कर्मियों की चूक, टीबी संक्रमित जिला में टॉप पर पहुंचा कोरबा,…- भारत संपर्क

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कोरबा। कर्मियों की एक चूक से कोरबा टीबी संक्रमण के मामले में प्रदेश में टॉप पर पहुंच गया है।हालांकि चूक उजागर होने के बाद महकमा सुधार में जुट गया है। आप ऑनलाइन आंकड़ों को दुरुस्त कर सही जानकारी फीड की जा रही है। देश को साल 2030 तक टीबी रोग से मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य को हासिल करने विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। जिसमें निक्षय निरामय छत्तीसगढ़ सौ दिवसीय पहचान व उपचार अभियान भी शामिल है। जिले में भी अभियान 27 मार्च 2025 तक चली।

अभियान के तहत जिला क्षय उन्मूलन व स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी, मितानीन घर घर पहुंचे। उन्होनें संभावित मरीज और उनके संपर्क में आए लोगों की जांच पड़ताल की। कलेक्टर कुणाल दुदावत से दिशा निर्देश मिलने के बाद वर्तमान में भी टीबी पीड़ित मरीजों की तलाश जारी है। यदि आंकड़ों की बात करें तो अभियान के तहत 2205 टीबी संक्रमितों की पहचान की गई। उन्हें विभाग द्वारा उपचार मुहैया कराया गया। लगातार चले इलाज के बाद 50 फीसदी मरीज स्वस्थ हैं। वर्तमान में विभाग द्वारा स्वास्थ्य कर्मी तथा मितानिनों की मदद से 1152 मरीजों को दवा उपलब्ध कराया जा रहा है। इन तमाम प्रयासों के बावजूद कोरबा प्रदेश में टीबी संक्रमण के मामले में टॉप पर है। इसके पीछे तकनीकी खामी को कारण माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि निश्चय ऐप के माध्यम से मुख्यालय को संभावित मरीजों के आंकड़े भेजे जाने थे। इस आशय का निर्देश जिला क्षय उन्मूलन केन्द्र के नोडल अधिकारियों ने ब्लॉक स्तर के कर्मचारियों को भी दिए थे। जिले के सभी ब्लॉक में कम्प्युटर ऑपरेटरों को निश्चय ऐप में जानकारी भेजने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। पोंड़ी उपरोड़ा व कोरबा ब्लॉक से भी कम्प्युटर ऑपरेटरों ने जानकारी तो भेजी, लेकिन तकनीकी जानकारी के अभाव में त्रुटि हो गई। उन्होंने संभावित मरीजों के साथ ही संपर्क में आए करीब 12 हजार लोगों के आंकड़े भी ऐप लोड कर दिए, जिससे कोरबा टीबी संक्रमण के मामले में टॉप पर पहुंच गया। यह गलती उजागर होते ही महकमे में हड़कंप मच गया। मामले में आला अधिकारियों ने सुधार के निर्देश जारी कर दिए। उनके निर्देश पर निश्चय ऐप में सुधार कार्य शुरू कर दिया गया है। संभावना जताई जा रही है कि सुधार उपरांत कोरबा रेड के बजाय ग्रीन जोन में शामिल हो जाएगा।

कोरबा में टीबी के मरीजों के बढ़ने के कारण
0 औद्योगिक और पर्यावरणीय कारक: कोरबा एक प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र है, जहां खदानों और कारखानों से उड़ने वाली धूल और प्रदूषण फेफड़ों को कमजोर कर टीबी के बैक्टीरिया को बढ़ावा देते हैं।
0 घनी आबादी और रहन-सहन: बस्तियों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में एक-दूसरे के संपर्क में आने से हवा के माध्यम से टीबी का संक्रमण तेजी से फैलता है।
0 कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली : कुपोषण और कुपोषित लोगों में टीबी के कीटाणु जल्दी सक्रिय होते हैं।
0 नशे की आदत शराब और तंबाकू/धूम्रपान के अत्यधिक सेवन से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है।
0 स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी या जागरूकता का अभाव: समय पर जांच न कराने या उपचार बीच में छोड़ने के कारण भी टीबी के मरीज बढ़ रहे हैं।
0 जनजातीय क्षेत्र: कई मामलों में जनजातीय क्षेत्रों में टीबी का प्रसार अधिक पाया गया है।
वर्जन
क्षय रोगियों की पहचान एक्स रे सहित विभिन्न पद्धति से की जा रही है। निश्चय ऐप में जानकारी लोड करते समय चूक हुई थी, जिसमें सुधार किया जा रहा है।
डॉ. बीआर रात्रे, नोडल अधिकारी जिला क्षय उन्मूलन केंद्र

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