23 लाख स्टूडेंट, 75 हजार स्कूल और एक वॉर रूम…जानें क्या है परख राष्ट्रीय…

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23 लाख स्टूडेंट, 75 हजार स्कूल और एक वॉर रूम…जानें क्या है परख राष्ट्रीय…
23 लाख स्टूडेंट, 75 हजार स्कूल और एक वॉर रूम...जानें क्या है परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024?

क्या है परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024?Image Credit source: Deepak Sethi/E+/Getty Images

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के तहत नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग यानी एनसीईआरटी (NCERT) के राष्ट्रीय मूल्यांकन निकाय द्वारा 4 दिसंबर को एक राष्ट्रव्यापी स्कूल शिक्षा सर्वेक्षण आयोजित किया जाने वाला है, जिसका नाम परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024 है. इसे पहले नेशनल अचीवमेंट सर्वे (NAS) के रूप में जाना जाता था, जिसका आयोजन हर तीन साल में किया जाता है. पिछली बार नेशनल अचीवमेंट सर्वे 2017-2021 में हुआ था. इस सर्वे को समय के साथ भारत की स्कूली शिक्षा प्रणाली की प्रगति का मूल्यांकन और निगरानी करने के लिए डिजाइन किया गया है.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण की प्रमुख और सीईओ प्रोफेसर इंद्राणी भादुड़ी ने बताया कि इस साल 782 जिलों के 75 हजार से अधिक स्कूल और 22 लाख 94 हजार से अधिक छात्र इसमें भाग लेंगे. उन्होंने कहा कि ये पहली बार है जब एनसीईआरटी हेडक्वार्टर में सर्वे की प्रोग्रेस पर नजर रखने और जिलेभर से प्रश्नों का उत्तर देने के लिए 24×7 वॉर रूम बनाया गया है. यह वॉर रूम 27 नवंबर से लाइव हुआ है और 5 दिसंबर तक चालू रहेगा.

वॉर रूम में 24 घंटे काम करेगी टीम

प्रोफेसर भादुड़ी ने बताया कि वॉर रूम में जो टीम होगी, वो अलग-अलग शिफ्ट में चौबीसों घंटे काम करेगी. रात की शिफ्ट में दो लोग फील्ड इन्वेस्टिगेटर्स और अन्य लोगों जैसे कि मैटेरियल और लोगों की आवाजाही से जुड़े सवालों के समाधान में मदद करेंगे. इसका उद्देश्य किसी भी क्षेत्र से आने वाले किसी भी सवाल का जल्द से जल्द समाधान करना है ताकि सर्वे का काम अच्छी तरह से पूरा हो सके.

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सर्वे में क्या होगा?

इस सर्वे में छात्रों की एक परीक्षा ली जाएगी, जो उनके शैक्षिक स्तर की जांच करेगा. इसके लिए छात्रों के लिए प्रश्नपत्र तैयार किए गए हैं, जबकि शिक्षकों और स्कूल प्रशासन के लिए एक प्रश्नावली तैयार की गई है. इसका उद्देश्य प्रमुख विषयों में छात्रों के नॉलेज का आकलन करना, जेंडर, जगह और सामाजिक-आर्थिक ग्रुप्स के आधार पर उनके परफॉर्मेंस की तुलना करने, नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF-2023) के आधार पर सीखने के अंतर के बारे में बताना, सीखने की क्षमता को प्रभावित करने वाले कारकों की पहचान करना, साथ ही रिसोर्स का अलॉटमेंट करना और भविष्य के लिए नीतियों को आकार देना है.

3, 6 और 9वीं कक्षा के छात्र लेंगे भाग

इस सर्वे के तहत परीक्षा के दौरान 3, 6 और 9वीं कक्षा के छात्रों की तीन विषयों की परीक्षा ली जाएगी. तीसरी और छठी कक्षा के छात्रों की हिंदी, मैथ्स और पर्यावरण विषय की डेढ़ घंटे की परीक्षा होगी, जबकि 9वीं कक्षा के छात्रों की हिंदी, मैथ्स, साइंस और सामाजिक विज्ञान में से किसी तीन विषयों की 2 घंटे की परीक्षा होगी. कक्षा 3 और 6 में कुल 45 अंक और कक्षा 9 में कुल 60 अंकों की ये परीक्षा होगी.

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