CG Foundation Day: 11 सीटों के वादे पर बना था छत्तीसगढ़, 26 साल बाद भी जनता निभा रही ‘अटल’ से किया वादा
26 साल में छत्तीसगढ़ की सियासत ने ऐसे बदली तस्वीर HighLights
- 26 साल बाद भी कायम है अटलजी से किया वादा
- राज्य गठन से पहले भाजपा को मिली थीं 10 सीटें
- चार मुख्यमंत्रियों की चार योजनाएं बनीं पहचान
राज्य ब्यूरो, , रायपुर। छत्तीसगढ़ के सियासी इतिहास (CG Foundation Day 2026) में भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का नाम आज भी बेहद अहमियत रखता है। जनता ने उनसे जो सियासी वादा किया था, उसकी गूंज आज 26 साल बाद भी लोकसभा चुनावों में सुनाई देती है। अटलजी के उस वादे के साथ-साथ प्रदेश के चार मुख्यमंत्रियों की लोक-कल्याणकारी योजनाओं ने भी जनता के दिलों में अपनी अलग जगह बनाई है।
लोकसभा चुनावों में बरकरार है अटलजी से किया वादा
राज्य बनने से पहले ही छत्तीसगढ़ ने भाजपा पर भरोसा जताना शुरू कर दिया था। अविभाजित मध्यप्रदेश के समय छत्तीसगढ़ क्षेत्र से भाजपा को 10 लोकसभा सांसद मिले थे। यह सिलसिला राज्य बनने के बाद भी जारी रहा।
2004 के लोकसभा चुनाव में प्रदेश की कुल 11 सीटों में से भाजपा ने 10 और कांग्रेस ने 1 सीट जीती। 2009 और 2014 में भी नतीजे ऐसे ही रहे। 2019 में भाजपा को 9 और कांग्रेस को 2 सीटें मिलीं। वहीं 2024 के चुनाव में फिर भाजपा ने 10 और कांग्रेस ने 1 सीट पर जीत दर्ज की।
सप्रे शाला मैदान में हुआ था ऐतिहासिक ऐलान
भाजपा नेता और लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सच्चिदानंद उपासने बताते हैं कि अविभाजित मध्यप्रदेश के दौर में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का दबदबा था। राम मंदिर आंदोलन के बाद सियासी माहौल बदला।
इसी बीच 1998-99 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने रायपुर के सप्रे शाला मैदान में एक बड़ी जनसभा की थी। इस जनसभा में अटलजी ने जनता से छत्तीसगढ़ की सभी 11 लोकसभा सीटें भाजपा को देने की अपील की थी और बदले में अलग छत्तीसगढ़ राज्य बनाने का वादा किया था।
छत्तीसगढ़ की जनता ने भाजपा को 10 सीटें दीं। 1999 में केंद्र में सरकार बनने के बाद अटलजी ने अपना वादा पूरा किया। अगस्त 2000 में अलग राज्य गठन का प्रस्ताव पास हुआ और नवंबर 2000 में छत्तीसगढ़ नया राज्य बनकर अस्तित्व में आया। उसके बाद से केंद्र में किसी भी दल की सरकार रही हो, छत्तीसगढ़ के वोटरों ने अटलजी से किया हुआ वादा निभाया है।
मुख्यमंत्रियों की योजनाएं बनीं पहचान
राज्य गठन के बाद से अब तक चार मुख्यमंत्रियों का कार्यकाल रहा है और हर मुख्यमंत्री की कोई न कोई योजना उसकी पहचान बन गई।
पहले मुख्यमंत्री की जोगी डबरी
प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री स्व. अजीत जोगी का कार्यकाल 2000 से 2003 तक रहा। उनके समय में प्रदेश में पानी की भारी कमी थी। इससे निपटने के लिए गांवों में छोटे गड्ढे और तालाब खोदने का अभियान चलाया गया। इसे ही जोगी डबरी कहा गया। इस पहल ने भूजल स्तर को सुधारने में मदद की और अकाल के समय लोगों को रोजगार भी मिला।
15 साल तक चाउर वाले बाबा
2003 से 2018 तक 15 साल तक मुख्यमंत्री रहे डॉ. रमन सिंह की पहचान पीडीएस योजना से बनी। उनकी सरकार ने गरीबों को 1 और 2 रुपये किलो में चावल देना शुरू किया। इस वजह से वे पूरे प्रदेश में चाउर वाले बाबा के नाम से मशहूर हो गए।
भूपेश बघेल का गोबर मॉडल
2018 से 2023 तक मुख्यमंत्री रहे भूपेश बघेल ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर फोकस किया। उनकी सबसे चर्चित योजना गोधन न्याय योजना रही। इसके तहत सरकार ने 2 रुपये किलो की दर से गोबर खरीदना शुरू किया। गोबर से बने वर्मीकंपोस्ट, दीये, पेंट और विधानसभा में पेश किया गया गोबर का ब्रीफकेस काफी चर्चा में रहा। बाद में उनकी सरकार ने गोमूत्र की खरीदी भी शुरू की थी।
विष्णु देव साय का महतारी वंदन
दिसंबर 2023 में मुख्यमंत्री बने विष्णु देव साय ने महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन को सबसे ज्यादा महत्व दिया। उनकी सरकार ने मार्च 2024 में महतारी वंदन योजना शुरू की। इस योजना के तहत पात्र विवाहित महिलाओं के बैंक खातों में हर महीने 1000 रुपये यानी साल में 12,000 रुपये भेजे जा रहे हैं। इस समय इस योजना का लाभ प्रदेश की 70 लाख महिलाएं उठा रही हैं।
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