भारत-कनाडा रिश्तों में नई शुरुआत, दोनों देशों ने बहाल किए उच्चायुक्त – भारत संपर्क

भारत और कनाडा ने एक साथ अपने-अपने नए उच्चायुक्तों की नियुक्ति का ऐलान कर रिश्तों में नई शुरुआत का संकेत दिए हैं. हाल के सालों में खालिस्तान विवाद और राजनीतिक तनाव के चलते ठंडे पड़े संबंध अब धीरे-धीरे पटरी पर लौटते दिख रहे हैं.
राजनयिकों की यह नियुक्ति सिर्फ औपचारिक बदलाव नहीं, बल्कि इस बात का संकेत है कि भारत और कनाडा रिश्तों में आई दरार को पीछे छोड़कर नई साझेदारी की ओर बढ़ना चाहते हैं. ट्रूडो युग की छाया धीरे-धीरे हट रही है और दोनों देश अब व्यवहारिकता और साझा हितों के आधार पर आगे बढ़ते दिख रहे हैं.
Today, Canada and India appointed new envoys. H.E. Chris Cooter will serve as High Commissioner to India and H.E. Dinesh K. Patnaik has been appointed as the next High Commissioner of India to Canada. This is an important development in growing our economic relationship. pic.twitter.com/ICBC1vZ7nc
— Canada-India Business Council (@CanadaIndiaBiz) August 28, 2025
रिश्तों की बहाली की दिशा में बड़ा कदम
असल में दोनों देशों के बीच राजनयिक संवाद कई बार टूटने की कगार तक पहुंच गए थे. 2023 में कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने खालिस्तानी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आरोप भारत पर लगाया था.
- भारत ने कड़े कदम उठाते हुए कनाडाई राजनयिकों को निष्कासित किया और वीजा सेवाएं तक रोक दीं.
- द्विपक्षीय व्यापार और छात्र वीज़ा जैसे अहम क्षेत्रों पर भी इसका असर पड़ा.
लेकिन ट्रूडो के सत्ता से हटने और मार्क कार्नी के प्रधानमंत्री बनने के बाद हालात बदलने शुरू हुए. जी7 शिखर सम्मेलन (जून 2024) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कार्नी की मुलाकात में यह ठहराव तोड़ने और रिश्तों को फिर से बनाने पर सहमति बनी थी.
भारत का नजरिया
भारत ने साफ संदेश दिया है कि वह कनाडा के साथ रिश्तों को सामान्य करना चाहता है, लेकिन खालिस्तानी गतिविधियों पर कोई समझौता नहीं होगा. नई नियुक्ति इस बात का संकेत है कि दिल्ली अब ओटावा के साथ संवाद बहाल करने को तैयार है.
कनाडा का दृष्टिकोण
कनाडा के लिए भारत सिर्फ एक रणनीतिक साझेदार नहीं बल्कि उसके सबसे बड़े प्रवासी समुदाय का घर भी है. भारतीय छात्रों और पेशेवरों की बढ़ती संख्या कनाडा की अर्थव्यवस्था और समाज का अहम हिस्सा है. कार्नी सरकार इस नाराजगी को दूर कर रिश्तों को सुधारना चाहती है.
बदलता भू-राजनीतिक परिदृश्य
भारत और कनाडा दोनों की ज़रूरतें भी इस ‘रीसेट’ को मजबूर कर रही हैं. भारत उत्तरी अमेरिका में अपने आर्थिक और तकनीकी सहयोग को मजबूत करना चाहता है. कनाडा, अमेरिका और पश्चिमी साझेदारों के साथ तालमेल रखते हुए भारत को नजरअंदाज नहीं कर सकता. शिक्षा, निवेश और आपसी व्यापार, दोनों देशों के लिए बड़े अवसर पैदा कर सकते हैं.
रिश्तों की टाइमलाइन
- 2018 ट्रूडो का भारत दौरा विवादों में, खालिस्तान मुद्दे पर असहमति.
- 2020 किसान आंदोलन पर ट्रूडो की टिप्पणी से रिश्तों में कड़वाहट.
- 2023 निज्जर हत्या मामला; ट्रूडो के आरोपों से रिश्ते सबसे निचले स्तर पर.
- 2024 मोदीकार्नी मुलाकात, रिश्तों को पटरी पर लाने का संकल्प.
- 2025 भारत और कनाडा ने एक साथ उच्चायुक्तों की बहाली की घोषणा की