सऊदी अरब के पास परमाणु हथियार हैं? ईरान के पूर्व कमांडर का सनसनीखेज दावा – भारत संपर्क

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सऊदी अरब के पास परमाणु हथियार हैं? ईरान के पूर्व कमांडर का सनसनीखेज दावा – भारत संपर्क
सऊदी अरब के पास परमाणु हथियार हैं? ईरान के पूर्व कमांडर का सनसनीखेज दावा

खामेनई और सऊदी प्रिंस

ईरान के इस्लामी क्रांतिकारी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के पूर्व कमांडर हुसैन कनानी मोघदम ने एक सनसनीखेज दावा किया है. उनके दावे के मुताबिक सऊदी अरब के पास परमाणु बम मौजूद है और अमेरिका तथा इजरायल इसकी पूरी जानकारी रखते हैं. यह दावा उन्होंने रूस के सरकारी प्रसारक RT को दिए इंटरव्यू में किया है, जो मध्य पूर्व में अमेरिका और तेहरान के बीच बढ़ती तनातनी के बीच सामने आया है.

कनानी ने RT के कार्यक्रम में कहा कि सऊदी अरब दुनिया को यह दिखाता है कि उसके पास परमाणु हथियार नहीं हैं, लेकिन असलियत इसके बिल्कुल उलट है. उन्होंने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल दोनों सऊदी की परमाणु क्षमता को अच्छी तरह जानते हैं और इसे छुपाया जा रहा है.

ईरान को कमजोर करने की साजिश

पूर्व कमांडर ने यह भी दावा किया कि पश्चिमी खुफिया एजेंसियां, जिनमें मोसाद और सीआईए शामिल हैं, ईरान में विरोध प्रदर्शनों का समर्थन कर रही हैं ताकि ईरानी राज्य को कमजोर किया जा सके. उनका कहना था कि इन प्रदर्शनों का लक्ष्य केवल सरकार को हटाना नहीं, बल्कि पूरे देश को तोड़ देना है.

तनाव की पृष्ठभूमि

मध्य पूर्व में हाल के महीनों में तनाव काफी बढ़ गया है. पिछले जून में अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर की जाने वाली गतिविधियों को रोकने के लिए कारवाही की थी, जिससे दोनों देशों के बीच अस्थिरता और बढ़ी. इसके बाद दिसंबर और जनवरी में ईरान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन भी हुए, जिनके लिए तेहरान ने अमेरिका और इजरायल को दोषी ठहराया.

हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने USS अब्राहम लिंकन जैसे बड़े युद्धपोत को मध्य पूर्व भेजा है और ईरान से कहा है कि वह अपने यूरेनियम संवर्द्धन और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों को सीमित करे. वहीं, ईरान ने अपने मिसाइल हथियारों को अपग्रेड करने तथा एक अधिक आक्रामक सैन्य रणनीति अपनाने की घोषणा की है.

ईरान का आधिकारिक रुख

तेहरान बार-बार यह कह रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है. 2015 के परमाणु समझौते से अमेरिका के अलग होने के बाद ईरान ने प्रतिबद्धताओं को धीरे-धीरे कम किया और यूरेनियम संवर्द्धन 60% तक बढ़ा दी है. हाल ही में ओमान में अमेरिकी प्रतिनिधियों के साथ अप्रत्यक्ष बातचीत हुई, जहां ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि परमाणु समझौता केवल शांत वार्ता से ही संभव है, न कि धमकियों से. इसके कुछ समय बाद अमेरिका ने नई प्रतिबंधों की घोषणा की. इन सभी बयानबाज़ियों और आरोपों के बीच, सऊदी अरब ने अभी तक इस तरह के स्वागत के दावों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है.

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