Bangladesh Election 2026: नई दिल्ली से दूरी, बीजिंग-इस्लामाबाद से नजदीकी! ऑब्जर्वर… – भारत संपर्क

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Bangladesh Election 2026: नई दिल्ली से दूरी, बीजिंग-इस्लामाबाद से नजदीकी! ऑब्जर्वर… – भारत संपर्क
Bangladesh Election 2026: नई दिल्ली से दूरी, बीजिंग-इस्लामाबाद से नजदीकी! ऑब्जर्वर सूची से भारत गायब

पीएम मोदी, मोहम्मद यूनुस और शी जिनपिंग.

Bangladesh Election 2026: बांग्लादेश में गुरुवार को होने वाले आम चुनावों के लिए अंतरराष्ट्रीय ऑब्ज़र्वरों की सूची जारी हुई है. यूरोपीय संघ के अलावा 21 देशों के प्रतिनिधि ढाका पहुंच रहे हैं. सूची में पाकिस्तान (8), चीन (3), रूस (2), जापान (4), दक्षिण कोरिया (2), तुर्किए (13) सहित कई एशियाई और अफ्रीकी देशों के नाम हैं, लेकिन सूची में एक नाम नहीं है, वह नाम भारत का है. यह अनुपस्थिति कूटनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है.

बता दें कि बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद बांग्लादेश में यूनुस सरकार का गठन हुआ. यूनुस सरकार के दौरान भारत और बांग्लादेश के बीच रिश्तों में तनाव देखा गया है. अब चुनाव से पहले फिर से बांग्लादेश ने भारत को नदरअंदाज करने की कोशिश की है.

क्या है तथ्यात्मक स्थिति?

उपलब्ध सूची के अनुसार:

•पाकिस्तान से 8 प्रतिनिधि

•चीन से 3 प्रतिनिधि

•भूटान से 2 प्रतिनिधि

•श्रीलंका से 11 प्रतिनिधि

•नेपाल से 1 प्रतिनिधि

•इंडोनेशिया, फिलीपींस, मलेशिया, जॉर्डन, ईरान, जॉर्जिया, रूस, जापान, दक्षिण कोरिया, किर्गिस्तान, उज्बेकिस्तान, दक्षिण अफ्रीका और नाइजीरिया से प्रतिनिधि

•साथ ही यूरोपीय संघ का मिशन

भारत जैसे पड़ोसी मुल्क का नाम आधिकारिक सूची में नहीं है.

चीन-पाकिस्तान का नाम शामिल, भारत नदारद

भारत और बांग्लादेश के संबंध पिछले डेढ़ दशक में रणनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा सहयोग के स्तर पर मजबूत रहे हैं. भारत बांग्लादेश का सबसे बड़ा पड़ोसी है, दोनों देशों के बीच सीमा, व्यापार और ट्रांजिट समझौते सक्रिय हैं. सुरक्षा सहयोग और कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट लगातार बढ़े हैं. ऐसे में चुनावी ऑब्जर्वर सूची से भारत का बाहर रहना सामान्य प्रक्रिया से अलग माना जा रहा है.

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पाकिस्तान से 8 प्रतिनिधियों की संख्या प्रतीकात्मक से अधिक दिखती है. वहीं, चीन बांग्लादेश का एक प्रमुख आर्थिक निवेशक है. इन दोनों देशों की उपस्थिति को कुछ विश्लेषक क्षेत्रीय शक्ति संतुलन के संदर्भ में देख रहे हैं. चुनावों की पारदर्शिता पर अंतरराष्ट्रीय निगाह रहती है. यूरोपीय संघ और एशियाई देशों की मौजूदगी से ढाका यह दिखाना चाहता हो सकता है कि प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय निगरानी में है.

बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति में लंबे समय से विपक्ष यह आरोप लगाता रहा है कि शेख हसीना की सरकार भारत के करीब है.
यदि चुनाव ऐसे माहौल में हो रहे हैं जहां:

•सत्ता-विरोधी नैरेटिव तेज है

•भारत-निकटता एक चुनावी मुद्दा है.

भारत को चुनाव से अलग रखने के क्या मायने?

तो ढाका यह दिखाना चाह सकता है कि चुनाव प्रक्रिया भारत-प्रभाव से मुक्त है. ऐसे में भारत को ऑब्जर्वर सूची से बाहर रखना राजनीतिक रूप से तटस्थता दिखाने का प्रयास हो सकता है.

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ढाका का चुनाव सिर्फ घरेलू राजनीतिक प्रक्रिया नहीं है, यह क्षेत्रीय कूटनीति का भी मंच बन गया है. भारत की अनुपस्थिति संयोग है या संकेत, यह आने वाले दिनों में आधिकारिक बयानों से स्पष्ट होगा, लेकिन इतना तय है:दक्षिण एशिया की राजनीति में हर सूची, हर निमंत्रण और हर अनुपस्थिति, अपने आप में एक संदेश होती है.

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