वाराणसी से खास है IFS निधि तिवारी का रिश्ता, जो बनीं पीएम मोदी की निजी सचिव

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वाराणसी से खास है IFS निधि तिवारी का रिश्ता, जो बनीं पीएम मोदी की निजी सचिव
वाराणसी से खास है IFS निधि तिवारी का रिश्ता, जो बनीं पीएम मोदी की निजी सचिव

कौन हैं निधि तिवारी, जो अब होंगी पीएम मोदी की निजी सचिव.

IFS निधि तिवारी अब पीएम नरेंद्र मोदी की पर्सनल सेक्रेटरी होंगीं. भारत सरकार के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के मुताबिक उनकी नियुक्ति को मंजूरी दे दी गई है. निधि अभी प्रधानमंत्री कार्यालय में ही डिप्टी सेक्रेटरी के पद पर काम कर रही हैं. 29 मार्च को जारी हुए आदेश में कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने उनके अनुभव के आधार पर उन्हें इस पद पर नियुक्त किया है.

निधि 2013 बैच की IFS अधिकारी हैं, जो अब पीएम मोदी की निजी सचिव होंगीं. उनका कार्यकाल को टर्मिनस आधार पर होगा. यानी प्रधानमंत्री के कार्यकाल या अगले आदेश तक वह पीएम की पर्सनल सेक्रेटरी बनी रहेंगीं. खास बात ये है कि निधि का बनारस में से बेहद खास रिश्ता है, आइए जानते हैं क्या?

कौन हैं निधि तिवारी

निधि तिवारी IFS अधिकारी हैं जो पीएमओ में उप सचिव के तौर पर काम कर रही हैं. इससे पहले वह पीएमओ में ही अवर सचिव के तौर पर काम कर रही थीं. मूल रूप से निधि वाराणसी के महमूरगंज की रहने वाली हैं. 2013 में यूपीएससी परीक्षा पास करने से पहले वह बनारस में सहायक आयुक्त के तौर पर भी काम कर चुकी हैं. जब उन्होंने सिविल सेवा पास की थी तो उनकी 96 वीं रैंक आई थी.

विदेश मंत्रालय में भी कर चुकी हैं काम

निधि तिवारी विदेश मंत्रालय में भी काम कर चुकी हैं, जहां उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के प्रभाग में भी काम किया है. इसी में उनकी विशेषज्ञता को देखते हुए उन्हें पीएमओ में काम करने का मौका मिला था. यहां भी वह विदेश ओर सुरक्षा मामलों को ही देखती हैं. बताया जाता है कि यहां उनकी रिपोर्टिंग राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल को थी. बताया जाता है कि भारत की G20 अध्यक्षता के दौरान भी निधि के काम को सराहा गया था. उस दौरान उन्होंने विदेश नीति में गहरी भागीदारी के चलते महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

निधि पर क्या होगी जिम्मेदारी

पीएम मोदी की पर्सनल सेक्रेटरी के तौर पर निधि तिवारी पर पीएम मोदी के रोजमर्रा प्रशासिनक कार्यों को संभालने की जिम्मेदारी होगी. इसके बाद पीएम की महत्वपूर्ण बैठकें, विदेश दौरों की तैयारी और अन्य नीतिगत निर्णय लेने की तैयारी और समन्वय में भी वह अहम भूमिका निभाएंगीं. उनका कार्यकाल को टर्मिनस आधार पर होगा. यानी पीएम मोदी के कार्यकाल तक या अगले आदेश तक वह इस पद पर बनी रहेंगीं.

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