जितनी अक्षय कुमार ने HIT नहीं दीं, उससे ज्यादा तो मिथुन चक्रवर्ती की पिक्चर ऐलान… – भारत संपर्क


मिथुन चक्रवर्ती की फिल्में जो कभी रिलीज ही नहीं हुईं
फिल्में बनती हैं, सिनेमाघरों में रिलीज होती हैं और दर्शक उनपर अपनी राय पेश करते हैं. लेकिन कुछ फिल्में ऐसी भी होती हैं, जो लिखी तो जाती हैं उनके लिए स्टार कास्ट भी फाइनल की जाती है. इतना ही नहीं बड़े जोश के साथ उन फिल्मों का ऐलान भी किया जाता है. लेकिन बनने से पहले ही वो पिक्चर ठंडे बस्ते में चली जाती हैं. हालांकि मेकर्स के अलावा जिसपर इस बात का सबसे ज्यादा असर पड़ता है, वो फिल्म का हीरो होता है.
70 के दशक में एक नए एक्टर ने हिंदी सिनेमा में अपना सिक्का जमाया था. अपने बेहतरीन काम से उस एक्टर ने दर्शकों को अपना मुरीद बना लिया था. दमदार एक्टिंग के जरिए एक्टर ने लाखों लोगों के दिलों में अपनी खास जगह भी बना ली थी. ये दिग्गज एक्टर कोई और नहीं बल्कि मिथुन चक्रवर्ती थे. हरफनमौला और टैलेंटेड एक्टर मिथुन चक्रवर्ती की फिल्मों का जादू लोगों के सिर चढ़कर बोला करता था. हिंदी सिनेमा में कदम रखते ही मिथुन ने इतिहास रच दिया था. एक्टर को अपनी पहली ही फिल्म मृगया के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिल गया था.
एक के बाद एक फिल्मों का हुआ ऐलान
मिथुन चक्रवर्ती का सिनेमा में सिक्का चल रहा था. उनकी एक के बाद एक नई फिल्मों का ऐलान हो रहा था. ढेर सारी फिल्में साइन करने के बाद एक्टर को ऐसा झटका लगा कि वह समझ ही नहीं पाए कि आखिर उनके साथ हो क्या रहा है. फिल्में अनाउंस तो हुईं लेकिन लोग उन्हें कभी देख नहीं पाए. चलिए जानते हैं मिथुन की उन फिल्मों के बारे में तो थिएटर का चेहरा तक नहीं देख पाईं.
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मिथुन चक्रवर्ती की 29 फिल्में नहीं हुईं कभी रिलीज
1977 से लेकर 1997 तक के बीच में मिथुन चक्रवर्ती की कई फिल्में बनने से पहले ही ठंडे बस्ते में चली गईं. साल 1977 में मिथुन की दो फिल्म आने वाली थीं. पहली पुर्नमिलन और दूसरी आनन्द मय. ये दोनों ही फिल्में मिथुन एक्ट्रेस सारिका के साथ करने वाले थे. लेकिन ये कभी रिलीज ही नहीं हो पाईं. 1978 में काजल किरण के साथ एक्टर की फिल्म मर्डर इन ट्रेन आनी थी, वहीं 1979 में तीन फिल्म रिलीज होनी थीं. जिनके नाम जन्म औऱ कर्म, मुन्ना मुन्नी और मां और भगिनी थे. ये तीन फिल्में भी बंद हो गई थीं.
1980 में सौ दिन सास के, 1980 में रुत आए रुत जाए, 1981 में जॉन जानी जर्नादन, 1981 में कसम से, 1981 में इश्क मोहब्बत प्यार, 1983 में लुच्चा लफंगा, 1983 में तालीम. 1985 में मिथुन की फिल्म मोहब्बत और मुकद्दर बनी तो सही. इस फिल्म में कई सारे सितारे भी थे. लेकिन कई कारणों के चलते इस पिक्चर को रिलीज नहीं किया गया. इस साल उनकी फिल्म रैंबो भी बंद हुई थी. साल 1987 में एक्टर की फिल्म गोविंदा के साथ अनाम आनी थी. 1988 में अमीरो का दुश्मन और रिश्ता डिब्बा बंद हो गई. 1989 में गंगा पहलवान और दुश्मन सुहाग. 1991 में फिल्म शोबिज, 1992 में जेबा बख्तियार, काला साम्राज्य, क्रांतिकारी, दानवीर. 1995 में स़ड़कछाप और जालिम जमाना. 1997 में वक्त का फैसला और 1998 में परमेश्वर. एक रिपोर्ट की मानें तो ये मिथुन की उन फिल्मों के नाम है जो कोई बन पाई तो कुछ कभी रिलीज ही नहीं हुईं.