छत्तीसगढ़ के ‘बांस गीत’ के साधक विक्रम यादव का 85 साल की उम्र में निधन, लोककला जगत में शोक
अंतरराष्ट्रीय बांस वादक विक्रम यादव का निधन (फाइल फोटो)HighLights
- बांस वादक विक्रम यादव का 85 साल में निधन
- हबीब तनवीर के नया थियेटर से जुड़ा था नाता
- राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के सामने दी थी प्रस्तुति
, राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ की लोकगाथा बांस गीत और बांस वादन की मधुर धुन को देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाने वाले लोककला के साधक विक्रम यादव अब हमारे बीच नहीं रहे।
छह दशक से अधिक समय तक अपनी कला के जरिए छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को दुनिया के सामने रखने वाले अंतरराष्ट्रीय बांस वादक विक्रम यादव का गुरुवार सुबह पांच बजे 85 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वे पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके निधन से लोककला जगत में शोक की लहर है।
नया थियेटर से शुरू हुआ अंतरराष्ट्रीय सफर
विक्रम यादव ने वर्ष 1971 में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त रंगकर्मी हबीब तनवीर के नया थियेटर से जुड़कर अपनी कला यात्रा को नई पहचान दी। बांस, बांसुरी और बीन वादन में उनकी अद्भुत प्रतिभा ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने रायपुर, दिल्ली, भोपाल, कोलकाता, दुर्गापुर, शोलापुर, उत्तरप्रदेश, पुणे, हरियाणा, कोल्हापुर, सतारा, मुंबई और अहमदाबाद सहित देश के अनेक शहरों में अपनी प्रस्तुतियां दीं।
वर्ष 2007 में रंगकर्मी अनुपरंजन पांडेय के बस्तर बैंड से जुड़ने के बाद उनकी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का दायरा और व्यापक हो गया। उन्होंने विदेशों में भी छत्तीसगढ़ की लोककला का प्रतिनिधित्व किया। उन्हें राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के समक्ष अपनी कला प्रस्तुत करने का गौरव भी प्राप्त हुआ। लोक मड़ई, मंदराजी महोत्सव, चक्रधर समारोह, अंतरराष्ट्रीय महाउर कला महोत्सव, जयपुर लोकरंग महोत्सव और नया थियेटर भोपाल जैसे प्रतिष्ठित मंचों पर उनके बांस वादन की विशिष्ट पहचान रही।
राष्ट्रीय तुलसी सम्मान सहित मिले कई प्रतिष्ठित सम्मान
छह दशक से अधिक की कला साधना के दौरान विक्रम यादव को अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया। वर्ष 2007 में युवा कुर्मी मित्र मंडल भिलाई ने उन्हें भुइयां सम्मान प्रदान किया। वर्ष 2018 में मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग ने उन्हें प्रतिष्ठित राष्ट्रीय तुलसी सम्मान से सम्मानित किया।
वर्ष 2022 में गुरुघासीदास लोककला महोत्सव ककरेल तथा भारतीय जन नाट्य संघ की ओर से भी उनका सम्मान किया गया। लोकपरंपरा के संरक्षण और दीर्घ कला साधना के लिए साकेत साहित्य परिषद सुरगी ने भी उन्हें 4 अक्टूबर 2026 को ग्राम मोखला में आयोजित वार्षिक समारोह में साकेत कला साधना सम्मान 2026 से सम्मानित किया था।
आने वाली पीढ़ियों के लिए रहेंगे प्रेरणास्रोत
श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए महापौर मधुसूदन यादव ने कहा कि विक्रम यादव का निधन छत्तीसगढ़ की लोककला के लिए अपूरणीय क्षति है। बांस वादन की विलुप्त होती परंपरा को उन्होंने अपनी साधना से नई पहचान दिलाई। उनकी कला साधना और लोक संस्कृति के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।
विक्रम यादव ने अपना पूरा जीवन बांस गीत और बांस वादन को समर्पित कर दिया था। उन्होंने न सिर्फ इस विधा को जीवित रखा, बल्कि नई पीढ़ी तक पहुंचाया। उनके जाने से छत्तीसगढ़ ने लोककला का एक सच्चा साधक खो दिया है।
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अंतिम विदाई देने उमड़ा जनसमूह
गृहग्राम खैरा में आयोजित अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। पूर्व सांसद एवं महापौर मधुसूदन यादव, जिला भाजपा अध्यक्ष कोमल सिंह राजपूत, जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि पप्पू चंद्राकर, भाजपा मंडल अध्यक्ष मनोज साहू, खैरा सरपंच भूपेंद्र यादव, भरेंगांव के पूर्व सरपंच दिलीप चंद्राकर, साकेत साहित्य परिषद सुरगी के अध्यक्ष ओमप्रकाश साहू, पूर्व अध्यक्ष लखनलाल साहू, उपाध्यक्ष पवन यादव, सर्किल यादव समाज अध्यक्ष विशारद यादव, सरपंच भगवान सिंह यादव, रामगुलाल यादव और कुशल यादव सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण, जनप्रतिनिधि तथा कला-साहित्य जगत से जुड़े लोग उपस्थित रहे। सभी ने नम आंखों से लोककला के इस साधक को अंतिम विदाई दी।
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