
बिलासपुर. हरियाणा से खरीदी गई बलेनो कार के अस्थायी और स्थायी पंजीयन नंबर अलग होने के चलते ट्रायल कोर्ट से वाहन वापस लेने में असफल रहे मालिक को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से राहत मिल गई है. हाई कोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को निरस्त करते हुए कार उसके मालिक सुमित कुमार को सौंपने का निर्देश दिया है.
मामले की सुनवाई जस्टिस पार्थ प्रीतम साहू की अदालत में हुई. कोर्ट ने वाहन को छह लाख रुपये के निजी बांड और समान राशि की सक्षम जमानत की शर्त पर सुपुर्द करने का आदेश दिया है.
हरियाणा में खरीदी थी कार
सुमित कुमार ने हरियाणा में बलेनो कार खरीदी थी. वाहन की डिलीवरी के समय उसे अस्थायी पंजीयन नंबर टी-1125-एचआर-5651-डीबी मिला था. इसके बाद संबंधित पंजीयन प्राधिकारी ने इसी वाहन के लिए स्थायी पंजीयन नंबर एचआर-12-एवाई-4753 जारी किया.
कार पर स्थायी नंबर की हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट लगने में कुछ समय लगना था. इसी अवधि में सुमित का दोस्त कार लेकर अंबिकापुर की ओर जा रहा था. रास्ते में पुलिस ने एक आपराधिक मामले की जांच के दौरान वाहन को जब्त कर लिया.
नंबर अलग होने पर ट्रायल कोर्ट ने नहीं दी थी कार
वाहन जब्त होने के बाद सुमित कुमार ने उसे सुपुर्दनामा पर वापस लेने के लिए ट्रायल कोर्ट में आवेदन लगाया. इसके साथ स्थायी पंजीयन से जुड़े दस्तावेज भी पेश किए गए.
हालांकि, 15 अप्रैल 2026 को सप्तम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, अंबिकापुर ने आवेदन खारिज कर दिया. अदालत के समक्ष वाहन पर दर्ज अस्थायी नंबर और स्थायी पंजीयन प्रमाणपत्र में मौजूद नंबर अलग पाए गए थे. इसी अंतर को वाहन सौंपने से इनकार का आधार बनाया गया.
हाई कोर्ट में दस्तावेजों के आधार पर दी गई दलील
ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुमित कुमार ने हाई कोर्ट का रुख किया. उनके अधिवक्ता अभिनव दुबे ने अदालत को बताया कि वाहन की खरीद से लेकर अस्थायी और स्थायी पंजीयन तक के दस्तावेज उपलब्ध हैं. ऐसे में केवल दोनों पंजीयन नंबरों में अंतर को वाहन की पहचान या मालिकाना हक पर संदेह का आधार नहीं माना जा सकता.
हाई कोर्ट ने दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद माना कि अस्थायी पंजीयन और बाद में जारी स्थायी पंजीयन नंबर अलग होना अपने आप में वाहन की पहचान अथवा स्वामित्व पर सवाल खड़ा करने के लिए पर्याप्त नहीं है. खरीद संबंधी बिल और पंजीयन दस्तावेज वाहन तथा उसके मालिक की पहचान स्पष्ट करते हैं.
लंबे समय तक थाने में रखने पर कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने जब्त वाहनों को लंबे समय तक पुलिस थाने में रखने से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का भी उल्लेख किया. अदालत ने कहा कि खुले में लंबे समय तक खड़े रहने से जब्त वाहन खराब हो सकते हैं. पुलिस परिसर में वर्षों तक किसी वाहन को रखने से उसका व्यावहारिक लाभ भी नहीं होता.
इसी आधार पर कोर्ट ने उचित शर्तों के साथ वाहन को उसके स्वामी के हवाले करना उचित माना.
इन शर्तों के साथ मिलेगी कार
हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का 15 अप्रैल 2026 का आदेश रद्द करते हुए सुमित कुमार की बलेनो कार सुपुर्द करने का निर्देश दिया है. वाहन रिलीज करने से पहले संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा. इसके अलावा पंचनामा तैयार करने और वाहन की तस्वीरें रिकॉर्ड में सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए गए हैं.
मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 296(बी), 351(3), 115(2), 191(3), 111(2)(बी), 324(4) और आर्म्स एक्ट की धारा 25 व 27 के तहत अपराध दर्ज किया है.
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