बिलासपुर में सड़कों के ‘धीमे जहर’ पर फूटा गुस्सा, तालापारा में सड़क पर उतरीं महिलाएं, 5 साल के दर्द के बाद चक्काजाम
मरीमाई कब्रस्तान के सामने सड़क जाम कर बैठे मोहल्लेवासीHighLights
- बिलासपुर के तालापारा में जर्जर सड़क और धूल पर फूटा चक्काजाम। x
- भूमिपूजन के 4 माह बाद भी सड़क के नाम पर गिट्टी-मुरुम।
- कलेक्टर व विधायक बंगले के रास्ते भी उधड़कर बने गड्ढे।
, बिलासपुरः हम सड़क पर नहीं, बीमारी और मौत के मुहाने पर जी रहे हैं। फेफड़ों में आक्सीजन कम और धूल ज्यादा जा रही हैं। इलाके के हर घर में दमा और सांस का मरीज बिस्तर पर हैं। क्या प्रशासन हमारे मरने का इंतजार कर रहा है। यह किसी पीड़ित का विलाप नहीं, बल्कि तालापारा-मगरपारा मुख्य मार्ग स्थित मरीमाई मंदिर के पास चिलचिलाती धूप में घंटों तक सड़क पर मोर्चा संभाले खड़ी महिलाओं, बुजुर्गों और आक्रोशित युवाओं की आवाजें हैं।
पांच वर्षों से प्रशासनिक उपेक्षा और झूठे आश्वासनों की मार झेल रहे पूरे इलाके का सब्र रविवार को आखिरकार टूट गया। एक हजार से अधिक की आबादी वाले मोहल्लेवासी नरक जैसी जिंदगी को भुगतने पर मजबूर हैं। मरीमाई मंदिर पूरे अंचल के श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है, जहां रोजाना और विशेष पर्वों पर हजारों भक्त शीश नवाने पहुंचते हैं।
वहीं इसी मार्ग पर मुस्लिम समुदाय का कब्रिस्तान स्थित है, जहां जुमा, शब-ए-बरात जैसे विशेष अवसरों सहित जनाजे व अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। लेकिन बदहाल सड़क और उड़ती धूल के कारण अब आस्था के इन केंद्रों तक पहुंचना भी किसी कठिन परीक्षा से कम नहीं रहा।
करीब चार माह पहले विधायक अमर अग्रवाल ने सड़क निर्माण के लिए भूमिपूजन किया था, वह तक अधूरी नाली और गिट्टियों के जानलेवा मलबे में तब्दील है। वादा था कि हफ्तेभर में डामरीकरण शुरू होगा, लेकिन हकीकत यह है कि ठेकेदार और निगम के अफसरों ने सड़क को मुरुम और पत्थरों के हवाले छोड़ दिया।
हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि चौबीसों घंटे उड़ते धूल के गुबार ने पूरे मोहल्लेवासियों का जीना मुहाल कर दिया है। घरों के बर्तनों से लेकर बिस्तरों तक धूल की मोटी परत जम जाती है। सड़क पर जानलेवा गड्ढे हैं कि आटो चालक मरीजों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाने से हाथ खड़े कर देते हैं।
रविवार को आक्रोशित जनता ने रास्ता पूरी तरह जाम कर दिया। चक्काजाम की सूचना मिलते ही उपायुक्त अंकुर पांडे मौके पर पहुंचे और मोहल्ले वासियों को वस्तुस्थिति से अवगत कराते हुए जल्द सड़क निर्माण कार्य शुरू होने का आश्वासन दिया।
05 वर्ष से नरक जैसी जिंदगी जीने को मजबूर हैं क्षेत्रवासी, नहीं बनी सड़क
1000 से अधिक की आबादी उड़ती धूल और गड्ढों से प्रभावित 04 माह विधायक के भूमिपूजन को गुजरे, काम के नाम पर सिर्फ गिट्टी-मुरुम बाक्स– विधायक और कलेक्टर निवास की सड़क भी गड्ढों से अछूती नहीं वीआइपी दावों का खोखलापन खुद अफसरों और माननीयों की चौखट पर बेपर्दा हो रहा है। विधायक और कलेक्टर बंगले की ओर जाने वाली मुख्य सड़कें भी उधड़ कर गड्ढों में तब्दील है।
जिले के नीति-नियंताओं और सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारियों के आवास तक पहुंचने वाले रास्ते सुरक्षित नहीं हैं, तो आम बस्तियों और संकरी गलियों में रहने वाली जनता की सुरक्षा की परवाह किसे होगी? अफसर और नेता रोज हिचकोलों से गुजरते हैं, फिर भी आंखें मूंदे बैठे हैं।
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शहर की हर सड़क गड्ढे से भरी, लोग बोले- कब मिलेगा छुटकारा
शहर का शायद ही कोई ऐसा कोना बचा हो जहां की सड़कें गड्ढों से छलनी न हों। व्यापार विहार, लिंक रोड, करबला, तारबाहर और मिनोचा विहार से लेकर तालापारा या फिर सिंधी कालोनी हो हर तरफ गिट्टियां बिखर रही हैं। दोपहिया चालकों के लिए सफर करना रीढ़ की हड्डी तुड़वाने जैसा जोखिम बना हुआ है। लोग स्लिप डिस्क, साइटिका और कमर दर्द के स्थायी मरीज बनते जा रहे हैं। भारी भरकम टैक्स चुकाने के बाद भी जनता रोज जान हथेली पर रखकर निकलती है और अब हर जुबान पर एक ही सवाल है कि आखिर इस जानलेवा गड्ढाराज से कब मुक्ति मिलेगी?
धूल के गुबार से घुट रहा दम – यास्मीन खान
धूल से हमारा जीना मुहाल हो गया है। हमारे घरों में मां-बाप और बच्चे दमा और सांस की बीमारी से तड़प रहे हैं। सड़क के गड्ढों और धूल को देखकर आटो वाले हमारे घर आने से मना कर देते हैं। यह विकास नहीं, धीमा जहर हैं। – शमा बेगम: पांच साल से हम गड्ढों और पत्थरों की मार झेल रहे हैं।
राहगीर और महिलाएं रोज गिरकर लहूलुहान हो रही हैं। चुनाव में हाथ जोड़कर वोट मांगने वाले नेता अब हमारी हालत देखने तक नहीं आते। लीपापोती बंद कर तत्काल पक्की सड़क बनाई जाए।
कैसर इमरान अंसारी: चार महीने पहले बड़े नेताओं ने वादा किया था कि एक हफ्ते में काम शुरू होगा। आज तक काम शुरू नहीं हुआ। नाली खोदकर छोड़ दी गई हैं, घरों में गंदा पानी भर रहा हैं। तीन घंटे से धूप में खड़े हैं, पर कोई जिम्मेदार झांकने तक नहीं आया।
शमीम अली: प्रशासन पूरी तरह संवेदनहीन और निष्क्रिय हो चुका है। जर्जर सड़क और धूल से बच्चों का भविष्य और स्वास्थ्य दोनों बर्बाद हो रहा है। हम अपने हक की सड़क मांग रहे हैं, भीख नहीं। तक सड़क नहीं बनेगी, हम चुप नहीं बैठेंगे।
बारिश की वजह से डामरीकरण और पैचवर्क का कार्य रुका हुआ था। लेकिन डामर की बढ़ी हुई कीमतों को लेकर पेंच फंसा हुआ है। राज्य सरकार को मामले से अवगत कराया गया है। जल्द ही सड़कों की मरम्मत का कार्य शुरू होगा। प्रकाश सर्वे, आयुक्त नगर निगम बिलासपुर
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