अक्षय तृतीया पर विविध धार्मिक आयोजन, भगवान परशुराम की मनाई…- भारत संपर्क

अक्षय तृतीया के विषय में श्री गोपाल कृष्ण रामानुज दास जी ने बताया कि वैशाख शुक्ल पक्ष कि तृतीया इस दिन किया हुआ सत्कर्म अक्षय पुण्य प्रदान करता है इसलिए इस अक्षय तृतीया भी कहा जाता है इसी दिन से त्रेतायुग प्रारंभ हुआ , इसी दिन द्रौपदी को अक्षय पात्र मिला , इसी तिथि को भगवान परशुराम का प्राकट्य हुआ इस तिथि पर किया गया पूजा पाठ जप अनुष्ठान हवन गौसेवा दिया हुआ दान पुण्य अक्षय होता है उसका किसी भी काल में क्षय नहीं होता क्षय का अर्थ समाप्त, कभी न समाप्त हो उसे अक्षय कहते है , लोग मंदिरो में जाकर पानी के घड़े व आम सत्तू आदि का दान करते हैं।

अक्षय तृतीया इस दिन से भगवान कि सेवा दिनचर्या में बदलाव होता है भगवान को प्रातः काल ठंडाई पीला कर उठाते हैं , बाल भोग में सत्तू खिलाते हैं ठंडे मटके के जल से स्नान करा कर ठंडे चंदन इत्र कपूर मिश्रित चंदन का लेप लगाते हैं गर्मी की उमस से बचाव के लिए भगवान के गर्भगृह में पंखा कुलर ए सी आदि भी लगाया जाता है। भगवान को नित्य प्रति दिन ठंडे फल खरबूजा,कलींदर, आम , रितु फल , लस्सी, जूस , व मटके के ठंडे कलश का जल अर्पित किया जाता है कहीं कहीं मंदिर में फूल बंगला सजाया जाता है। साथ ही आज ही के दिन भगवान बद्रीनाथ धाम का कपाट भक्तों के लिए खोला जाता है , अक्षय तृतीया के दिन ही वृंदावन में ठाकुर श्री बांके बिहारी जी का चरण दर्शन भक्तों को होता है साथ ही मंदिर को प्रति दिन फूल बंगला के रुप में सुसज्जित किया जाएगा ,
गौसेवक श्री गोपाल कृष्ण रामानुज दास ने कहा हमारे छत्तीसगढ़ में भांजे को बहुत मानते हैं और अक्षय तृतीया के दिन मामा लोग अपने भांजे के भर जा कर दान पुण्य करते हैं साथ ही बेटीयों को भी दान पुण्य किया जाता है हमारे शहर के बिलासपुर गौसेवा धाम जहां बीमार एक्सिडेंट गौवंशो कि सेवा का कार्य होता है यहां अक्षय तृतीया पर लोग तुला दान, गौमाता के निमित्त गुड़ दाना , हरा चारा, कटीया, भूषा , सत्तू का दान कर रहे हैं जो गौमाता कि सेवा में चलेगा सनातन धर्म में गौमाता को चलता फिरता भगवान का मंदिर कहां गया हो जो गौवंश कि सेवा करते हैं तो उन्हें अक्षय पुण्य मिलता है। इस कलयुग में गौमाता ही है जो सभी मनोरथ पूर्ण करती है ।

