
सावन-भादो में भीषण बारिश के बावजूद छत्तीसगढ़ में जल संचयन की व्यवस्था कमजोर बनी हुई है। राज्य गठन के बाद बांधों की कुल सिंचाई क्षमता बढ़कर 21.84 लाख हेक्टेयर पहुंच गई है, लेकिन वास्तविक रूप से केवल 13.38 लाख हेक्टेयर भूमि में ही सिंचाई हो पा रही है। अंतरराज्यीय जल विवादों, अधूरी नहरों और प्रशासनिक लेटलतीफी के कारण प्रदेश के किसान आज भी परेशान हैं।
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