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’जीवटता और परिश्रम से गढ़ी आत्मनिर्भरता की राह, सुषमा साहू अब 10-12 महिलाओं को भी दे रहीं रोजगार’

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’जीवटता और परिश्रम से गढ़ी आत्मनिर्भरता की राह, सुषमा साहू अब 10-12 महिलाओं को भी दे रहीं रोजगार’

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कोरिया 17 अक्टूबर 2026

अपना उद्यम स्थापित करने का सपना, काम करने का जज्बा और आगे बढ़ने का जुनून था, लेकिन आर्थिक कठिनाइयां राह रोक रही थीं. इन परिस्थितियों में भी बैकुण्ठपुर के तलवापारा निवासी श्रीमती सुषमा साहू ने हौसला बनाए रखा. प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) का सहयोग मिला तो उन्होंने अपने सपने को साकार किया. आज वे चेकर टाइल्स एवं पेवर ब्लॉक निर्माण इकाई का संचालन कर आत्मनिर्भर बनने के साथ करीब 10दृ12 महिलाओं को रोजगार भी उपलब्ध करा रही हैं.

श्री रमेश चन्द्र साहू की पत्नी श्रीमती सुषमा साहू पढ़ाई और विवाह के बाद अपना काम शुरू करने के लिए प्रयासरत थीं. उद्यम स्थापित करने के लिए आवश्यक पूंजी जुटाना उनके सामने बड़ी चुनौती थी. इसी दौरान उन्हें उद्योग विभाग से पीएमईजीपी की जानकारी मिली. जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र, कोरिया के सहयोग से उन्होंने ऑनलाइन आवेदन किया.

योजना के माध्यम से वर्ष 2023-24 में उन्हें चेकर टाइल्स एवं पेवर ब्लॉक निर्माण के लिए 20 लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ. इस राशि से उन्होंने मशीनरी और कच्चे माल की व्यवस्था कर अपनी निर्माण इकाई की शुरुआत की. इसके बाद मेहनत और लगन से उद्यम को आगे बढ़ाया.

सुषमा अब लगभग 35 हजार रुपये प्रतिमाह आय अर्जित कर रही हैं. इससे परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है और आजीविका का आधार मजबूत हुआ है. उद्यम के संचालन ने उन्हें आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ निर्णय लेने और आगे बढ़ने का आत्मविश्वास भी दिया है.

उनकी इस पहल का लाभ साथ काम करने वाली महिलाओं को भी मिल रहा है. कभी स्वयं रोजगार की तलाश में रहीं सुषमा आज अन्य महिलाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध करा रही हैं. इस तरह उनका उद्यम अपने परिवार के साथ दूसरे परिवारों की आजीविका में भी योगदान दे रहा है.

योजना से मिले सहयोग के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सुषमा कहती हैं कि आर्थिक सहायता ने उन्हें अपना काम स्थापित करने और अन्य महिलाओं को रोजगार से जोड़ने का अवसर दिया है.

सुषमा की सफलता जीवटता, जज्बे, जुनून और परिश्रम की कहानी है. उन्होंने आर्थिक बाधाओं के बीच उपलब्ध अवसर का उपयोग कर न केवल आत्मनिर्भरता की राह बनाई, बल्कि अन्य महिलाओं को भी आगे बढ़ने का अवसर दिया है.

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