रेलवे ठेका कर्मचारी की मौत के बाद हंगामा , परिजनों ने…- भारत संपर्क

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रेलवे ठेका कर्मचारी की मौत के बाद हंगामा , परिजनों ने…- भारत संपर्क

बिलासपुर। रेलवे में कार्यरत ठेका कर्मचारी प्रताप बर्मन की मौत के बाद शुक्रवार को परिजनों ने डीआरएम कार्यालय के सामने दिनभर धरना दिया। परिजनों के समर्थन में भीम आर्मी के सदस्य भी पहुंचे। मृतक के लिए न्याय और उचित मुआवजे की मांग को लेकर प्रदर्शन देर रात तक जारी रहा।

सुबह से धरने पर डटे रहे परिजन

प्रताप बर्मन की मौत गुरुवार को ओएचई तार की चपेट में आने से हो गई थी। इस हादसे के बाद आक्रोशित परिजन और समर्थक शुक्रवार सुबह से ही डीआरएम कार्यालय के बाहर एकत्रित होकर नारेबाजी करने लगे। परिजन ने मृतक की तस्वीर के साथ धरना स्थल पर बैठकर जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार पर कार्रवाई की मांग की।

शाम को पहुंचे अफसर, सवा घंटे चली बातचीत

दिनभर के इंतजार के बाद शाम 5 बजकर 56 मिनट पर जिला प्रशासन, रेलवे और पुलिस के अफसर धरना स्थल पहुंचे। एडीएम शिवकुमार बनर्जी ने मृतक के परिजन से बातचीत की और घटना पर खेद जताया। उन्होंने शव को गांव तक पहुंचाने और आर्थिक सहायता की घोषणा की। बातचीत करीब 1 घंटे 13 मिनट तक चली।

अधिकारियों ने परिजनों को रेलवे की ओर से 16 लाख रुपये और राज्य सरकार की ओर से 5 लाख रुपये, कुल 21 लाख रुपये मुआवजे की पेशकश की। लेकिन मृतक की पत्नी खुशबू बर्मन (22) ने इसे ठुकरा दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पति की मौत रेलवे और ठेकेदार की लापरवाही से हुई है, इसलिए परिवार को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा और सरकारी नौकरी दी जाए।

परिजनों ने लौटाया प्रस्ताव

जैसे ही अधिकारियों ने मुआवजा और नौकरी की मांग न मानने की बात कही, मृतक के बड़े भाई पंकज बर्मन ने प्रताप की तस्वीर दिखाते हुए अफसरों से वापस लौट जाने को कहा। इसके बाद परिजन और भीम आर्मी के सदस्य अपनी मांगों पर अड़े रहे।

भीम आर्मी ने लगाया गंभीर आरोप

प्रदर्शन के दौरान भीम आर्मी के पदाधिकारियों ने रेलवे अधिकारियों पर हाईकोर्ट को गुमराह करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि प्रताप की मौत सुबह 9:30 बजे हो गई थी, लेकिन रेलवे के अफसर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में इस तथ्य को छिपाते रहे। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि प्रताप बिना टोकन ट्रेन पर चढ़ा था, जबकि यह पूरी तरह गलत है।

मृतक की पत्नी का दर्द

बातचीत के दौरान खुशबू बर्मन ने भावुक होकर कहा कि परिवार में उनके पति और जेठ ही कमाने वाले थे। अब पूरे परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई है, ऐसे में नौकरी उनके लिए जरूरी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि धरना स्थल पर बैठी महिलाओं को रेलवे ने अपने कार्यालय का बाथरूम तक उपयोग करने नहीं दिया।

शव रखने की कोशिश, पुलिस ने रोका

भीम आर्मी ने प्रदर्शन के दौरान मृतक का शव डीआरएम कार्यालय के सामने रखने की योजना बनाई थी। लेकिन पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने परिजनों से शव सीधे गांव ले जाने की बात कही। इसके बाद परिजन अर्थी पर प्रताप की तस्वीर रखकर प्रदर्शन स्थल पहुंचे।

डीआरएम कार्यालय बना छावनी

प्रदर्शन की सूचना पर प्रशासन और पुलिस ने डीआरएम कार्यालय को छावनी में तब्दील कर दिया। मौके पर एडिशनल एसपी, सीएसपी कोतवाली, सिविल लाइन, मस्तूरी और कोटा एसडीओपी सहित दर्जनभर थाना प्रभारी तैनात रहे।

मांगें बरकरार

परिजन और भीम आर्मी के सदस्य 1 करोड़ मुआवजा, सरकारी नौकरी, मृतक के बच्चे की पढ़ाई की जिम्मेदारी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग पर डटे रहे। देर रात तक कोई समाधान नहीं निकल सका।


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