60 साल पुराने हॉस्टलों से गिर रहा प्लास्टर… फंड के बाद भी मरम्मत नहीं, IGKV रायपुर में 2000 सीटों पर सिर्फ 1400 बेड
IGKV के जर्जर हॉस्टलों से गिर रहा प्लास्टरHighLights
- 1960 में बना सत्यम हॉस्टल खतरनाक हालत में
- 2000 सीटों पर सिर्फ 1400 हॉस्टल बेड
- 50 लाख का फंड फिर भी मरम्मत अधूरी
, रायपुर। राजधानी के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) में विद्यार्थियों की सुरक्षा और आवासीय सुविधाओं को लेकर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। एक तरफ 30 से 60 साल पुराने जर्जर हॉस्टलों से प्लास्टर और छज्जे गिर रहे हैं, तो दूसरी तरफ सीटों और हॉस्टल क्षमता में भारी अंतर के कारण करीब 30 प्रतिशत छात्रों को बाहर रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
जर्जर हॉस्टल, गिर रहा प्लास्टर, छात्र घायल
विश्वविद्यालय परिसर में बने पुराने हॉस्टलों की हालत बेहद खराब हो चुकी है। दो महीने पहले शिवम, सत्यम और मंदाकिनी हॉस्टलों में प्लास्टर और छज्जे गिरने की गंभीर घटनाएं सामने आई थीं। इस हादसे में एक छात्र घायल भी हो गया था। साल 1960 में बना सत्यम हॉस्टल सहित कई अन्य भवन 30 से 60 साल पुराने हो चुके हैं और बेहद खतरनाक स्थिति में पहुंच गए हैं।
घटनाओं के बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन ने हॉस्टलों की जांच कराई और मरम्मत के दावे किए, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। पिछले महीने परीक्षाओं के बाद छात्रों की छुट्टियां थीं, उस दौरान भी मरम्मत का काम पूरा नहीं किया गया, जिससे विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
लाखों का फंड, फिर भी खानापूर्ति
भवनों के रखरखाव और छोटे-मोटे मरम्मत कार्यों के लिए विश्वविद्यालय में पहले से ही अलग सेटअप मौजूद है। नियमित अमले के तौर पर दो इंजीनियर, दो बाबू (लिपिक) और एक केयरटेकर तैनात हैं, जो रखरखाव का काम देखते हैं। जरूरत के हिसाब से मरम्मत कार्यों पर 50 लाख रुपये तक खर्च किया जा सकता है, जिसकी वित्तीय मंजूरी स्टूडेंट वेलफेयर सोसाइटी देती है। पर्याप्त फंड और स्टाफ होने के बावजूद समय पर सुधार नहीं किया गया, जिससे छात्रों को जान जोखिम में डालकर जर्जर भवनों में रहना पड़ रहा है।
सीटों और हॉस्टल क्षमता में बड़ा अंतर
महाविद्यालय में पढ़ाई की सीटों और हॉस्टल की क्षमता के बीच गहरा असंतुलन है। कृषि महाविद्यालय में अंडर ग्रेजुएशन (यूजी) की करीब 600, पोस्ट ग्रेजुएशन (पीजी) की 800 और पीएचडी की करीब 600 सीटें हैं, यानी कुल लगभग 2,000 विद्यार्थियों को पढ़ाने का सेटअप है।
जबकि परिसर में रहने के लिए कुल 14 हॉस्टल हैं। इनमें छह बालिका हॉस्टल में 650 सीटें और आठ बालक हॉस्टल में 750 सीटें हैं। दोनों को मिलाकर कुल 1,400 विद्यार्थियों के रहने की ही व्यवस्था है। सीधे तौर पर 600 विद्यार्थियों यानी करीब 30 प्रतिशत छात्रों के लिए परिसर में रहने की व्यवस्था नहीं है। जिन्हें हॉस्टल नहीं मिल पाता, उन्हें मजबूरन शहर में महंगे पीजी या किराए के कमरे लेकर रहना पड़ता है, जिससे उनकी पढ़ाई और आर्थिक स्थिति दोनों पर असर पड़ रहा है। छात्रों ने प्रशासन से जल्द मरम्मत और हॉस्टल क्षमता बढ़ाने की मांग की है।
हॉस्टलों में प्लास्टर गिरने की घटनाओं को गंभीरता से लिया गया है। सुरक्षा के मद्देनजर सभी हास्टलों की जांच कराई जा चुकी है। जिन-जिन हॉस्टलों से प्लास्टर गिरने या अन्य शिकायतें मिली हैं, वहां प्राथमिकता के आधार पर तत्काल मरम्मत कार्य कराया जा रहा है।
– डॉ. गिरीश चंदेल, कुलपति, IGKV
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