1980 और 90 के दशक में पंजाब की मिट्टी से एक ऐसा ही फनकार उभरा था, जिसकी बुलंद, ऊंची और दर्द में डूबी आवाज ने लोक संगीत को एक अलग पहचान दिलाई थी। मंच पर जब वह गाता था, तो सामने बैठा हर शख्स उनके सुरों में खो जाता था। उनका संगीत महज मनोरंजन नहीं था, उसमें पंजाब का सांस्कृतिक गौरव, भावनाओं की गहराई और मिट्टी की खुशबू महसूस होती थी।
AK-47 से ली गई थी 29 साल के पंजाबी सिंगर की जान, पुलिस अधिकारी ने ही मारी थी गोली
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