छत्तीसगढ़ के बड़े शहरों से सटे गांवों की बदलेगी तस्वीर, सबको मिलेंगे 2 हजार रुपये, 16वें वित्त आयोग के तहत प्लान तैयार
छत्तीसगढ़ के बड़े शहरों से सटे गांवों की बदलेगी तस्वीर (AI तस्वीर)HighLights
- 16वें वित्त आयोग के तहत तैयारी शुरू
- एक लाख से अधिक आबादी वाले शहरों पर फोकस
- इसके लिए राज्य स्तरीय समिति गठित
, नवा रायपुर। छत्तीसगढ़ में बड़े शहरों से सटे गांवों को नगरीय निकायों में शामिल करने की तैयारी शुरू हो गई है। 16वें वित्त आयोग के तहत लागू शहरीकरण प्रीमियम घटक के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने छह सदस्यीय राज्य स्तरीय समिति गठित की है। योजना के तहत एक लाख या उससे अधिक आबादी वाले नगरीय निकायों में आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को सुनियोजित तरीके से शामिल करने पर वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर प्रति व्यक्ति दो हजार रुपये का एकमुश्त क्षमता निर्माण अनुदान मिलेगा।
गांवों के चयन से लेकर तीन साल की योजना बनाने तक जिम्मेदारी
समिति पात्र नगरीय निकायों और उनके आसपास के गांवों की पहचान करेगी। साथ ही, योजना लागू करने के लिए कार्ययोजना तैयार करेगी। ग्राम पंचायतों से नगरीय निकायों को संपत्तियों, सरकारी अभिलेखों और दायित्वों के हस्तांतरण की प्रक्रिया भी तय की जाएगी। नए शामिल क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विकास और चरणबद्ध तरीके से कर व्यवस्था लागू करने के लिए तीन वर्षीय परिवर्तन योजना बनाई जाएगी। केंद्र सरकार की शर्तों का पालन सुनिश्चित करना भी समिति की जिम्मेदारी होगी।
छह सदस्यीय समिति गठित
समिति के अध्यक्ष अपर संचालक, नगरीय प्रशासन एवं विकास होंगे। मुख्य अभियंता, संयुक्त संचालक और उप संचालक (विविध शाखा) विभाग से सदस्य होंगे। राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) के अधीक्षण अभियंता को भी सदस्य बनाया गया है। कार्यपालन अभियंता सदस्य सचिव होंगे। वित्त आयोग की अवधि 2026-27 से 2030-31 तक है। योजना का उद्देश्य शहरों के आसपास तेजी से विकसित हो रहे ग्रामीण क्षेत्रों को नियोजित शहरी विकास से जोड़ना है।
शहरीकरण प्रीमियम घटक में शामिल होने पर ये होंगे लाभ
- योजनाबद्ध शहरी विकास, अव्यवस्थित फैलाव पर रोक।
- शहरी स्तर की सुविधाएं नल से साफ पानी, आधुनिक अपशिष्ट प्रबंधन, बेहतर ड्रेनेज सिस्टम और स्ट्रीट लाइटें विकसित होंगी।
- शहरी निकायों में शामिल होने से इन क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन का तेजी से विस्तार होगा।
- उद्योगों, सेवा क्षेत्रों और स्टार्टअप को बढ़ावा मिलेगा। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।
- भू-उपयोग नियमों में सुधार होगा, जिससे स्थानीय लोगों की संपत्ति की कीमतें और आर्थिक मूल्य बढ़ेगा।
- नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, आधुनिक शैक्षणिक संस्थान और डिजिटल कनेक्टिविटी की पहुंच आसान होगी।
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