CG-MP के रेल यात्रियों को बड़ी राहत… बिलासपुर-कटनी पर बिछेगी नई पटरियां, यात्री और मालगाड़ियों की रफ्तार में होगा इजाफा
बिलासपुर-कटनी पर बिछेगी नई पटरियां, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के रेल यात्रियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। उत्तर भारत की ओर जाने वाले इस व्यस्त रेल मार्ग पर अब ट्रेनों की रफ्तार और संचालन क्षमता बढ़ाने की तैयारी शुरू हो गई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की दो महत्वपूर्ण मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें कटनी-पेंड्रारोड चौथी लाइन और बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रारोड तीसरी लाइन शामिल हैं।
परियोजनाओं के पूरा होने से इस महत्वपूर्ण रेल मार्ग की क्षमता में बड़ा इजाफा होगा। ट्रेनों के संचालन में सुगमता आने के साथ यात्री और माल परिवहन भी तेज होगा। अतिरिक्त रेल लाइन से भविष्य में नई ट्रेनों के संचालन की संभावनाएं बढ़ेंगी और छत्तीसगढ़-मध्य प्रदेश से उत्तर भारत की कनेक्टिविटी और मजबूत होगी। इन मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं का सीधा लाभ छत्तीसगढ़ के बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग, रायगढ़ सहित अनेक प्रमुख शहरों तथा मध्य प्रदेश के अनूपपुर, शहडोल आदि क्षेत्रों को मिलेगा।
परियोजनाएं एक नजर में: आंकड़े और मुख्य बिंदु
कटनी–पेंड्रारोड चौथी लाइन
- दूरी: 201 किलोमीटर
- लागत: 2,975 करोड़ रुपये
- लॉजिस्टिक्स लागत बचत: 322 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष
- कार्बन उत्सर्जन में कमी: 14.42 करोड़ किलोग्राम
उसलापुर–पेंड्रारोड तीसरी लाइन
- दूरी: 87 किलोमीटर
- लागत: 1,279 करोड़ रुपये
- लॉजिस्टिक्स लागत बचत: 96.2 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष
- कार्बन उत्सर्जन में कमी: 4.3 करोड़ किलोग्राम
नई रेल लाइन से पर्यटन स्थलों तक पहुंच होगी आसान
रेल लाइन के विस्तार से छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच और आसान होने की उम्मीद है। कटनी-पेंड्रा रोड रेलखंड में अतिरिक्त लाइन बनने से अमरकंटक और बांधवगढ़ जैसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों के लिए रेल कनेक्टिविटी को और मजबूती मिलेगी। बेहतर रेल सुविधा से देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले पर्यटकों के लिए इन क्षेत्रों तक पहुंचना अधिक सुविधाजनक होगा।
इससे पर्यटन गतिविधियों में बढ़ोतरी के साथ स्थानीय होटल, परिवहन, खान-पान और छोटे व्यवसायों को भी लाभ मिलने की संभावना है। रेल संपर्क मजबूत होने से क्षेत्र के प्राकृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों को नई पहचान मिलने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।
खड़गपुर-झारसुगुड़ा (बागदेही) चौथी लाइन को भी स्वीकृति
केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने जोन की दोनों परियोजनाओं के अलावा खड़गपुर-झारसुगुड़ा (बागदेही) चौथी लाइन को मंजूरी दी है। पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों के 14 जिलों को कवर करने वाली इन तीन परियोजनाओं से भारतीय रेलवे के वर्तमान नेटवर्क में लगभग 656 किलोमीटर की वृद्धि होगी।
प्रस्तावित मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं से लगभग 4,790 गांवों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी, जिनकी आबादी लगभग 56 लाख है। इन परियोजनाओं की अनुमानित लागत 10,783 करोड़ रुपये है। इन्हें वर्ष 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
प्रोजेक्ट आंकड़े
- 288 किमी: दोनों परियोजनाओं (कटनी-पेंड्रारोड एवं उसलापुर-पेंड्रारोड) की कुल लंबाई
- 4,254 करोड़ रुपये: कुल निर्माण खर्च
- 04 साल: काम पूरा करने की निर्धारित समय-सीमा
20 किमी का घाट सेक्शन बनेगा सबसे बड़ी चुनौती
बिलासपुर-पेंड्रारोड-कटनी रेलखंड में नई लाइन बिछाने की राह आसान नहीं होगी। परियोजना के एक हिस्से में करीब 20 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र ऐसा है, जहां पहाड़, गहरी घाटियां और घने जंगल निर्माण कार्य की सबसे बड़ी चुनौती बनेंगे।
मौजूदा रेल लाइन भी कई जगह बेहद घुमावदार है। खासकर खोडरी-भनवारटंक-खोंगसरा सेक्शन में कठिन घाट क्षेत्र होने के कारण नई लाइन बिछाने के लिए रेलवे को विशेष तकनीकी तैयारी करनी होगी। इस हिस्से में सुरंग निर्माण के साथ घुमावदार ट्रैक तैयार करना पड़ेगा।
परियोजनाओं से होंगे ये बड़े फायदे
- दिल्ली, पश्चिम उत्तर प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, राजस्थान जैसे प्रमुख शहरों के ताप संयंत्रों तक पहले तेजी से कोयला पहुंचेगा।
- नई ट्रेनों के परिचालन का रास्ता खुलेगा।
- लाइन की कमी के कारण नहीं थमेंगे ट्रेनों के पहिए।
- ट्रेनों की गतिशीलता बढ़ेगी।
- माल परिवहन की क्षमता में वृद्धि होगी।
- छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के विभिन्न शहरों से उत्तर भारत के बीच संपर्क और मजबूत होगा।
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