ईरान पर US का मैक्सिमम प्रेशर प्लान, अब चीन को जाने वाले तेल पर निशाना – भारत संपर्क
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बुधवार को व्हाइट हाउस में मुलाकात की थी. इस बैठक में दोनों नेताओं ने ईरान पर ज्यादा कड़ा आर्थिक दबाव डालने पर सहमति जताई. एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के उस तेल निर्यात को खास तौर पर निशाना बनाया जाएगा, जो चीन को भेजा जाता है. एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि ईरान के खिलाफ मैक्सिमम प्रेशर यानी पूरी ताकत से दबाव बनाया जाएगा.
2025 के आंकड़ों के मुताबिक, चीन ईरान के समुद्री रास्ते से भेजे जाने वाले तेल का 80% से ज्यादा खरीदता है. पिछले साल चीन ने रोजाना औसतन 13.8 लाख बैरल ईरानी तेल खरीदा. यह उसके कुल समुद्री कच्चे तेल आयात (करीब 1.027 करोड़ बैरल प्रतिदिन) का लगभग 13.4% था. अमेरिका ने पहले ही ईरान पर उसके परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए प्रतिबंध लगाए हुए हैं, जिससे ईरान के तेल के खरीदार कम हो गए हैं.
चीन का रवैया और अमेरिकी एक्शन
रिपोर्ट में कहा गया है कि कई बार ईरान से चीन जाने वाले तेल को मलेशिया या इंडोनेशिया जैसे देशों के नाम से दिखाया जाता है. चीन ने जुलाई 2022 के बाद से आधिकारिक आंकड़ों में ईरान से तेल आयात नहीं दिखाया है. चीन का कहना है कि वह एकतरफा अमेरिकी प्रतिबंधों को नहीं मानता और उसका व्यापार कानून के अनुसार है.
राष्ट्रपति ट्रंप ने 10 दिन पहले एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे. इसके तहत अमेरिका, ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25% तक टैरिफ लगा सकता है. अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि यह आर्थिक दबाव परमाणु वार्ता और मध्य पूर्व में सैन्य तैयारी के साथ-साथ चलेगा.
ईरान और अमेरिका की मीटिंग
ईरान और अमेरिका अगले हफ्ते परमाणु मुद्दे पर दूसरी बैठक करने वाले हैं. ट्रंप ने चेतावनी दी है कि समझौता नहीं हुआ तो अंजाम गंभीर होंगे और जरूरत पड़ी तो ताकत का भी किया जा सकता है. उन्होंने दुनिया के सबसे बड़े विमानवाहक पोत USS Gerald R. Ford को मिडिल ईस्ट भेजने का ऐलान किया है. वहीं ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण है, लेकिन उसने 60% तक यूरेनियम संवर्धन किया है. इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी कई महीनों से ईरान के परमाणु भंडार की पूरी जांच नहीं कर पाया है.
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