विजय-भूपेश की हाई प्रोफाइल चुनाव याचिका पर 17 सितंबर को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट सुनाएगा बड़ा फैसला
विजय बघेल भूपेश बघेलHighLights
- र्व सीएम भूपेश बघेल ने आदेश 7 नियम 11 के तहत दिया आवेदन।
- व्यक्तिगत रूप से पहुंचे विजय बघेल और गवाह सौरभ दुबे को लौटना पड़ा।
- लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 86(1) और सीपीसी के तहत उठाई गई है प्रारंभिक आपत्ति।
, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की हाई प्रोफाइल चुनावी लड़ाई अब एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ पर पहुंच गई है। दुर्ग लोकसभा क्षेत्र के सांसद विजय बघेल की चुनाव याचिका पर हाई कोर्ट 17 सितंबर को फैसला सुनाएगा कि मामला आगे साक्ष्य और सुनवाई के चरण में बढ़ेगा या प्रारंभिक स्तर पर ही समाप्त हो जाएगा।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की ओर से चुनाव याचिका को प्रारंभिक स्तर पर खारिज करने की मांग करते हुए सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश सात नियम 11 के तहत आवेदन पेश किया गया है। इसमें लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 86(1) का भी हवाला दिया गया है। जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की कोर्ट में 10 सितंबर को इस मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान चुनाव याचिकाकर्ता विजय बघेल और उनके गवाह सौरभ दुबे अपने साक्ष्य दर्ज कराने के लिए व्यक्तिगत रूप से मौजूद थे। हालांकि, भूपेश बघेल की ओर से दाखिल आवेदन के कारण साक्ष्य दर्ज नहीं हो सका। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने आवेदन पर आदेश के लिए 17 सितंबर की तारीख तय की है।
साक्ष्य दर्ज कराने पहुंचे थे विजय बघेल
18 अगस्त 2026 को अधिवक्ताओं की मौजूदगी में मामले को 10 सितंबर को चुनाव याचिकाकर्ता का साक्ष्य दर्ज करने के लिए निर्धारित किया गया था। तय कार्यक्रम के अनुसार विजय बघेल और उनके गवाह सौरभ दुबे हाई कोर्ट पहुंचे थे। सुनवाई शुरू होने पर भूपेश बघेल की ओर से बताया गया कि 9 सितंबर को आदेश सात नियम 11 के तहत आवेदन दाखिल किया गया है। आवेदन में चुनाव याचिका को प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज करने का आग्रह किया गया है। इसके साथ ही लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 86(1) का भी उल्लेख किया गया है।
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विजय बघेल ने उसी दिन दाखिल किया जवाब
आवेदन पेश होने के बाद चुनाव याचिकाकर्ता विजय बघेल की ओर से उसी दिन उसका जवाब दाखिल कर दिया गया। दोनों पक्षों की सहमति से हाई कोर्ट ने आवेदन पर तत्काल बहस सुनी। भूपेश बघेल की ओर से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से अधिवक्ता मयंक जैन उपस्थित हुए। उनके साथ अन्य अधिवक्ताओं ने भी पैरवी की। वहीं चुनाव याचिकाकर्ता विजय बघेल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता टीके झा सहित अन्य अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा।
आवेदन के कारण साक्ष्य दर्ज नहीं हो सका
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में दर्ज किया कि आदेश सात नियम 11 के तहत आवेदन दाखिल किए जाने के कारण चुनाव याचिकाकर्ता का साक्ष्य दर्ज नहीं किया जा सका। आवेदन पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने मामले को 17 सितंबर 2026 को आदेश पारित करने के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
अब हाई कोर्ट के आदेश से यह स्पष्ट होगा कि चुनाव याचिका की सुनवाई आगे साक्ष्य के चरण में जाएगी या भूपेश बघेल की आपत्ति स्वीकार होने पर मामला प्रारंभिक स्तर पर ही समाप्त हो जाएगा।
यह है आदेश सात नियम 11 का आवेदन
सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश सात नियम 11 के तहत प्रतिवादी किसी वाद या याचिका को प्रारंभिक स्तर पर खारिज करने की मांग कर सकता है, जब उसमें कानूनन कार्रवाई का आधार नहीं बनता अथवा वह निर्धारित कानूनी कसौटियों को पूरा नहीं करती। चुनाव याचिका के मामले में भूपेश बघेल की ओर से इसी प्रावधान के आधार पर प्रारंभिक आपत्ति उठाई गई है। इसके साथ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 86(1) का हवाला दिए जाने से आवेदन का कानूनी महत्व और बढ़ गया है
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