NEET Success Story: महुआ और तेंदूपत्ता बीनने वाले बस्तर के 4 होनहार बनेंगे डॉक्टर, ज्ञानगुड़ी के 52 बच्चों ने नीट किया क्वालीफाई
NEET Success Story: महुआ और तेंदूपत्ता बीनने वाले बस्तर के 4 होनहार बनेंगे डॉक्टरHighLights
- बस्तर के ज्ञानगुड़ी से 52 ने नीट क्वालीफाई किया, 4 को मिला MBBS
- महुआ बीनने वाली गीतेश्वरी व लोहार की बेटी कृष्णा बनेंगी डॉक्टर
- समीर और खुशबू का भी मेडिकल कॉलेज में हुआ चयन, पूरा हुआ सपना
अनिमेष पाल, नईदुनिया, जगदलपुर। कभी खेत में पिता का हाथ बंटाया, कभी जंगल से महुआ-तेंदूपत्ता बटोरा और कभी सीमित संसाधनों के बीच पढ़ाई का रास्ता तलाशा। इन बच्चों के सामने परिस्थितियां आसान नहीं थीं, लेकिन सपने बड़े थे। अब यही सपने उन्हें मेडिकल कॉलेज की दहलीज तक ले आए हैं। बस्तर के चार बच्चे अब डॉक्टर बनने की राह पर हैं।
धरमपुरा स्थित ज्ञानगुड़ी में नीट की तैयारी करने वाले 90 विद्यार्थियों में से इस वर्ष 52 ने नीट क्वालीफाई किया और अब चार विद्यार्थियों का चयन एमबीबीएस कॉलेज के लिए हुआ। इन चारों की कहानी अलग-अलग घरों से निकलती है, लेकिन संघर्ष की जमीन एक है-अभावों के बीच पढ़ाई और बेहतर भविष्य की जिद।
खेतों से क्लासरूम तक पहुंचा समीर
फरसगांव के चुरेगांव निवासी समीर मरकाम किसान परिवार से हैं। पिता खेती करते हैं और मां लंबे समय से बीमार हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी थी कि पढ़ाई के साथ उन्हें खेत में भी हाथ बंटाना पड़ता था। गांव में एमबीबीएस डॉक्टर नहीं होने की कमी ने उनके भीतर डॉक्टर बनने का संकल्प पैदा किया। बड़े भाई के सहयोग से ज्ञानगुड़ी पहुंचे समीर ने मेहनत की और अब अपने गांव के पहले एमबीबीएस डॉक्टर बनने की राह पर हैं।
महुआ-तेंदूपत्ता बीनने वाली गीतेश्वरी
कोंडागांव जिले के किसान और वनोपज पर निर्भर परिवार से आने वाली गीतेश्वरी सलाम ने गांव में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को करीब से देखा। परिवार में बीमारी और इलाज के लिए दूर जाना उनके डॉक्टर बनने की प्रेरणा बना। पहले प्रयास में नीट में असफल हुईं तो हौसला टूटा, लेकिन मां और दीदी ने फिर खड़ा किया। ज्ञानगुड़ी में रोज 10-11 घंटे पढ़ाई, साप्ताहिक टेस्ट और गलतियों का विश्लेषण उनकी तैयारी का हिस्सा बना। अब उनका सपना स्त्री रोग विशेषज्ञ बनने का है।
लोहार की बेटी कृष्णा ने रची नई राह
कांकेर के बांदे की कृष्णा सेन के पिता लोहार और मां आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं। बीपीएल परिवार से आने वाली कृष्णा ने 12वीं के बाद नीट की तैयारी शुरू की। ऑनलाइन तैयारी के बाद ज्ञानगुड़ी पहुंचीं, जहां नियमित कक्षाओं और शिक्षकों के मार्गदर्शन ने उनकी तैयारी को दिशा दी। अब उनका अगला पड़ाव मेडिकल कॉलेज है।
खुशबू के सपने को मिली राह
खुशबू विश्वास के पिता शासकीय शिक्षक और मां निजी स्कूल में शिक्षिका हैं। सामान्य परिवार से आने वाली खुशबू ने ज्ञानगुड़ी में नीट की तैयारी की और अब रायपुर मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के लिए चयनित हुई हैं। उनके परिवार के साथ ज्ञानगुड़ी के शिक्षक भी इस उपलब्धि को अपनी सफलता मान रहे हैं।
52 सफल, चार की मंजिल मेडिकल कॉलेज
ज्ञानगुड़ी में नियमित कक्षाओं, साप्ताहिक टेस्ट, डाउट क्लियरिंग और परीक्षा के अनुरूप तैयारी पर जोर दिया गया। शिक्षक श्रीनिवास राव, मनीष श्रीवास्तव, संजीव विश्वास और अलेक्जेंडर चेरियन के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने तैयारी की।
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इन चार बच्चों की सफलता यह संदेश देती है कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती। जरूरत सही अवसर, मार्गदर्शन और लगातार मेहनत की होती है। महुआ और तेंदूपत्ता संग्रहण, खेती और सीमित आमदनी वाले घरों से निकले इन बच्चों ने अभावों को पीछे छोड़कर सफेद कोट की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। उनके सपनों के साथ अब बस्तर के कई और गांवों की उम्मीदें भी आगे बढ़ रही हैं।
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