Harry Potter: ‘जादू जैसा कुछ नहीं होता…’ फिर भी हैरी पॉटर की कहानी में ऐसा… – भारत संपर्क

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Harry Potter: ‘जादू जैसा कुछ नहीं होता…’ फिर भी हैरी पॉटर की कहानी में ऐसा… – भारत संपर्क

2016-17… यानी आज से तकरीबन दस-ग्यारह साल पहले एक रोज टीवी पर मैंने ‘हैरी पॉटर’ सीरीज की पहली फिल्म ‘हैरी पॉटर एंड द सोर्सरर स्टोन’ देखी थी. वो सोशल मीडिया का जमाना नहीं था, और तब फिल्मों को और खासतौर पर हॉलीवुड फिल्मों को देखने के लिए टीवी के इंग्लिश चैनल्स ही एक मात्र सहारा हुआ करते थे. ‘हैरी पॉटर’ फिल्में WB यानी वॉर्नर ब्रॉस चैनल पर आया करती थीं. ऐसा इसलिए था, क्योंकि इसी प्रोडक्शन कंपनी ने इन फिल्मों को प्रोड्यूस किया है, ऐसे में इस फिल्म को मैंने पहली बार उसी चैनल पर देखा था. पहले-पहले ये फिल्म बहुत अजीब सी लगी थी. लेकिन एक रोज पेपर में खबर आई कि हर संडे एक हैरी पॉटर फिल्म दिखाई जाएगी.

तब ये नहीं पता था कि ये कितनी फिल्मों की सीरीज है और फ्रेंचाइज फिल्में क्या होती है, सिनेमा के मामले में मेरी समझ भी इतनी परिपक्व नहीं थी… अममम, वो आज भी शायद उतनी नहीं है, लेकिन फिर भी. वो दौर अलग था. तो मैं और मेरे दोनों भाई, हर संडे 11 बजे WB चैनल लगाकर बैठ जाते थे, ताकी हैरी पॉटर देख सकें. हमने नियमित तौर पर हर संडे ये काम किया था और ऐसे 9 हफ्तों में ये पूरी फिल्म फ्रेंचाइज खत्म कर पाए थे. इस चीज ने हम तीनों भाई बहनों के अंदर एक चीज को बदल दिया, वो था इस फिल्म के लिए हमारा प्यार. हमें पता भी नहीं चला और हम तीनों पॉटरहैड्स बन गए.

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नहीं ये कोई फिल्मी कहानी नहीं है. आज लगभग 11 साल हो चुके हैं, हम आज भी हैरी की दुनिया से निकल नहीं पाए. आज भी हम उस दुनिया के किरदारों के चश्मों से अपनी दुनिया को देखने की कोशिश करते हैं. इन फिल्मों के डायलॉग्स हमारी जिंदगी की किताबों में कब शामिल हो गए, हमें पता ही नहीं चला. मेरे दोनों भाई, अब बड़े हो चुके हैं, और मैं भी, लेकिन हम तब भी पॉटरहैड्स थे, और आज भी हैं. आज भी मैं ये सोचती हूं कि आखिर क्यों अपनी हर खुशी, गम या फिर अकेलेपन में मैं हैरी पॉटर लगाकर बैठ जाती हूं? इन फिल्मों में ऐसा क्या है? चलिए जानने की कोशिश करते हैं.

यहां मैं आपको कोई लेक्चर नहीं दूंगी. फिल्में तो ये अच्छी हैं हीं, ये बात हर कोई जानता है. हैरी की कहानी में बहुत कुछ ऐसा है जो आपको बचपना लग सकता है. ये उनके लिए आज भी बच्चों की फिल्म है, जिन्हें लगता है कि हैरी पॉटर की कहानी एक ऐसे बच्चे की है, जो जादूगर है और जादू सीखना चाहता है. लेकिन यकीन करिए कि हैरी पॉटर एक बच्चों की कहानी नहीं है. ये फिल्म, इसकी कहानी और किरदारों में इतने मोड़ और गहराई है कि आप अच्छी-अच्छी किताबों को भूल जाएंगे. ये फिल्म बच्चों की बचकानी दुनिया से बहुत ऊपर है. जैसे-जैसे फिल्म में हैरी का किरदार बड़ा होता है, फिल्म की कहानी और उसमें दिखने वाली परतें और भी बड़ी और गहरी होती जाती हैं.

फिल्म की जान है दोस्ती

ये कहानी भले बिकती केवल हैरी के नाम पर है, लेकिन इस कहानी के केंद्र में तीन किरदार हैं. हैरी-रॉन और हरमाइनी. जिन लोगों ने फिल्में देखी हैं या फिर किताबें पढ़ीं हैं, वो ये बात जानते हैं कि कहानी में इन तीनों की दोस्ती को किस तरह से तराशा जाता है. दोस्ती इस फिल्म की जान है. हैरी एक अनाथ बच्चा है, लेकिन जैसे ही वो होग्वर्ट्स में जाता है, वहां उसे वो दो लोग मिलते हैं जो उसकी जिंदगी का सबसे अहम किरदार बन जाते हैं और वो दो लोग हैं रॉन और हरमाइनी. पहली फिल्म के शुरूआती सींस में आप इनकी दोस्ती को बढ़ते और गहरा होता देखते हैं. ये केवल 11 साल के बच्चे हैं, लेकिन फिल्म के क्लाइमैक्स में, जब रॉन और हरमाइनी हैरी के लिए अपनी जान दांव पर लगाते हैं वो कोई 11 साल के बच्चे की बस की बात नहीं है. रॉन का किरदार कहता है- ‘यहां से तुमको आगे जाना है हैरी, अकेले… ये मेरी और हरमाइनी की लड़ाई नहीं है, ये तुम्हारी लड़ाई है हैरी. पर हम साथ खड़े रहेंगे…’ और वो रहते हैं. अंत तक…

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न सिर्फ इन तीनों की दोस्ती, बल्कि हैग्रिड, लूना, जोर्ज और फ्रेड और यहां तक की डॉबी भी… ये वो लोग हैं जो हैरी को हैरी पॉटर बनाते हैं. ‘गॉब्लेट ऑफ फायर’ में सेड्रिक का हैरी के लिए मर जाना, या फिर हैरी का डॉबी को आजाद करना और डॉबी का हैरी और उसके दोस्तों के लिए कुर्बानी देना. यहां तक की सीरियस ब्लैक और हैरी के पिता जेम्स की दोस्ती, ये सबकुछ दिखाता है कि दोस्ती में वफादारी के क्या मायने हैं. फिल्म में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि आपके एक दोस्त की गद्दारी आपको कितनी भारी पड़ सकती है.

किरदारों की लेयर्स और कहानी की गहराई

हैरी पॉटर की दुनिया को जिस तरह से गढ़ा गया है वो पहले जादुई दुनिया की खुशियां और वहां होने वाली चीजों को दिखाती है, लेकिन जैसे-जैसे फिल्म की कहानी आगे बढ़ती जाती है वैसे-वैसे आपको समझ आता है कि यहां कितनी गहराई छिपी है और हर एक किरदार में कितनी लेयर्स हैं. हाफ ब्लड प्रिंस और उसके बाद वाली फिल्मों में ये दिखाया जाता है, कि हर जादूगर चाहें वो हैरी पॉटर और डम्बलडोर हो, या फिर वोल्डमोल्ट और ड्रैको, सभी अपनी-अपनी चीजों में कैद हैं. स्नेप का रोल तो किसी किरदार में लेयर्स की परिभाषा है. वो इंसान, जिससे शुरू से ही हर कोई नफरत करता है, वो अपने शातिर चेहरे के नीचे, प्यार और समर्पण की मूर्ती का वो चोंगा पहनता है, जिसे देखकर अंदाजा होता है कि मोहब्बत की अगर कोई शक्ल होती होगी, तो वो शायद सेवरेस स्नेप जैसी ही होती होगी. इस फिल्म में किरदार चाहें अच्छा हो या फिर बुरा, सबकी अपनी कहानी और आर्क है. हर किरदार के कई चेहरें हैं. सारे किरदार, दर्द, तकलीफ, जलन, खुशी, गम और हर तरह के इमोशन से गुजरते हैं.

जादुई दुनिया जो असली नहीं, फिर भी असली लगती है

हैरी की दुनिया को जिस तरह से लिखा और फिल्मों में दर्शाया गया है वो इतना असरदार इसलिए लगता है क्योंकि इसे इतनी डीटेल में लिखा और बनाया गया है कि आप उस दुनिया को असली मानने लगते हैं. फिल्मों में तो आर्ट डिपार्टमेंट ने कमाल का काम किया है, लेकिन आप किताबों में पढ़ेंगे तो आपको पता चलेगा कि जादुगरों की दुनिया के अखबारों, खेल, खाने और पहनने से लेकर जादुई दुनिया के स्कूल, वहां के सिलेबस, किताबें, ड्रेस, टीचर्स, हाउस और यहां तक की करेंसी तक, हर चीज को तफ्सील से लिखा गया था. जी हां, किताब पढेंगे तो आपको पता चलेगा कि जादुगरों की दुनिया में जो करेंसी चलती है उसके भी प्रकार थे.

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फिल्म में जानवरों का इस्तेमाल, भाषा, होग्वर्ट्स के अंदर की एक-एक चीज, पेंटिंग्स, खेल, खेल के नियम, पढाई की किताबें, क्लास, बच्चों की यूनिफॉर्म, डायगन ऐली और वहां तक पहुंचने का रास्ता भी, सबकुछ किसी के दिमाग की रचना है ये सोचना भी अपने आप में अजीब सा लगता है लेकिन ये सच है. एक सच ये भी है कि इन्हीं छोटी-छोटी चीजों की वजह से ही ये कहानी इतनी रहस्मई और सच्ची लगने लगती है.

हैरी और वोल्डमॉर्ट का कनेक्शन

आप सोचिए कि आप पहली किताब में ये पढ़ रहे हैं कि हैरी सांपों से बात कर सकता है. और आपको आखिरी किताब के लास्ट में ये पता चलता है कि असल में ये कोई आम जादू नहीं, बल्कि ये एक खास कनेक्शन है, जिसका रिश्ता हैरी के सबसे बड़े दुश्मन और उसके माता-पिता के कातिल वोल्डमॉर्ट से है. उसकी आत्मा का अंश जो हैरी में जा बसा, जिससे वो भी एक होरक्रक्स बन गया, जिसे वोल्डमॉर्ट ने बनाया नहीं, लेकिन फिर भी वो बन गया. सोचिए अगर लिली वो जादू नहीं करती, वो हैरी के लिए कुर्बानी नहीं देती, वोल्डमॉर्ट हैरी को मारने की कोशिश न करता और उसका जादू बैकफायर न होता, हैरी होरक्रक्स न बनता तो असल में कभी वोल्डमॉर्ट का अंत होता ही नहीं. हैरी के लिए उस जंग को जीतना लगभग नामुमकिन हो जाता.

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इसका एक पहलू जो मुझे बहुत मजेदार लगता है वो ये है कि क्योंकि हैरी वोल्डमॉर्ट की आत्मा से जुड़ा था इसलिए वो काफी मामलों में वोल्डमॉर्ट जैसा था. उसकी सोच उसके जैसी बनने लगती है. वो सांपों से बात कर सकता है. काली शक्तियों को अट्रैक्ट कर सकता था, उसके पास वो सबकुछ था जो उसे वोल्डमॉर्ट जैसा बनाता है और हैरी चाहता तो वो वैसा बन सकता था. लेकिन हैरी आखिरी में अपनी राह चुनता है. वो पावर को चुन सकता था, लेकिन वो नेकी को चुनता है और वोल्डमॉर्ट को हराता है. ये बात साबित करती है, कि आपको जिंदगी ने कोई भी रास्ता क्यों न दिया हो, आपको उसपर कैसे चलना है ये आपके हाथ है. शायद हैरी की यही बात उसे वोल्डमॉर्ट से अलग करती है और शायद ये नेकी ही है, जो इन फिल्मों को एक कभी न भूल पाने वाला एक्सपीरियंस बनाती है.

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