
रायपुर. छत्तीसगढ़ में ठोस कचरा प्रबंधन व्यवस्था की वास्तविक स्थिति समीक्षा के लिए मांगी गई ऑडिट और निरीक्षण रिपोर्ट चार महीने बाद भी जमा न होने पर राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है. नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणी बोरा ने प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को पत्र जारी कर सात दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट अनिवार्य रूप से भेजने के निर्देश दिए हैं. शासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि इस कार्य में किसी भी प्रकार की शिथिलता या विलंब को गंभीरता से लिया जाएगा.
ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के तहत कलेक्टरों की बढ़ी जवाबदेही
राज्य में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रविधानों को लागू करते हुए पहली बार नगरीय निकायों में कचरा प्रबंधन की निगरानी और व्यवस्थाओं के ऑडिट का दायित्व जिला कलेक्टरों को सौंपा गया था. नए नियमों के अनुसार कचरे का स्रोत स्तर पर ही चार श्रेणियों—गीला, सूखा, सैनिटरी और विशेष देखभाल वाले अपशिष्ट—में पृथक्करण (Segregation) अनिवार्य किया गया है. इसके अलावा होटलों, अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और बड़ी आवासीय सोसायटियों जैसे ‘बल्क वेस्ट जनरेटरों’ को अपने परिसर में ही गीले कचरे के निष्पादन के लिए कंपोस्टिंग या बायोगैस जैसी सुविधाएं विकसित करना अनिवार्य है.
रिपोर्ट में इन मुख्य बिंदुओं की देनी होगी जानकारी
प्रमुख सचिव द्वारा जारी आदेश के अनुसार, कलेक्टरों को अपने-अपने जिलों के निकायों में अधोसंरचनात्मक कमियों (Gaps) का चिन्हांकन कर उनके निराकरण के लिए प्रस्ताव भेजना होगा. रिपोर्ट में मुख्य रूप से निम्नलिखित जानकारियां मांगी गई हैं:
चार श्रेणियों में अपशिष्ट संग्रहण: स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण की वर्तमान स्थिति.
बल्क वेस्ट जनरेटर: पंजीकृत संस्थानों की संख्या और नियमों के अनुपालन की रिपोर्ट.
पोर्टल पंजीयन: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के पोर्टल पर निकायों के पंजीकरण की स्थिति.
रिफ्यूज व प्रोसेसिंग यूनिट: मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) की संख्या और उनके संचालन का ब्योरा.
लीगेसी वेस्ट: पुराने डंपसाइट्स की संख्या और उनके बायो-रिमेडिएशन की प्रगति.
समयसीमा: ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के पूर्ण क्रियान्वयन के लिए प्रस्तावित कार्ययोजना.
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