एक ही पुलिस टीम 40 KM दूर दो जगह एक साथ कैसे? हाईकोर्ट ने पकड़ी बड़ी गड़बड़ी, NDPS के 5 दोषियों को दी जमानत

HighLights
- एनडीपीएस एक्ट के पांच दोषियों की 10-10 साल की सजा पर कोर्ट ने लगाई रोक।
- मेडिकल स्टोर की सीसीटीवी फुटेज को अदालत ने माना प्रथमदृष्टया महत्वपूर्ण।
- तीन साल से अधिक की कैद काट चुके अपीलकर्ताओं को मिली बड़ी राहत।
, बिलासपुर। बेमेतरा जिले के दो अलग-अलग एनडीपीएस मामलों में कार्रवाई करने वाली एक ही छापामार टीम के सदस्यों की एक ही समय में 40 किलोमीटर से अधिक दूरी वाले दो स्थानों पर मौजूदगी को लेकर हाई कोर्ट ने प्रथमदृष्टया गंभीर विसंगति पाई है। इसके साथ ही कोर्ट के सामने पेश सीसीटीवी और इलेक्ट्रानिक साक्ष्य को देखते हुए 10-10 साल की सजा और जुर्माने के आदेश को निलंबित करते हुए पांच आरोपितों को जमानत दे दी गई।
नवीन गांधर्व, नवागढ़, बेमेतरा, धनिराम गेंदले, नांदघाट बेमेतरा, महेंद्र सोनकर, नवागढ़, बेमेतरा , यशवंत सिंह राजपूत रतनपुर और तिफरा बिलासपुर निवासी मनोज यादव की कुल चार अपील याचिकाओं पर जस्टिस नरेश कुमार चंद्रवंशी ने सुनवाई की। सभी अपीलकर्ता अलग-अलग मामलों में एनडीपीएस एक्ट की धारा 21(सी) के तहत दोषी ठहराए गए थे। अपीलकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि दोनों मामलों में अभियोजन की कहानी में समय, तलाशी और जब्ती की कार्रवाई को लेकर गंभीर विरोधाभास हैं।
खास तौर पर 27 अगस्त 2023 को थाना नवागढ़ में दर्ज अपराध और थाना नांदघाट में दर्ज मामले में कार्रवाई का समय महत्वपूर्ण बताया गया। बचाव पक्ष के अनुसार, नवागढ़ मामले में छापामार टीम के सदस्य मिश्रा पारा, नवागढ़ में दोपहर एक बजे से रात आठ बजे तक मौजूद बताए गए और इसके बाद थाने लौटने की बात कही गई। वहीं नांदघाट के मामले में उन्हीं सदस्यों ने दोपहर दो से तीन बजे के बीच झुलना कापापारा में कार्रवाई करने और शाम करीब साढ़े छह बजे मारो पुलिस चौकी लौटने की बात कही।
बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि दोनों स्थानों के बीच 40 किलोमीटर से अधिक दूरी होने के बावजूद उन्हीं पुलिसकर्मियों की एक ही समय में दोनों स्थानों पर मौजूदगी बताई गई है। रोज़नामचा सान्हा की प्रविष्टियों को लेकर भी विरोधाभास का दावा किया गया।
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सीसीटीवी में मेडिकल स्टोर पर पहुंचने का दावा
अपीलकर्ताओं के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि ट्रायल के दौरान 25 अगस्त 2023 की सीसीटीवी फुटेज को आर्टिकल डी-1 के रूप में प्रदर्शित किया गया था। उनका दावा था कि फुटेज में साइबर सेल बेमेतरा के प्रभारी अरविंद शर्मा, रमेश्वर मंडले और राजेश ध्रुव मेडिकल स्टोर में आते और कथित मादक पदार्थ वहां से निकालते दिखाई देते हैं।
बचाव पक्ष ने इसे 27 अगस्त को अपीलकर्ताओं से मादक पदार्थ जब्त किए जाने की अभियोजन कहानी के विपरीत बताया। दोबारा पूछताछ के दौरान गवाह अरविंद शर्मा द्वारा फुटेज के एआई से तैयार होने की संभावना बताए जाने पर भी बचाव पक्ष ने आपत्ति जताई।
हाई कोर्ट ने पहले भी दोबारा जिरह का दिया था मौका
हाई कोर्ट ने 5 मई 2025 के आवेदन स्वीकार कर रिकार्ड ट्रायल कोर्ट को वापस भेजा था। इसका उद्देश्य छापामार टीम के सामान्य गवाहों से उनकी कथित दो स्थानों पर मौजूदगी, तलाशी-जब्ती की समय-सीमा और संबंधित दस्तावेजों को लेकर दोबारा जिरह और स्पष्टीकरण कराना था। राज्य की ओर से इन दलीलों का विरोध किया गया।
सरकारी पक्ष ने कहा कि रिमांड के बाद अधिकारियों से ट्रायल कोर्ट में दोबारा पूछताछ हुई और उन्होंने अवैध तरीके से मादक पदार्थ रखने या सीसीटीवी में बताए गए तरीके से कार्रवाई करने के आरोपों से इनकार किया। राज्य ने यह भी कहा कि जब्त मादक पदार्थ वाणिज्यिक मात्रा के थे और अभियोजन ने अपना मामला संदेह से परे साबित किया है।
तीन साल से अधिक जेल में रह चुके हैं
हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों और रिकार्ड पर विचार करते हुए पाया कि सभी अपीलकर्ता अब तक तीन साल से अधिक वास्तविक कारावास भुगत चुके हैं, जबकि उन्हें अधिकतम 10 साल की सजा सुनाई गई है। अपीलों के अंतिम निपटारे में भी समय लगने की संभावना को देखते हुए कोर्ट ने सजा निलंबित करने और जमानत देने का निर्णय लिया।
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