छत्तीसगढ़ में बिजली संकट गहराया, मांग 6,800 मेगावाट पहुंची, रोजाना 700 मेगावाट तक अतिरिक्त बिजली खरीदी जा रही

HighLights
- राज्य विद्युत नियामक आयोग ने पावर कंपनी से जवाब तलब किया
- दूसरे राज्यों और पावर एक्सचेंज से अतिरिक्त बिजली खरीदनी पड़ रही
- 10 रुपये प्रति यूनिट कीमत चुकाने पर भी जरूरत अनुसार नहीं मिल रही
राज्य ब्यूरो,,रायपुर। छत्तीसगढ़ में बिजली की मांग में अचानक 1,500 मेगावाट का उछाल आने से आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। अक्टूबर में बिजली की अधिकतम खपत पिछले साल के 5,300 मेगावाट से बढ़कर इस बार 6,800 मेगावाट तक पहुंच गई है।
कृषि क्षेत्र में बढ़ती मांग, गर्मी और त्योहारों के कारण खपत में इजाफा हुआ है। हालात ऐसे हैं कि पावर एक्सचेंज में 10 रुपये प्रति यूनिट तक कीमत चुकाने के बावजूद जरूरत के अनुसार बिजली मिलना मुश्किल हो रहा है।
राज्य विद्युत नियामक आयोग ने पावर कंपनी से जवाब तलब किया
वहीं, बिजली की मांग की पूर्ति करने कंपनी ने उद्योगों में बिजली कटौती शुरू की है। इसे लेकर राज्य विद्युत नियामक आयोग ने पावर कंपनी से जवाब तलब किया है। बिजली वितरण कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, बिजली संकट केवल प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में मांग के मुकाबले उपलब्धता कम है।
दूसरे राज्यों और पावर एक्सचेंज से अतिरिक्त बिजली खरीदनी पड़ रही
पिछले साल अक्टूबर में जहां अधिकतम मांग करीब 5300 मेगावाट थी, वहीं इस बार यह 6800 मेगावाट तक पहुंच गई। अचानक बढ़ी मांग के कारण आपूर्ति बनाए रखने के लिए दूसरे राज्यों और पावर एक्सचेंज से अतिरिक्त बिजली खरीदनी पड़ रही है।
रोजाना 100 से 700 मेगावाट तक अतिरिक्त बिजली खरीदी जा रही
राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी के संयंत्र पूरी क्षमता से बिजली बना रहे हैं। हालांकि, 250 मेगावाट क्षमता वाली डॉ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी थर्मल पावर स्टेशन कोरबा ईस्ट (डीएसपीएम) की एक इकाई वार्षिक रख-रखाव के कारण बंद है। इसकी भरपाई के लिए वैकल्पिक स्रोतों से बिजली ली जा रही है।
पिछले सप्ताह उत्तर प्रदेश से 200 मेगावाट बिजली प्राप्त हुई थी। वर्तमान में मांग और उपलब्धता के अनुसार रोजाना 100 से 700 मेगावाट तक अतिरिक्त बिजली खरीदी जा रही है।
अतिरिक्त बिजली जुटाना चुनौती बन गया है
हरियाणा में बारिश के कारण उपलब्ध अतिरिक्त बिजली का लाभ भी प्रदेश को मिला है। इसके बावजूद देशभर में बिजली की कमी के कारण अतिरिक्त बिजली जुटाना चुनौती बन गया है। बिजली कंपनी के अधिकारियों के अनुसार, तमिलनाडु को भी 37 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदनी पड़ रही है। इससे संकट की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
फसल कटाई के बाद राहत की उम्मीद
बिजली की बढ़ती मांग और कटौती की शिकायतों के बीच राज्य विद्युत नियामक आयोग ने पावर कंपनी से जवाब मांगा है। कंपनी के अधिकारियों को उम्मीद है कि फसल कटाई पूरी होने और ठंड बढ़ने के साथ कृषि क्षेत्र में बिजली की मांग घटेगी।
इससे आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव कम हो सकता है। फिलहाल मांग और उपलब्धता के बीच संतुलन बनाए रखना पावर कंपनी के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
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