अजब-गजब: 2017 में भेजा था इंटरव्यू के लिए काॅल लेटर… डाक विभाग से कैंडिडेट को…

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अजब-गजब: 2017 में भेजा था इंटरव्यू के लिए काॅल लेटर… डाक विभाग से कैंडिडेट को…
अजब-गजब: 2017 में भेजा था इंटरव्यू के लिए काॅल लेटर… डाक विभाग से कैंडिडेट को 2026 में मिला

भारत मेंसरकारी नौकरी पाने का मतलब जीवन में सफल होना होता है. सरकारी नौकरी पाने के लिए युवा कई सालों तक मेहनत करते हैं. कई युवाओं की ये मेहनत सफल होती है तो कई युवाओं के हिस्से निराशा हाथ लगती है, लेकिन इन दोनों परिस्थितियों से भी हटकर कुछ अजब-गजब होने का मामला सामने आया है. जहां इंटरव्यू के लिए कॉल लेटर कैंडिडेट को 9 साल बाद मिला, जो 2017 में भेजा गया था, लेकिन वह डाक विभाग से कैंडिडेट को 2026 में मिला. 9 साल बाद इंटरव्यू की जानकारी मिलने से कैंडिडेट को सरकारी नौकरी प्राप्त करने से हाथ धाेना पड़ा है.

आइए जानते हैं कि पूरा मामला क्या है? किस विभाग की नौकरी का इंटरव्यू होना था? जानेंगे कि कैंडिडेट को इंटरव्यू के लिए कब रिपोर्ट करना था? मौजूदा समय में कैंडिडेट क्या कर रहा है.

2016 में लोकसभा सचिवालय में श्रमिक पद के लिए किया था आवेदन

असल में ये मामला लोकसभा सचिवलाय में श्रमिक पद पर भर्ती से जुड़ा हुआ है. उत्तराखंड के पिथौरागढ़ निवासी सुरेश चंद ने 2026 में लोकसभा सचिवालय श्रमिक पद पर भर्ती के लिए आवेदन किया था. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सुरेश चंद का कहना है कि उन्होंने डाक विभाग के माध्यम से भर्ती के लिए आवेदन किया था, लेकिन लंबे समय तक भर्ती को लेकर कोई भी सूचना उन्हें दी गई. ऐसे में वह भर्ती और आवेदन को लेकर भूल गए.

2026 में प्राप्त हुआ इंटरव्यू का कॉल लेटर

लोकसभा सचिवालय श्रमिक भर्ती 2016 के लिए इंटरव्यू का कॉल लेटर सुरेश चंद को 2025 में मिला. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सुरेश चंद का कहना है कि उनके घर पर डाक विभाग की तरफ से 2026 में सामान्य पोस्ट आई, जिसमें उन्हें लोकसभा सचिवालय श्रमिक भर्ती 2016 के इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था.

19 फरवरी 2017 को इंटरव्यू

सुरेश चंद को सामान्य डाक से इंटरव्यू के लिए जो कॉल लेटर 2026 में प्राप्त हुआ है, उसमें उन्हें इंटरव्यू के लिए 19 फरवरी 2017 को पहुंचने को कहा गया है. वहीं लेटर में 27 जनवरी 2017 की तारीख अंकित है. कुल जमा कैंडिडेट को 9 साल बाद इंटरव्यू के लिए कॉले लेटर मिला है. ये मामला सामने आने के बाद सुरेश चंद चर्चा में है. वहीं इस अजब-गजब गलती का कारण क्या है? ये अभी तक सामने नहीं आ पाया है.

संविदा पर काम कर रहा कैंडिडेट

9 साल बाद इंटरव्यू का काॅल लेटर मिलने से सुरेश चंद को नुकसान का सामना करना पड़ा है. कुल जमा इससे वह सरकारी नौकरी पाने से चूक गए हैं. हालांकि मौजूदा समय में वह सरकारी विभाग में ही संविदा पर काम कर रहे हैं, जबकि उनका बेटा 10वीं का स्टूडेंट है.

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