कुवैत में बसते हैं 10 लाख भारतीय, वहां की इकोनॉमी में ऐसे…- भारत संपर्क

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कुवैत में बसते हैं 10 लाख भारतीय, वहां की इकोनॉमी में ऐसे…- भारत संपर्क
कुवैत में बसते हैं 10 लाख भारतीय, वहां की इकोनॉमी में ऐसे करते हैं योगदान

कुवैत की इकोनॉमी में भारतीयों का योगदान

कुवैत की एक इमारत में लगी आग की दुर्घटना ने दुनिया को हिलाकर रख दिया है. इस घटना में मरने वाले 49 लोगों में से 40 भारतीय हैं. अभी ये संख्या और बढ़ भी सकती है. भारत सरकार भी इस घटना पर लगातार नजर बनाए हुए है. ऐसे ये जानना बेहद जरूरी है कि क्यों इतने भारतीय कुवैत जाते हैं और कैसे वहां की इकोनॉमी में योगदान देते हैं.

कुवैत में करीब 10 लाख भारतीय बसते हैं. यहां के हॉस्पिटल्स से लेकर तेल के कुंओं और फैक्टरी में काम करने वाले अधिकतर लोग भारतीय है. अगर आप कुवैत की वर्कफोर्स के टोटल को देखेंगे, तो उसमें सबसे बड़ा विदेशियों का नंबर भारतीयों का है.

भारतीय डॉक्टर और नर्स के भरोसे कुवैत

कुवैत में अगर सबसे ज्यादा संख्या में भारतीय कामगार हैं, तो वह हेल्थ सेक्टर में हैं. भारत के दूतावास के दस्तावेजों के मुताबिक कुवैत में बड़ी तादाद में भारतीय डॉक्टर और नर्स काम करते हैं. ये इतना बड़ा नंबर है कि अगर भारतीय डॉक्टर या नर्स कुवैत से बाहर चले जाएं, तो वहां की पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था भी चरमरा जाए.

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भारत और कुवैत ने अप्रैल 2012 में मेडिकल को-ऑपरेशन के लिए एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे. इसके लिए एक जॉइंट वर्किंग ग्रुप ऑन मेडिकल को-ऑपरेशन (JWG) बना, जिसकी अब तक कई बैठक हो चुकी हैं.

इंडस्ट्री से सिविल एविएशन तक

कुवैत के तेल के कुंओं में बड़ी संख्या में जहां भारतीय काम करते हैं. वहीं यहां की इंफ्रास्ट्रक्चर इंडस्ट्री में भी भारतीय लेबर काम करती है. इसके अलावा भारत और कुवैत ने दोनों देशों के यात्रियों, खासकर भारतीयों को वहां जाने में आसानी हो, इसके लिए सिविल एविएशन अरेंजमेंट किया है. इसमें दोनों देशों की ओर से उड़ान भरने वाले विमान 12,000 सीटों को प्राथमिकता के आधार पर भारतीयों और कुवैतियों के लिए बुक करते हैं.

भारत के नौ शहरों से कुवैत की दो एयरलाइंस कुवैत एयरलाइंस और जजीरा उड़ान भरती हैं. जबकि भारत की एअर इंडिया, एअर इंडिया एक्सप्रेस और इंडिगो कुवैत सिटी के लिए सीधी उड़ान सेवा चलाती हैं. भारत के दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, चेन्नई, गोवा, कोच्चि, हैदराबाद और बेंगलुरू जैसे शहरों से सीधी उड़ान भरते हैं.

भारत की इकोनॉमी का बड़ा हेल्पर

जहां कुवैत की इकोनॉमी को आगे बढ़ाने में भारतीय अपना योगदान देते हैं. वहीं भारत की इकोनॉमी की ग्रोथ में भी कुवैत बहुत काम आता है. कुवैत में काम करने वाले भारतीय रेमिटेंस के रूप में भरपूर पैसा वहां से भारत भेजते हैं. कुवैत से भारत भेजा जाने वाला पैसा 2.1 अरब कुवैती दिनार (करीब 6.3 अरब डॉलर) के लेवल को पार कर चुका है.

वहीं भारत के विदेश व्यापार का एक बड़ा हिस्सा कुवैत से होने वाले व्यापार से आता है. वित्त वर्ष 2023-24 में भारत का कुवैत को एक्सपोर्ट 210.32 अरब डॉलर का रहा है. जबकि कच्चे तेल के आयात के चलते भारत का कुवैत से इंपोर्ट 837.59 अरब डॉलर रहा है, क्योंकि इसमें से करीब 620 अरब डॉलर का भारत ने सिर्फ कच्चा तेल या अन्य उत्पाद ही आयात किए हैं.

भारत मुख्य तौर पर कुवैत को हवाई जहाज और उससे जुड़े पार्ट्स, स्पेसक्राफ्ट, अनाज, वाहन, रेलवे, सोना-चांदी और गहने एवं चाय-कॉफी मसालों का निर्यात करता है.

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