जीवेश मिश्रा से विजय मंडल तक… नीतीश कैबिनेट के 7 नए लेकिन मंझे चेहरों का…

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जीवेश मिश्रा से विजय मंडल तक… नीतीश कैबिनेट के 7 नए लेकिन मंझे चेहरों का…
जीवेश मिश्रा से विजय मंडल तक... नीतीश कैबिनेट के 7 नए लेकिन मंझे चेहरों का सियासी सफर

नीतीश मंत्रिमंडल विस्तार.

सीएम नीतीश कुमार ने बुधवार को अपने बहुप्रतिक्षित मंत्रिमंडल का विस्तार किया. राज्य में काफी दिनों से इस बात की चर्चा थी कि नीतीश कुमार अपने मंत्रिमंडल का विस्तार कर सकते हैं. अब इस पर विराम लग गया है. संजय सरावगी, सुनील कुमार, जीवेश मिश्रा, कृष्ण कुमार मंटू, विजय मंडल, राजू सिंह और मोतीलाल प्रसाद मंत्री बने हैं. आइए जानते हैं नीतीश कैबिनेट के 7 नए मंत्रियों के सियासी सफर के बारे में.

एबीवीपी से शुरू किया राजनीतिक सफर

नीतीश मंत्रिमंडल में शामिल जीवेश मिश्रा भारतीय जनता पार्टी के नेता हैं. जीवेश 2020 में जाले विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी की टिकट पर चुनाव जीतकर बिहार विधानसभा पहुंचे थे. उनको श्रम संसाधन विभाग का मंत्री बनाया गया था. जीवेश ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी. 1981 से लेकर 1998 तक वो एबीवीपी के सक्रिय सदस्य रहे. 2002 में भाजपा के सक्रिय सदस्य बने और पहली बार 2015 में जाले निर्वाचन क्षेत्र से विधायक चुने गए. जीवेश जाले विधानसभा सीट से लगातार तीन बार विधायक चुने जा चुके हैं. बीजेपी की सदस्यता अभियान को लेकर भी प्रदेश में इनको बड़ी जिम्मेदारी दी गई थी.

इनका है रूस में बिजनेस

नीतीश मंत्रिमंडल के विस्तार में साहिबगंज से विधायक बने राजू सिंह को भी जगह मिली है. राजू सिंह ने 2005 में बिहार की राजनीति में एंट्री ली थी. पहली बार वो लोक जनशक्ति पार्टी की टिकट पर विधायक चुने गए थे. हालांकि 2005 में अक्टूबर महीने में हुए चुनाव में उन्होंने पार्टी बदल ली थी और जदयू में शामिल हो गए थे. जदयू की टिकट पर उन्होंने साहिबगंज से दोबारा जीत हासिल की थी. पांच साल बाद 2010 में वो फिर विधायक बने. 2015 में राजीव सिंह ने जदयू को छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया था. हालांकि 2015 विधानसभा चुनाव में उनको जीत नहीं मिल सकी थी. 2020 में उन्होंने फिर पार्टी बदली और मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी में शामिल हो गए थे लेकिन 2022 में दो अन्य विधायकों के साथ वीआईपी को छोड़ और बीजेपी में शामिल हो गए थे. बीटेक पास राजू सिंह की छवि एक दबंग विधायक की है. उनकी गिनती राज्य के बड़े रसूखदार के साथ ही उद्योग और व्यवसाय जगत के बड़े लोगों में भी की जाती है. बताया जाता है कि इनका रूस में कारोबार भी है.

सुनील कुमार का सियासी रसूख

बिहारशरीफ से विधायक सुनील कुमार को भी नीतीश मंत्रिमंडल विस्तार में जगह मिली है. सियासत में होने के साथ ही सुनील सफल बिजनेसमैन और भोजपुरी फिल्मों के निर्माता भी हैं. 2005 में उन्होंने राजनीतिक सफर की शुरुआत बिहारशरीफ सीट से की थी और पहले ही चुनाव में राजद नेता सैयद नौशादउन नबी उर्फ पप्पू खान को हराया था. जनता दल यूनाइटेड से अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत करने वाले सुनील कुमार ने 2005 और 2010 में जदयू की टिकट पर जीत हासिल की थी. 2013 में जब जदयू और बीजेपी का गठबंधन खत्म हुआ था, तब उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया था. इसके बाद 2015 और 2020 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर जीत हासिल की थी. सुनील कुमार की पहचान इलाके में बड़े कुर्मी नेता के रूप में होती है.

इनकी है बक्सा बनाने की दुकान

सीतामढ़ी जिले के रीगा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा की टिकट पर दूसरी बार विधायक बने मोतीलाल प्रसाद को भी इस मंत्रिमंडल विस्तार में जगह मिली है. वैश्य समाज से आने वाले मोती लाल प्रसाद 2010 में भाजपा की टिकट पर पहली बार विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने में सफल हुए थे. हालांकि 2015 के चुनाव में उनको हार का सामना करना पड़ा था. 2020 के चुनाव में उन्होंने फिर वापसी की और विधायक चुने गए. रीगा विधानसभा क्षेत्र में वैश्य मतदाताओं की संख्या अच्छी खासी है. ऐसे में बीजेपी ने वैश्य मतदाताओं को साधने के लिए मोतीलाल प्रसाद को नीतीश मंत्रिमंडल के इस विस्तार में शामिल किया है. मिली जानकारी के अनुसार, मोतीलाल प्रसाद का पारिवारिक व्यवसाय भी है. उनकी बक्सा बनाने की दुकान भी है, जो बैरगनिया नगर परिषद क्षेत्र में है. बताया जाता है कि वर्तमान में उनके दोनों बेटे दुकान को संभालते हैं.

संजय का सियासी सफर

बीजेपी की टिकट पर लगातार पांच बार दरभंगा सदर के विधायक संजय सरावगी को भी नीतीश मंत्रिमंडल के विस्तार में जगह मिली है. संजय सरावगी ने 2005 में पहली बार दरभंगा सदर सीट से अपना चुनाव जीता था. तब से लगातार वह इस सीट पर जीत हासिल करते चले आ रहे हैं. छात्र जीवन से अपनी राजनीति की शुरुआत एबीवीपी से की थी. 1995 में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ली थी. संजय सरावगी दरभंगा नगर निगम से वार्ड पार्षद भी रह चुके हैं. उनकी पहचान एक बेदाग छवि वाले नेता की रही है.

कृष्ण कुमार मंटू भी बने मंत्री

नीतीश कैबिनेट के विस्तार में भाजपा कोटे से कृष्ण कुमार मंटू को भी जगह मिली है. सारण जिले की अमनौर सीट से बीजेपी विधायक कृष्ण कुमार मंटू ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत जनता दल यूनाइटेड से की थी. सारण के सांसद राजीव प्रताप रूडी के करीबियों में उनकी गिनती होती है. पंचायत के मुखिया रह चुके कृष्ण कुमार मंटू की छवि एक दबंग की रही है. वह छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहे हैं. 2010 में अमनौर सीट से कृष्ण कुमार मंटू जदयू की टिकट पर पहली बार विधायक चुने गए थे. हालांकि 2015 के विधानसभा चुनाव में उनको बीजेपी के उम्मीदवार के हाथों हार का सामना करना पड़ा था. कहा यह भी जाता है कि राजीव प्रताप रूडी के ही कहने पर उन्होंने 2020 में जनता दल यूनाइटेड को टाटा किया था.

कभी आनंद मोहन की पार्टी के थे इकलौते विधायक

अररिया के सिकटी विधानसभा क्षेत्र से पांच बार के विधायक विजय कुमार मंडल भी मंत्री बन गए हैं. मंडल 2000 में भी राबड़ी देवी कैबिनेट में मंत्री रह चुके हैं. वह रामविलास पासवान की लोजपा के टिकट पर भी विधायक चुने जा चुके हैं. उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत 1995 में आनंद मोहन की पार्टी बिहार पीपुल्स पार्टी से की थी और उनको जीत में मिली थी. इसके बाद वह राष्ट्रीय जनता दल में शामिल हो गए थे. 2000 के चुनाव में उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में किस्मत आजमाई थी जीत भी मिली थी. इसके बाद वह राजद में शामिल हो गए थे और बिहार सरकार में राज्य मंत्री भी बने थे. 1995 के विधानसभा चुनाव में विजय मंडल आनंद मोहन की बिहार पीपुल्स पार्टी के इकलौते विधायक बने थे. मंडल ने 2015 और 2020 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत भी हासिल की थी. सीमांचल के राजनीति में विजय कुमार मंडल की अच्छी खासी पकड़ बताई जाती है.

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