छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: अरुणपति त्रिपाठी और बीआर लोहिया के खिलाफ पूरक चालान, 182.98 करोड़ के भुगतान में मिली गड़बड़ी
182.98 करोड़ के भुगतान में मिली गड़बड़ी, फोटो-एआई जनरेटेडHighLights
- शराब घोटाले में जांच एजेंसियों का एक्शन
- CSMCL के प्रबंध संचालक के खिलाफ चालान
- 182.98 करोड़ के भुगतान में मिली गड़बड़ी
, रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में शासकीय शराब दुकानों के कर्मचारियों के नाम पर 182.98 करोड़ रुपये से अधिक के अतिरिक्त भुगतान के मामले में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) और एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने सीएसएमसीएल के तत्कालीन प्रबंध संचालक अरुणपति त्रिपाठी और मैनपावर एजेंसी संचालक बच्छ राज लोहिया उर्फ बीआर लोहिया के विरुद्ध पूरक चालान पेश किया है।
जांच एजेंसी के अनुसार, मैनपावर एजेंसियों ने कर्मचारियों को ओवरटाइम, बोनस और चार अतिरिक्त दिनों के काम की राशि दिए बिना उनके नाम पर भुगतान प्राप्त किया। इस रकम का एक हिस्सा अधिकारियों और सिंडिकेट तक कमीशन के रूप में पहुंचाया गया, जबकि शेष राशि संबंधित कंपनियों ने अपने पास रखी।
ईओडब्ल्यू-एसीबी ने 18 अक्टूबर 2026 को रायपुर स्थित विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) में पूरक चालान प्रस्तुत किया। जांच में अरुणपति त्रिपाठी की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा गया है कि उन्होंने मैनपावर एजेंसियों से 28 से 32 करोड़ रुपये तक नकद कमीशन प्राप्त कर अनवर ढेबर तक पहुंचाने में भूमिका निभाई।
त्रिपाठी के हिस्से की अवैध रकम में से लगभग तीन करोड़ रुपये प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा जब्त किए जाने की जानकारी भी दी गई है। अरुणपति त्रिपाठी न्यायिक अभिरक्षा में हैं, जबकि बीआर लोहिया के विरुद्ध फरारी में चालान पेश किया गया है।
पांच एजेंसियों को 182.98 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान
जांच एजेंसी के मुताबिक, वर्ष 2019 से 2023 के बीच शासकीय शराब दुकानों में कर्मचारियों की आपूर्ति करने वाली पांच मैनपावर एजेंसियों को कुल 1,82,98,48,675 रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया। इनमें सुमीत फैसिलिटीज लिमिटेड, प्राइमवन वर्कफोर्स प्राइवेट लिमिटेड, ए-टू-जेड इन्फ्रासर्विसेस लिमिटेड, अलर्ट कमांडोज प्राइवेट लिमिटेड और ईगल हंटर सॉल्यूशन लिमिटेड शामिल हैं।
वर्ष 2019 की निविदा में कर्मचारियों के नियमित वेतन के अतिरिक्त ओवरटाइम, बोनस और चार अतिरिक्त दिनों के काम का भुगतान करने का प्रविधान था।
व्यवस्था के अनुसार, एजेंसियों को पहले कर्मचारियों को यह राशि देनी थी और इसके बाद छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कारपोरेशन लिमिटेड (सीएसएमसीएल) से भुगतान लेना था। जांच में इसके उलट कर्मचारियों को राशि दिए बिना अथवा वास्तविक भुगतान से अधिक रकम दर्शाकर देयक प्रस्तुत करने का मामला सामने आया।
शराब दुकानों में काम करने वाले कर्मचारियों ने अपने बयान में बताया कि उन्हें सामान्य मासिक वेतन तो मिलता था, लेकिन उनके नाम पर ओवरटाइम, बोनस और अतिरिक्त दिनों के काम के लिए ली गई राशि नहीं दी गई। जांच एजेंसी का कहना है कि इस तरीके से शासन को लगभग 182.98 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचाई गई।
त्रिपाठी के कार्यकाल में 152.40 करोड़ रुपये का भुगतान
अरुणपति त्रिपाठी 9 मई 2019 से 13 मई 2023 तक सीएसएमसीएल के प्रबंध संचालक रहे। इस दौरान निगम के प्रशासनिक और वित्तीय कार्यों के साथ निविदा तथा मैनपावर एजेंसियों के देयकों को अनुमोदित करने की जिम्मेदारी भी उनके पास थी।
ईओडब्ल्यू-एसीबी की जांच के अनुसार, त्रिपाठी के कार्यकाल में पांचों एजेंसियों को ओवरटाइम, बोनस, चार अतिरिक्त दिनों के काम और इन मदों पर सेवा शुल्क के रूप में कुल 1,52,39,77,666 रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया।
इसमें ओवरटाइम के लगभग 82.66 करोड़ रुपये, बोनस के 12.21 करोड़ रुपये, चार अतिरिक्त दिनों के काम के 45.02 करोड़ रुपये और सेवा शुल्क के 12.51 करोड़ रुपये शामिल हैं।
जांच एजेंसी ने दावा किया है कि अनवर ढेबर के कहने पर निविदा की शर्तों में बदलाव कराया गया और कर्मचारियों के नाम पर अतिरिक्त भुगतान कराकर कमीशन लेने की व्यवस्था बनाई गई।
एजेंसियों से नकद रकम एकत्र कर त्रिपाठी तक पहुंचाने में सिद्धार्थ सिंघानिया की भूमिका सामने आई। उसके बयान के अनुसार, सभी एजेंसियों से मिलाकर हर महीने लगभग 70 से 80 लाख रुपये कमीशन आता था।
जांच में अक्टूबर 2019 से मार्च 2023 के बीच अकेले सुमीत फैसिलिटीज की ओर से लगभग 15.65 करोड़ रुपये दिए जाने की जानकारी मिली। एजेंसियों से कुल 28 से 32 करोड़ रुपये नकद कमीशन प्राप्त कर अनवर ढेबर तक पहुंचाने के साक्ष्य मिलने का दावा किया गया है।
त्रिपाठी के कार्यकाल के बाद भी नवीन प्रताप सिंह तोमर के माध्यम से कमीशन वसूली जारी रहने और ओवरटाइम तथा सेवा शुल्क की राशि पर कमीशन की दर बढ़ाकर एक-तिहाई किए जाने की जानकारी जांच में सामने आई है।
ईगल हंटर और अलर्ट कमांडोज को मिले 48 करोड़ रुपये
पूरक चालान में बीआर लोहिया की भूमिका का भी विस्तार से उल्लेख किया गया है। लोहिया ईगल हंटर सॉल्यूशन लिमिटेड के संस्थापक थे। अलर्ट कमांडोज प्राइवेट लिमिटेड भी इसी समूह की कंपनी थी। जांच एजेंसी के अनुसार, दोनों कंपनियों के प्रमुख निर्णय लोहिया लेते थे।
आरोप है कि लोहिया ने कंपनी के चार्टर्ड अकाउंटेंट नीरज चौधरी को कर्मचारियों के ओवरटाइम और चार अतिरिक्त दिनों के काम के बिल तैयार करने के निर्देश दिए। इन बिलों के आधार पर सीएसएमसीएल से भुगतान प्राप्त किया गया, लेकिन संबंधित कर्मचारियों को राशि नहीं दी गई। अधिकारियों को नकद कमीशन देने की व्यवस्था में भी लोहिया की भूमिका पाई गई है।
दोनों कंपनियों को कुल 48,08,53,253 रुपये का अतिरिक्त भुगतान मिला। इसमें ईगल हंटर सॉल्यूशन लिमिटेड को 33,45,05,110 रुपये और अलर्ट कमांडोज प्राइवेट लिमिटेड को 14,63,48,143 रुपये का भुगतान शामिल है। इनमें से 38,31,76,541 रुपये अरुणपति त्रिपाठी के कार्यकाल में दिए गए थे।
जांच में ईगल हंटर से संबंधित नकद कमीशन के वित्तीय विवरण में 13,57,92,000 रुपये दर्ज होने की जानकारी भी मिली है। इसमें अलर्ट कमांडोज की ओर से दिया गया कमीशन भी शामिल होना पाया गया।
28.80 लाख रुपये कमीशन देने के दौरान ईडी की कार्रवाई
जांच में नवंबर 2023 में लंबित बिलों को पारित कराने के बदले कमीशन दिए जाने का मामला भी सामने आया। ईगल हंटर और अलर्ट कमांडोज के अक्टूबर 2023 के लंबित बिल पारित कराने के लिए तत्कालीन उप महाप्रबंधक नवीन प्रताप सिंह तोमर को लगभग 28.80 लाख रुपये दिए जाने थे।
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जांच एजेंसी के मुताबिक, बीआर लोहिया और अजय लोहिया के निर्देश पर दिल्ली से 29.40 लाख रुपये का चेक रायपुर भेजा गया।
बैंक से रकम निकालने के बाद 60 हजार रुपये कार्यालयीन खर्च के लिए रखे गए और शेष 28.80 लाख रुपये कमीशन देने के लिए अलग किए गए। कंपनी के कर्मचारी जब यह रकम पहुंचाने जा रहे थे, तभी प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई में रकम बरामद हुई।
ईओडब्ल्यू-एसीबी के अनुसार, जांच में इस रकम का संबंध मैनपावर एजेंसियों से कमीशन वसूली की पहले से चल रही व्यवस्था से पाया गया।
आंगड़िया नेटवर्क से मुंबई और हैदराबाद भेजी गई रकम
पूरक चालान में नकद रकम को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए आंगड़िया नेटवर्क के इस्तेमाल से संबंधित साक्ष्य भी शामिल किए गए हैं। जांच के दौरान महमूद अहमद खान ने बताया कि वर्ष 2019 से 2022 के बीच उसने पी. विजय कंपनी तक लगभग 60 से 70 करोड़ रुपये नकद पहुंचाए थे। उसे यह रकम अरुणपति त्रिपाठी की बताई गई थी।
पी. विजय कुमार एंड कंपनी के तत्कालीन साझेदार निमेष चन्द्रकान्त पटेल ने अपने बयान में रकम मुंबई में श्रीजी इंटरप्राइजेज को दिए जाने और वहां से आगे हैदराबाद भेजे जाने की जानकारी दी। जांच एजेंसी ने इन गवाहों के बयानों को भी चालान का हिस्सा बनाया है।
पहले 12 आरोपितों के खिलाफ पेश हो चुका है चालान
ईडी से प्राप्त प्रतिवेदन के सत्यापन के बाद 5 अक्टूबर 2024 को इस मामले में अपराध दर्ज किया गया था। प्रकरण में नवीन प्रताप सिंह तोमर, अनवर ढेबर, मैनपावर एजेंसियों के संचालकों और अन्य संबंधित व्यक्तियों सहित 12 आरोपितों के विरुद्ध 18 मई 2026 को पहला चालान पेश किया जा चुका है।
आगे की विवेचना के दौरान अरुणपति त्रिपाठी और बीआर लोहिया की संलिप्तता से संबंधित साक्ष्य मिलने पर अब उनके विरुद्ध पूरक चालान प्रस्तुत किया गया है। इसमें शराब दुकानों के कर्मचारियों और अन्य गवाहों के बयान, सीएसएमसीएल के भुगतान अभिलेख, एजेंसियों के देयक, कंपनी के दस्तावेज, बैंक संबंधी अभिलेख और नकद कमीशन के वित्तीय विवरण शामिल किए गए हैं।
ईओडब्ल्यू-एसीबी के अनुसार, बीआर लोहिया को पूछताछ के लिए बार-बार नोटिस जारी किए गए, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुए। इसके बाद उनके संबंध में फरारी पंचनामा तैयार कर फरारी में ही पूरक चालान पेश किया गया। दोनों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। मामले में आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायालय में साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर होगा।
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