छत्तीसगढ़ का ऐसा गांव… करोड़ों की देता है रॉयल्टी, फिर भी तिरपाल के नीचे पढ़ रहे बच्चे, SDM ने किया निरीक्षण

छत्तीसगढ़ का ऐसा गांव… करोड़ों की देता है रॉयल्टी, फिर भी तिरपाल के नीचे पढ़ रहे बच्चे
नईदुनिया प्रतिनिधि, दुर्गूकोंदल। करोड़ों रुपये की रायल्टी देने वाले ग्राम चाहचाड़ में आज भी स्कूली बच्चे जर्जर भवन और तिरपाल के सहारे पढ़ाई करने को मजबूर हैं। स्कूल भवन निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों द्वारा स्कूल में तालाबंदी एवं चक्काजाम की चेतावनी दिए जाने और मामला समाचार पत्रों में प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद प्रशासन हरकत में आया। भानुप्रतापपुर एसडीएम जीडी वाहिले, तहसीलदार दुर्गूकोंदल सुरेंद्र उर्वशा एवं नायब तहसीलदार सुमीत देवांगन ग्राम चाहचाड़ पहुंचे और ग्रामीणों की मौजूदगी में स्कूल भवन का निरीक्षण किया।
बच्चों की पढ़ाई हो रही प्रभावित
निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों ने अधिकारियों को स्कूल की जर्जर स्थिति से अवगत कराया। ग्रामीणों ने कहा कि स्कूल में पर्याप्त एवं सुरक्षित कक्ष नहीं होने के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। बारिश के मौसम में तिरपाल के नीचे बच्चों को पढ़ाने की स्थिति निर्मित हो रही है। ग्रामीणों ने खनिज संस्थान न्यास निधि से पक्का एवं पर्याप्त स्कूल भवन निर्माण के लिए राशि स्वीकृत करने की मांग एसडीएम के समक्ष रखी।
पांच बार प्रस्ताव देने के बाद भी नहीं मिली स्वीकृति: सरपंच
ग्राम पंचायत की सरपंच रमशीला कोमरा ने कहा कि स्कूल भवन निर्माण की मांग को लेकर जिला पंचायत सीईओ एवं जिला कलेक्टर को अब तक पांच बार प्रस्ताव दिया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद भवन निर्माण के लिए राशि की स्वीकृति नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि अब एसडीएम द्वारा निरीक्षण के दौरान वीबीजीरामजी योजना से अतिरिक्त कक्ष निर्माण की स्वीकृति होने की जानकारी दी गई है।
सरपंच ने कहा कि वीबीजीरामजी योजना से स्वीकृत अतिरिक्त कक्ष का निर्माण जल्द कराया जाए, लेकिन इसके साथ ही नए स्कूल भवन निर्माण की स्वीकृति भी जल्द दी जाए। केवल अतिरिक्त कक्ष से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। गांव की आवश्यकता को देखते हुए पर्याप्त और पक्का नया स्कूल भवन जरूरी है।
नए भवन के लिए प्रस्ताव भेजा गया: एसडीएम
एसडीएम जीडी वाहिले ने ग्रामीणों को बताया कि चाहचाड़ में नए स्कूल भवन निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। वहीं वीबीजीरामजी योजना के तहत अतिरिक्त कक्ष निर्माण की स्वीकृति भी मिल चुकी है। उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि पहले स्वीकृत अतिरिक्त कक्ष का निर्माण होने दें। नए भवन की स्वीकृति होने के बाद नए भवन का निर्माण भी कराया जाएगा।
ग्रामीणों ने एसडीएम के समक्ष नाराजगी जताते हुए कहा कि ग्राम चाहचाड़ खनिज प्रभावित क्षेत्र है। यहां की खदानों से शासन को करोड़ों रुपये की रायल्टी प्राप्त होती है। इसके बावजूद इसी गांव के बच्चों को स्कूल भवन जैसी मूलभूत सुविधा के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
मॉडल स्कूल की तर्ज पर विकसित करने की मांग
ग्रामीणों ने कहा कि चाहचाड़ खनिज प्रभावित गांव होने के बावजूद शिक्षा के क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। स्कूल को मॉडल स्कूल की तर्ज पर विकसित किया जाना चाहिए। खदानों से निकलने वाली संपदा से शासन को करोड़ों रुपये का राजस्व मिल रहा है, लेकिन उसी क्षेत्र के बच्चों को सुरक्षित स्कूल भवन के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द अतिरिक्त कक्ष का निर्माण शुरू कराने और नए स्कूल भवन के लिए आवश्यक राशि स्वीकृत करने की मांग की है।
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