छत्तीसगढ़ में 18 जिलों के 3234 गांवों में खड़ा हुआ जल संकट!, मल्टी-विलेज योजनाओं का भुगतान अटका
18 जिलों के 3234 गांवों में होनी है जलापूर्ति, सांकेतिक तस्वीरHighLights
- प्रदेश में जल जीवन मिशन की योजना अटकी
- केन्द्र और राज्य के बीच तालमेल की कमी
- 18 जिलों के 3234 गांवों में होनी है जलापूर्ति
राज्य ब्यूरो, , रायपुर। जल जीवन मिशन के तहत गांवों में घर-घर नल से पानी पहुंचाने की योजना भुगतान और सरकारी समन्वय के अभाव में प्रभावित हो रही है। मल्टी-विलेज योजनाओं के करीब 1100 करोड़ का भुगतान अटकने से निर्माण एजेंसियों के सामने काम जारी रखने का संकट खड़ा गया हो गया है।
एक साल से संचालन एवं रखरखाव (ओ एंड एम) नीति का प्रस्ताव लंबित है, जिसके अनुमोदन के बिना केंद्रीय प्रतिपूर्ति की राह अटकी हुई है। नतीजतन, कई गांवों में टंकियां और पाइपलाइन तैयार होने के बावजूद नल से जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी है।
छत्तीसगढ़ कांट्रैक्टर एसोसिएशन का दावा है कि पंचायत और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) के बीच तालमेल की कमी और केंद्र-राज्य की वित्तीय प्रक्रिया में गतिरोध इसकी प्रमुख वजह है। प्रदेश के कई जिलों में भूजल स्तर गिरने से गर्मी के दिनों में पेयजल संकट गहराता है।
इसे देखते हुए सतही जलस्रोतों पर आधारित 71 मल्टी-विलेज योजनाएं स्वीकृत की गई हैं। अधिकांश योजनाओं में जल शोधन संयंत्र, इंटेक वेल, पाइपलाइन और मुख्य जलाशयों का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है, लेकिन परीक्षण और जलापूर्ति शुरू करने के लिए राशि उपलब्ध नहीं है।
इन योजनाओं से पानी पहुंचने पर जुड़ी सिंगल-विलेज योजनाओं की तैयार टंकियों को भी जलस्रोत मिल सकेगा। मई 2026 तक जलापूर्ति शुरू करने का लक्ष्य था, लेकिन देरी के कारण आगामी गर्मी में भी ग्रामीणों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
18 जिलों के 3,234 गांवों तक पहुंचेगा पानी
मल्टी-विलेज योजनाओं के माध्यम से 18 जिलों के 3,234 गांवों में जलापूर्ति की जाएगी। इनमें रायगढ़ जिले के 396, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के 16, कोरबा के 245, जांजगीर-चांपा के 32, राजनांदगांव के 393, महासमुंद के 48, कवर्धा के 31, गरियाबंद के नौ, बिलासपुर के 93, सूरजपुर के 413, मुंगेली के 240, दुर्ग के 201, बलौदाबाजार-भाटापारा के 192, बेमेतरा के 219, कोरिया के 292, बालोद के 148, सरगुजा के 190 और धमतरी जिले के 76 गांव शामिल हैं।
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प्रस्ताव की फाइल अटकी, केंद्रीय राशि की राह रुकी
प्रदेश में जल जीवन मिशन की संचालन एवं रखरखाव नीति का प्रस्ताव करीब एक साल से लंबित है। कांट्रैक्टर एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में केंद्रीय अंश नहीं मिलने पर राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से भुगतान किया था।
अब 2026-27 में आगे की राशि जारी करने से पहले केंद्र से प्रतिपूर्ति मिलने की बात कही जा रही है। इसके लिए राज्य की ओ एंड एम नीति का अनुमोदन जरूरी है। इसका प्रारूप तैयार होने के बावजूद पंचायत और पीएचई विभाग के बीच समन्वय की कमी से अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है।
ओडिशा, मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों में नीति लागू होने से केंद्रीय राशि मिल रही है। प्रदेश में 58 मल्टी-विलेज योजनाओं से जुड़ी एजेंसियों का दावा है कि वे अपने संसाधनों और कर्ज से 80 प्रतिशत काम पूरा कर चुकी हैं।
नीति लागू करने आग्रह किया जा चुका है, जो अब तक नहीं हुआ है। इससे विभाग, निर्माण एजेंसियों और ग्रामीणों, तीनों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। 1100 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान लंबित होने के कारण निर्माण एजेंसियों के लिए काम जारी रखना मुश्किल हो गया है। अगस्त 2025 के बाद से भुगतान नहीं हुआ है। बीरेश शुक्ला, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ कांट्रैक्टर एसोसिएशन
मल्टी विलेज योजनाओं की नियमित समीक्षा की जा रही है। कार्यों में आ रही कमियों और गतिरोध को दूर करने के प्रयास जारी हैं। निर्माण एजेंसियों को समय-समय पर भुगतान किया जा रहा है। कुछ दिन पहले ही भुगतान के लिए राशि जारी की गई है। रिमिजियस एक्का, संचालक, जल जीवन मिशन
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