते मजबूत किए हैं. रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने सऊदी को मध्य पूर्व का अहम रणनीतिक साझेदार बताया और कहा कि रियाद और मॉस्को के बीच लगातार हाईलेवल की बातचीत हो रही है. उन्होंने सऊदी क्राउन प्रिंस के नेतृत्व में रियाद के तेज विकास की भी तारीफ की. पिछले दो दशकों में किंग सलमान, मोहम्मद बिन सलमान और राष्ट्रपति पुतिन के बीच भरोसे पर आधारित संबंध बने हैं, जो आगे और गहरे हो सकते हैं.

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