Chandipura virus outbreak in Gujarat, चांदीपुरा वायरस क्या है

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Chandipura virus outbreak in Gujarat, चांदीपुरा वायरस क्या है

चांदीपुरा वायरस के लक्षण बहुत तेज़ी से दिखाई देते हैं, और यह मुख्य रूप से कुछ क्षेत्रों में बच्चों को प्रभावित करता है। यह बीमारी संक्रामक नहीं है, जिसका मतलब है ये एक से दूसरे को नहीं होती है।

गुजरात के अरावली जिले में मात्र पांच दिनों में छह बच्चों की दुखद मौत के बाद स्थानीय समुदाय में दहशत की लहर दौड़ गई। स्वास्थ्य अधिकारियों को संदेह है कि इन दुखद मौतों के पीछे चांदीपुरा वायरस (chandipura virus) का हाथ हो सकता है। गुजरात में संदिग्ध चांदीपुरा वायरस (chandipura virus case in gujarat) के मामलों की कुल संख्या अब बढ़कर 12 हो गई है, जिसके कारण स्वास्थ्य अधिकारियों और राज्य सरकार को तत्काल हस्तक्षेप करना पड़ा है। गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री रुशिकेश पटेल ने मौतों की पुष्टि की है, जिनमें से पांच मौतें साबरकांठा जिले के एक अस्पताल में हुईं। उन्होंने कहा कि साबरकांठा से लिए गए आठ सेंपल सहित 12 सेंपलों को अंतिम जांच के लिए पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरलॉजी भेजा गया है।

क्या है चांदीपुरा वायरस (what is chandipura virus)

चांदीपुरा वेसिकुलोवायरस (CHPV) के नाम से भी जाना जाने वाला चांदीपुरा वायरस एक RNA वायरस है जो रैबडोविरिडे फैमिली से संबंधित है। इस वायरस का पहला मामला 1965 में महाराष्ट्र के चांदीपुरा गांव में पाया गया था, इसलिए इसे ‘चांदीपुरा वायरस’ कहा जाता है। यह वायरस मुख्य रूप से 9 महीने से 14 साल की उम्र के बच्चों को प्रभावित करने के लिए जाना जाता है, और देश में तीव्र इंसेफेलाइटिस के खतरे का कारण है।

इस बारे में ज्यादा जानकारी के लिए हमने बात की डॉ. लक्ष्मण जेसानी से,  डॉ. लक्ष्मण जेसानी  अपोलो हॉस्पिटल्स नवी मुंबई में संक्रामक रोग विशेषज्ञ है।

डॉ. लक्ष्मण जेसानी बताती है कि इस वायरस के लक्षण बहुत तेज़ी से दिखाई देते हैं, और यह मुख्य रूप से कुछ क्षेत्रों में बच्चों को प्रभावित करता है। यह बीमारी संक्रामक नहीं है, जिसका मतलब है ये एक से दूसरे को नहीं होती है।

यह मुख्य रूप से कुछ क्षेत्रों में बच्चों को प्रभावित करता है। चित्र : शटरस्टॉक

चांदीपुरा वायरस संक्रमण के लक्षण (Symptoms of chandipura virus)

1 बुखार– अचानक तेज बुखार आना हो सकता है जिसके कारण शरीर तपने लग सकता है। ये बुखार कई बार सामान्य लग सकता है लेकिन ये चांदीपुरा वायरस का संकेत हो सकता है।

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2 सिरदर्द– अगर आप या आपका बच्चा इस समस्या से संक्रमित होता है तो गंभीर सिरदर्द आम है। इस वायरस के संक्रमण होने के बाद बच्चों या जो भी इससे संक्रमित हुआ है उसे तेज सिरदर्द का अनुभव हो सकता है।

3 उल्टी– इसके एक लक्षणों में ये चीज भी है कि आपको बार-बार उल्टी हो सकती है। उल्टी के कारण आपको डिहाइड्रेशन के साथ साथ कमजोरी महसूस हो सकती है।

4 शरीर में दर्द और कैंप– इस संक्रमण के प्रमुख लक्षणों में ये चीज भी है कि आपको शरीर में तेज दर्द और कैंप का अनुभव हो सकता है। लक्षण अगर ज्यादा गंभीर होते है तो आपको दौरा भी आ सकता है।

5 मानसिक स्थिति में बदलाव– कंफ्यूजन, चिड़चिड़ापन और चेतना में बदलाव जिससे आपकी मानसिक स्थिति प्रभावित होती है इसी समस्या के लक्षण हो सकते है।

6 कोमा– गंभीर मामलों में, संक्रमण कोमा और मृत्यु का कारण बन सकता है।

कैसे फैलता है चांदीपुरा वायरस (How chandipura virus spread)

डॉ. लक्ष्मण जेसानी बताती है कि चांदीपुरा वायरस मुख्य रूप से संक्रमित सैंडफ्लाई के काटने से फैलता है, विशेष रूप से फ्लेबोटोमस प्रजाति से। संक्रमण के सटीक तरीके पूरी तरह से सामने नहीं आए है। वायरस के संक्रमण का मुख्य तरीका सैंडफ्लाई और मच्छर के काटने से होता है। इसका आउटब्रेक कुछ खास पर्यावरणीय परिस्थितियों से जुड़े हुए हैं जो सैंडफ्लाई के प्रजनन के लिए अनुकूल हैं।

संक्रमण के अन्य संभावित तरीके, हालांकि कम आम हैं, में संक्रमित व्यक्ति या जानवर के शारीरिक तरल पदार्थ के संपर्क में आना शामिल है।

ab 12 sal se chhote bachcho ko bhi vaccine di ja sakti hai
इस संक्रमण के प्रमुख लक्षणों में ये चीज भी है कि आपको शरीर में तेज दर्द और कैंप का अनुभव हो सकता है। चित्र: शटरस्टॉक

चांदीपुरा वायरस से कैसे करें बचाव

1 कीट निरोधक– सैंडफ्लाई को दूर रखने के लिए खुली त्वचा पर कीट निरोधक का उपयोग करें। इसके लिए कोई भी ऐसी क्रीम लगाएं जो कीड़ों या मच्छरों के काटने से बचाती है।

2 सुरक्षात्मक कपड़े– लंबी आस्तीन वाली शर्ट और लंबी पैंट पहनें, खासकर उन क्षेत्रों में जहां सैंडफ्लाई होने की संभावना है।

3 मच्छर दानी लगाकर सोना– रात के समय सैंडफ्लाई के काटने से बचने के लिए कीटनाशक दवा में धुली हुई मच्छरदानी का उपयोग करें।

4 पर्यावरण नियंत्रण– रूके हुए पानी को खत्म करके और रहने वाले क्षेत्रों में सफाई बनाए रखकर सैंडफ्लाई के प्रजनन स्थलों को कम करना।

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