खनन प्रभावितों के 4000 करोड़ पर उठे सवाल, DMF फंड की कथित गड़बड़ी पर हाई कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा
खनन प्रभावितों के 4000 करोड़ पर उठे सवाल। (एआई जनरेटेड)HighLights
- डीएमएफ फंड के 4000 करोड़ रुपये के उपयोग पर सवाल।
- नियमों की अनदेखी और कथित मनमानी के आरोप लगाए।
- खनन प्रभावित परिवारों को पर्याप्त लाभ नहीं मिलने का आरोप।
, बिलासपुर। डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (डीएमएफ) फंड के उपयोग में कथित अनियमितताओं से जुड़ी जनहित याचिका पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से ताजा हलफनामा मांगा है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने तीन सितंबर 2026 को हुई सुनवाई में राज्य को अब तक हुई कार्रवाई और मामले में सामने आए बाद के घटनाक्रम को रिकॉर्ड पर लाने का निर्देश दिया।
याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से कोई उपस्थित होकर याचिका को आगे बढ़ाने के लिए नहीं आया। इसके बावजूद कोर्ट ने मामले को खारिज नहीं किया और दो सप्ताह बाद उचित बेंच के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
4000 करोड़ के उपयोग में नियमों की अनदेखी का आरोप
- लक्ष्मी चौहान व अन्य की ओर से दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि पिछले वर्षों में डीएमएफ के तहत करीब 4000 करोड़ रुपये के उपयोग में निर्धारित नियमों और दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया। याचिका में विशेष रूप से खनन प्रभावित क्षेत्रों के पात्र परिवारों को योजनाओं का पर्याप्त लाभ नहीं मिलने और निधि के उपयोग में कथित मनमानी का मुद्दा उठाया गया है।
- याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि प्रभावित क्षेत्रों के पात्र परिवारों को रोजगार के उचित अवसर नहीं दिए गए, जबकि डीएमएफ की राशि का बड़ा हिस्सा भवन निर्माण जैसे कार्यों पर खर्च किया गया। इसके अलावा जरूरतमंद और पात्र परिवारों को योजनाओं के लाभ से वंचित किए जाने का भी दावा याचिका में किया गया है।
शिकायत पर बनी तीन सदस्यीय समिति
- याचिकाकर्ता लक्ष्मी चौहान ने 22 अक्टूबर 2024 को केंद्रीय खान मंत्रालय के समक्ष शिकायत की थी। भारत सरकार के अवर सचिव के 20 नवंबर 2024 के पत्र के माध्यम से शिकायत छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव तक पहुंची।
- इसके बाद मामले को संभागायुक्त, बिलासपुर संभाग के माध्यम से कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट, कोरबा के स्तर पर भेजा गया। इसके बाद संभागायुक्त, बिलासपुर संभाग ने छह जनवरी 2026 को शिकायत के निराकरण के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की। समिति की अध्यक्षता उपायुक्त (विकास), संभागायुक्त कार्यालय, बिलासपुर को सौंपी गई थी।
बीमारी के कारण पहले नहीं हो सकी थी उपस्थिति
मामले की पिछली सुनवाई 10 मार्च 2026 को हुई थी। उस समय याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया था कि बीमारी के कारण याचिकाकर्ता संबंधित प्राधिकारी के समक्ष उपस्थित नहीं हो सका था। कोर्ट ने उस समय संबंधित प्राधिकारी को कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करने तथा आवश्यक रिकॉर्ड प्रस्तुत करने की प्रक्रिया जारी रखी थी।
ताजा हलफनामा दाखिल करने का निर्देश
- कोर्ट ने राज्य सरकार को मामले में अब तक हुई कार्रवाई और बाद के घटनाक्रम को शामिल करते हुए ताजा हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके बाद मामले को दो सप्ताह बाद उचित बेंच के समक्ष सुनवाई के लिए रखा जाएगा।
- सुनवाई में हाई कोर्ट ने डीएमएफ फंड में कथित 4000 करोड़ रुपये के दुरुपयोग के आरोपों की मेरिट पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। याचिका अभी लंबित है। राज्य का ताजा हलफनामा आने के बाद ही मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया और सुनवाई की दिशा स्पष्ट होगी।
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