बुद्धि-बल और परंपरा का मिलन , बिलासपुर में धूमधाम के साथ 10…- भारत संपर्क

शशि मिश्रा

बिलासपुर, 27 अगस्त 2025: बुद्धि के देवता भगवान गणेश की प्रथम आराध्या के रूप में मान्यता वाले इस पावन त्यौहार का दस दिवसीय महोत्सव बुधवार (27 अगस्त) को बड़े श्रद्धा-भक्ति के साथ आरंभ हो गया। रायपुर के बाद छत्तीसगढ़ में बिलासपुर भी गणेश उत्सव की व्याकुल तैयारियों और भव्य आयोजनों के लिए जाना जाता है। शहर के छोटे-बड़े सैकड़ों सार्वजनिक पंडालों और घरों में कलात्मक पंडाल, आकर्षक सजावट और विशाल प्रतिमाओं के बीच भक्तों ने स्वागत किया।

शहर के अनेक स्थानों पर कलाकारों और मूर्तिकारों द्वारा निर्मित प्रतिमाओं की आवाजाही बुधवार को दिनभर जारी रही। कई पंडालों में सजावट शाम तक भी चलती रही, जिससे कुछ सार्वजनिक आयोजनों में पूजा-आराधना तत्काल आरंभ न हो सकी; वहीं अनेक परिवारों ने सुबह ही गणेश स्थापना कर घर पर आराधना पूरी कर ली। विशेष रूप से दक्षिण भारतीय परिवारों ने शाम को पारंपरिक रीति-रिवाज़ के साथ तोरवा छठ घाट पहुंच कर एक दिन के गणेश की आरती और पूजन के बाद अरपा नदी में प्रतिमाओं का विसर्जन किया — जिसके मद्देनज़र घाट पर प्रकाश-व्यवस्था का विशेष इंतज़ाम किया गया था।

त्योहार का शुभयोग — चित्रा नक्षत्र, बुध का बुधवार तथा भाद्रपद मास की चतुर्थी — सभी का संयोजन 27 अगस्त को मिला है। इस दिन प्रीति, सर्वार्थ सिद्धि, रवि के साथ इंद्र-ब्रह्मा योग का संयोग बन रहा है। बुधवार के इस महासंयोग के कारण पूरे दिन गणपति स्थापना की जा सकती है। कर्क राशि में बुध और शुक्र के होने से लक्ष्मी–नारायण योग बन रहा है, और चंद्रमा कन्या राशि में होने के कारण भद्रा का प्रतिकूल प्रभाव भी नहीं माना जा रहा है।
विवरण के तौर पर इस बार स्थापना के कुछ प्रमुख मुहूर्त और लग्न-समय इस प्रकार बताए गए हैं — सिंह लग्न में सुबह 7:15 बजे तक, वृश्चिक लग्न में सुबह 11:37 से दोपहर 1:52 बजे तक, कुंभ लग्न में शाम 5:46 से 7:21 बजे तक तथा वृषभ लग्न में रात 10:35 से 12:34 बजे तक गणपति स्थापना की जा सकती है। उल्लेखनीय है कि ब्रह्म मुहूर्त से लेकर आधी रात 12:34 बजे तक भक्त गणपति की स्थापना कर अराधना कर सकते हैं।
शहर के प्रमुख आयोजनों में रेलवे कंस्ट्रक्शन कॉलोनी स्थित सुमुख गणेश मंदिर का खास स्थान है — वहां इस बार 5 दिवसीय आयोजन रखा गया है। सुमुख गणेश मंदिर में 27 अगस्त को सुबह 5:30 से 6:30 बजे तक गणपति स्थापना होगी; तत्पश्चात् सुबह 7:00 से 9:30 बजे तक अभिषेक, सहस्रनाम अर्चन, महादेव आराधना और विधि-विधान से पूजा-अर्चना का कार्यक्रम रहेगा। महोत्सव के समापन पर 31 अगस्त की शाम 7:30 बजे रथयात्रा निकाले जाने की भी योजना है।

तिलक नगर स्थित श्रीराम मंदिर में भी परंपरा के अनुरूप कार्यक्रम चल रहे हैं। रेलवे महाराष्ट्र मंडल के कार्यकारी अध्यक्ष गजानन फड़के ने बताया कि वर्ष 1930 में तिलक नगर श्रीराम मंदिर और 1942 से रेलवे महाराष्ट्र मंडल के जरिए यहां गणेशोत्सव मनाने की परंपरा चली आ रही है। उस समय ब्रिटिश शासन के दौर में सामूहिक सांस्कृतिक आयोजनों पर रोकें थीं — तब भी लोगों ने मिलकर सांस्कृतिक एकता और देशभक्ति की भावना जगाने के लिए गणेश समारोहों का सहारा लिया; आज ये परंपरा 83वें वर्ष में भी जीवित है। फड़के ने कहा कि बप्पा के साथ बाल गंगाधर तिलक की भी विशेष पूजा-अर्चना इस वर्ष की झलकियों में शामिल होगी।
त्योहार के दौरान शहर में सुरक्षा, विद्युत व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण पर भी ध्यान दिया गया है — विशेषकर सार्वजनिक विसर्जन स्थलों पर। इसी कड़ी में छठ घाट पर प्रकाश व सुरक्षात्मक इंतज़ाम कर प्रतिमाओं के सुरक्षित विसर्जन और भक्तों की सुविधा सुनिश्चित की गई।

गणेश उत्सव केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है; यह सामाजिक संबंधों, सांस्कृतिक धरोहर और स्थानीय कलाकारों के समर्थन का भी पर्व है। मूर्तिकारों से प्रतिमाएं ले जाने, पंडाल निर्माण और भजन–कीर्तन के कार्यक्रमों ने शहर में उत्सव का रौनक सोमवार से बढ़ाई है और गुरुवार से यह रौनक और भी बढ़ती जाएगी — क्योंकि अगले दस दिनों तक विधि-विधान के साथ भगवान गणेश की उपासना, लड्डू-मोंदक जैसे भोगों का समर्पण और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां जारी रहेंगी।

इस पावन अवसर पर बिलासपुर के मंदिरों, सार्वजनिक पंडालों और घरों में भक्तों की श्रद्धा-भावना स्पष्ट दिखाई दी; स्थानीय परंपराओं और आधुनिक आयोजनों का संगम इस बार भी गणेशोत्सव को जीवंत बनाए रखेगा। भगवान गणेश की स्थापना से लेकर विसर्जन तक का यह दस दिवसीय पर्व समाज में भक्ति, सौहार्द और संस्कृति का उत्सव बना रहेगा।