छत्तीसगढ़ व्यावसायिक शिक्षा में भर्ती घोटाला: 499 सरकारी स्कूलों में वोकेशनल ट्रेनर नहीं.. 40 करोड़ रुपये के उपकरण हो रहे बेकार
छत्तीसगढ़ के 499 सरकारी स्कूलों में अब तक प्रशिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई HighLights
- भर्ती में भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद प्रक्रिया रोकी गई
- प्रशिक्षकों को दो महीने का वेतन अब तक नहीं मिला
- री-टेंडरिंग से पुराने प्रशिक्षकों की नौकरी पर संकट है
संदीप तिवारी, , रायपुर। समग्र शिक्षा के तहत छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा लागू करने की योजना भर्ती विवाद, विभागीय लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच अटक गई है। करीब ढाई साल पहले प्रदेश के 652 सरकारी स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा के नए ट्रेड शुरू किए गए थे। योजना के तहत हर स्कूल में दो-दो व्यावसायिक प्रशिक्षकों (वीटी) की नियुक्ति होनी थी। पिछले साल भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार और लेन-देन के गंभीर आरोप लगने के बाद इसे बीच में रोक दिया गया।
अब स्थिति यह है कि 499 हाई-हायर सेकेंडरी स्कूलों में अभी तक प्रशिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो सकी है। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का कहना है कि जल्द ही भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाएगी। प्रदेश में फिलहाल एक हजार से अधिक स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा का पाठ्यक्रम लागू है।
शिकायत के बाद एफआईआर, फिर पुलिस ने दी क्लीन चिट
भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार की शिकायत के बाद 13 सितंबर 2025 को स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के निर्देश पर एफआईआर की प्रक्रिया शुरू की गई थी। पुलिस जांच के दौरान शिकायतकर्ताओं ने अपनी शिकायतें वापस ले लीं। इसके आधार पर पुलिस ने मामले में क्लीन चिट दे दी।
इसके बाद उम्मीद थी कि पुरानी भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा, लेकिन विभाग ने इसे आगे बढ़ाने के बजाय नए सिरे से निविदा यानी री-टेंडरिंग की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया है। इससे भर्ती में पहले से जुड़े विवाद को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
40 करोड़ के उपकरण बिना प्रशिक्षकों के बेकार
योजना शुरू होने के समय 652 स्कूलों में लैब, लाइब्रेरी और शिक्षण सामग्री के लिए करीब 40 करोड़ रुपये के उपकरण भेजे गए थे। लेकिन प्रशिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने के कारण इन उपकरणों का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। स्कूलों में रखे ये महंगे उपकरण अब शोपीस बनकर रह गए हैं।
व्यावसायिक पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों ने रुचि के साथ दाखिला लिया, लेकिन उन्हें प्रशिक्षण और मार्गदर्शन देने के लिए प्रशिक्षक ही उपलब्ध नहीं हैं। इससे रोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू की गई योजना का फायदा विद्यार्थियों को नहीं मिल पा रहा है। पिछले साल सैकड़ों विद्यार्थियों ने बीच सत्र में व्यावसायिक शिक्षा छोड़कर संस्कृत में प्रवेश ले लिया था।
पुराने प्रशिक्षकों को नौकरी जाने का डर
वर्ष 2014-15 से काम कर रहे व्यावसायिक प्रशिक्षकों में नए सत्र की री-टेंडरिंग प्रक्रिया को लेकर असंतोष है। प्रशिक्षकों का कहना है कि यदि वोकेशनल ट्रेनिंग पार्टनर (VTP) बदलता है तो लंबे समय से सेवाएं दे रहे प्रशिक्षकों की नौकरी पर संकट आ सकता है।
इसके अलावा प्रशिक्षकों को दो महीने का वेतन भी अब तक नहीं मिला है। फिलहाल निजी सीए के माध्यम से प्रशिक्षकों के बिलों का सत्यापन कराया जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लक्ष्य पर भी असर केंद्र सरकार ने वर्ष 2025 तक 50 प्रतिशत स्कूलों में व्यावसायिक पाठ्यक्रम लागू करने का लक्ष्य रखा था। वहीं राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत कक्षा 6वीं से ही व्यावसायिक शिक्षा को जोड़ने का प्रविधान है।
इसके लिए एनसीईआरटी, एआइसीटीई, यूजीसी और एनसीवीटी को फ्रेमवर्क तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी। उम्मीद थी कि शैक्षणिक सत्र 2024-25 से यह व्यवस्था जमीन पर प्रभावी होगी। लेकिन छत्तीसगढ़ में विभागीय देरी और भर्ती विवाद के कारण योजना की रफ्तार प्रभावित हो रही है। प्रशिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने से एक ओर करोड़ों रुपये के उपकरण उपयोग में नहीं आ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विद्यार्थियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
स्कूलों में व्यावसायिक पाठ्यक्रम के लिए प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही प्रशिक्षक नियुक्त कर दिए जाएंगे।
– गजेंद्र यादव, मंत्री, स्कूल शिक्षा
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