नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुरः छत्तीसगढ़ में अपराध पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए संचालित पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब-तलब किया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल के डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान पाया कि अप्रैल 2025 से जुलाई 2026 के बीच 1099 मामलों में 37 करोड़ सात लाख 42 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति राशि फंड की उपलब्धता नहीं होने के कारण लंबित है।
राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना, 2018 के तहत राशि के आवंटन और भुगतान के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। लंबित राशि फंड उपलब्ध होते ही जल्द जारी करने का आश्वासन दिया गया। कोर्ट ने मामले की निगरानी जारी रखते हुए सक्षम अधिकारी को व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। पिछली सुनवाई में सरकार ने योजना के लिए अलग बजट हेड बनाने की जानकारी दी थी।
बताने होंगे क्या उठाए कदम
25 अगस्त के आदेश में डिवीजन बेंच ने सक्षम अधिकारी को व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल कर स्पष्ट रूप से बताने को कहा है कि 37.07 करोड़ रुपये की लंबित राशि जारी करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। अधिकारी को शेष राशि कब तक जारी कर पात्र पीड़ितों को भुगतान किया जाएगा, इसका समयबद्ध विवरण भी देना होगा।
23 सितंबर को अगली सुनवाई
कोर्ट ने मामले को पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और पीड़ितों को समय पर मुआवजा दिलाने की निगरानी के लिए 23 सितंबर 2026 को फिर सूचीबद्ध किया है।