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बुनियादी सुविधाओं के मोहताज जिले के आंगनबाड़ी केंद्र, बिजली, पेयजल, शौचालय सहित स्वयं के भवन की कमी से जूझ रहे केन्द्र

कोरबा । अकांक्षी जिला कोरबा में बच्चों की प्रथम पाठशाला कहे जानी वाली आंगनबाड़ी केंद्र बुनियादी सुविधाओं की मोहताज है। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित आंगनबाड़ी केंद्र बिजली ,पेयजल ,शौचालय सहित स्वयं के भवन की कमी से जूझ रहे हैं।सत्ता परिवर्तन के बाद अब इन आंगनबाड़ी केंद्रों को न केवल विभागीय मद वरन जिला खनिज संस्थान न्यास में उपलब्ध करोड़ों रुपए के उपलब्ध फंड से संवरने के आसार हैं। जिले में कुल 2599 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनमें 2291 आंगनबाड़ी केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों के एवं 308 आंगनबाड़ी केंद्र शहरी क्षेत्रों के हैं। कुल संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों में 2343 आंगनबाड़ी एवं 256 मिनी आंगनबाड़ी केंद्र हैं। बात करें आँगनबाड़ी के केंद्रों की मुख्य आधारभूत संरचना आंगनबाड़ी भवन की तो जिले में 1810 आंगनबाड़ी केंद्र ( 65 .83 फीसदी ) ही स्वयं के शासकीय भवन में संचालित हैं। जबकि 888 (34 .16 फीसदी ) केंद्र स्कूल भवन ,पंचायत भवन , समुदायिक भवन ,किराए के भवन एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं के घरों (किराए )में संचालित हैं। इनमें 139 केंद्र ( ग्रामीण क्षेत्र के 134 शहरी क्षेत्र के 5 केंद्र)5.34 फीसदी केंद्र स्कूल भवन में संचालित हैं। पंचायत भवन में ग्रामीण क्षेत्र के 25 (0.96 फीसदी )केंद्र संचालित हो रहे। बात करें सामुदायिक भवन की तो यहां भी 87 (3.34 फीसदी) केंद्र संचालित हो रहे इनमें ग्रामीण क्षेत्र के 74 एवं शहरी क्षेत्र के 13 केंद्र शामिल हैं। केंद्रों के संचालन के लिए भवन किराए तक में लेना पड़ रहा ,इनमें 303 (11.65 फीसदी ) किराए के भवन में संचालित हैं। इनमें ग्रामीण क्षेत्रों के 151 अर्द्ध पक्का,88 पक्के भवन तो शहरी क्षेत्रों के 17 पक्के मकान शामिल हैं। सबसे ज्यादा किराए के भवन आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिकाओं के घरों में संचालित हैं। जिले में कुल 334 केंद्र (12.85 फीसदी ) कार्यकर्ता सहायिकाओं के घरों में संचालित हो रहे ,इनमें ग्रामीण क्षेत्र के 164 अर्द्ध पक्का एवं 153 केंद्र पक्के मकान हैं तो वहीं शहरी क्षेत्र के 17 मकान शामिल हैं। जिसके लिए एक बड़ी राशि प्रतिवर्ष किराए के रूप में शासन को अदायगी करना पड़ रहा। आंगनबाड़ी केंद्रों में सबसे निराशाजनक स्थिति विद्युतीकरण की है। जिले के 2599 आंगनबाड़ी केंद्रों में से महज 494 (19 .01फीसदी)ही विद्युतीकृत हैं। जबकि 2105 (80.99फीसदी केंद्र अंधेरे में हैं। इन केंद्रों को विद्युतीकृत नहीं किया जा सका।अविद्युतीकृत केंद्रों में ग्रामीण क्षेत्र के 1847 केंद्र तो शहरी क्षेत्र के 303 केंद्र अविद्युतीकृत हैं। हैरान करने वाली बात तो यह है पूर्ववर्ती कांग्रेस शासनकाल में इन केंद्रों को करीब 10 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से डीएमएफ व विभागीय मद से एलईडी टीवी व वाटर प्यूरीफायर प्रदाय किए जा चुके हैं। जो आज अनुपयोगी बन भ्रष्टाचार की कहानी स्वत: बयां कर रहे। जिले में संचालित 936 (36.1फीसदी)आंगनबाड़ी केंद्र शौचालय जैसे बुनियादी सुविधाओं से महरूम हैं। इनमें 796 ग्रामीण क्षेत्रों के तो 140 केंद्र शामिल हैं। एक तरफ प्रदेश जहां स्वच्छ भारत मिशन के नाम पर पुरुस्कृत हो रहा ,वहीं आकांक्षी जिला कोरबा में आंगनबाड़ी केंद्रों की यह स्थिति अत्यंत निराशाजनक है।

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