CGPSC घोटाले से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले में ईडी ने बलरामपुर के एडिशनल कलेक्टर को किया गिरफ्तार, कोर्ट में पेश कर 6 दिन की रिमांड पर लिया

HighLights
- पूछताछ के लिए बुलाया गया था, इसके बाद गिरफ्तारी
- पूर्व सीएम भूपेश बघेल के कार्यालय में ओएसडी पद पर तैनात थे
- मामले में ईडी पहले ही चेयरमैन को गिरफ्तार कर चुकी है
राज्य ब्यूरो, ,रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) भर्ती परीक्षा-2021-22 में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी)ने शुक्रवार को बलरामपुर-रामानुजगंज के एडिशनल कलेक्टर चेतन बोरघरिया को गिरफ्तार किया है।
शुक्रवार को विशेष अदालत में पेश कर पूछताछ के लिए छह दिन की रिमांड पर लिया है। इससे पहले एक सितंबर को धमतरी और बलरामपुर में ईडी ने कार्रवाई की थी।
पूछताछ के लिए बुलाया गया था, इसके बाद गिरफ्तारी
धमतरी में अपर कलेक्टर बोरघरिया के अमलतास पुरम स्थित घर पर टीम ने छापा मारा था जबकि बलरामपुर सर्किट हाउस में बुलाकर पूछताछ की गई थी। इसके बाद से वे कार्यालय नहीं आ रहे थे। सूत्रों ने बताया कि चेतन बोरघरिया को ईडी के जोनल कार्यालय में शुक्रवार को पूछताछ के लिए बुलाया गया था, इसके बाद उनकी गिरफ्तारी की गई।
पूर्व सीएम भूपेश बघेल के कार्यालय में ओएसडी पद पर तैनात थे
चेतन बोरघरिया पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान वर्ष 2019 से 2022 तक तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यालय में ओएसडी (आफिसर आन स्पेशल ड्यूटी) के पद पर तैनात रहे थे। उनकी गिरफ्तारी के बाद सीजीपीएससी परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच में ईडी की कार्रवाई और तेज होने के संकेत हैं।
मामले में ईडी पहले ही चेयरमैन को गिरफ्तार कर चुकी है
इस मामले में ईडी इससे पहले सीजीपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी और भूपेश बघेल के तत्कालीन निजी सहायक के भतीजे उत्कर्ष चंद्राकर समेत अन्य को गिरफ्तार कर चुकी है। अब चेतन बोरघरिया की गिरफ्तारी मामले में बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।
2020-21 की परीक्षाओं में गड़बड़ी का आरोप
ईडी की मनी लांड्रिंग जांच का संबंध सीजीपीएससी की वर्ष 2020 और 2021 में आयोजित राज्य सेवा परीक्षाओं में कथित भ्रष्टाचार, प्रश्नपत्र लीक और परीक्षा परिणामों में हेरफेर के आरोपों से है। जांच एजेंसी इन कथित अनियमितताओं से अर्जित धन और उससे जुड़े लेन-देन की पड़ताल कर रही है।
बोरघरिया की गिरफ्तारी से अब जांच में उनकी कथित भूमिका और तत्कालीन मुख्यमंत्री कार्यालय में उनकी तैनाती के दौरान लिए गए फैसलों को लेकर भी पूछताछ होने की संभावना है। हालांकि, मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
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