छत्तीसगढ़ में सड़कों पर गाय-बैल-भैंस छोड़े तो खैर नहीं, 12 अंकों की डिजिटल टैगिंग से होगी पहचान, SC के आदेश पर नियम सख्त
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जागा प्रदेश का नगरीय प्रशासन।HighLights
- सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद जागा प्रदेश का नगरीय प्रशासन
- छत्तीसगढ़ के सभी नगरीय निकायों में बनेंगे नोडल अधिकारी
- सार्वजनिक रास्तों पर घूमने वाले पशुओं की होगी धरपकड़
, बिलासपुर। सड़कों पर घूमने वाले मवेशियों से होने वाले हादसों को रोकने और पशु मालिकों की जवाबदेही तय करने के लिए छत्तीसगढ़ में नगरीय प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के 31 जुलाई 2026 के निशा बनाम म्युनिसिपल काउंसिल संगरूर मामले के फैसले के अनुपालन में नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
मालिक की पहचान इसी डिजिटल रिकॉर्ड से की जाएगी
अब नगरीय सीमा में पाले और व्यावसायिक उपयोग में आने वाले गाय, बैल, भैंस समेत मवेशियों की 12 अंकों की डिजिटल कान टैगिंग कर उसे पशु उत्पादकता एवं स्वास्थ्य सूचना नेटवर्क में दर्ज करना होगा। सड़क या सार्वजनिक मार्ग पर मवेशी छोड़ने वाले मालिक की पहचान इसी डिजिटल रिकॉर्ड से की जाएगी।
ऐसे मामलों में नगर सेना और स्थानीय पुलिस की मदद से जुर्माना व दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। संचालनालय ने नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत स्तर पर एक जिम्मेदार अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाने को कहा है। यह अधिकारी मवेशियों की टैगिंग, सड़क पर घूम रहे लावारिस पशुओं की धरपकड़ और गौशाला व पशु आश्रय स्थलों की रोजाना निगरानी करेगा।
गौशाला-कांजी हाउस भी होंगे मजबूत
नगरीय सीमा में घूम रहे वृद्ध और अनुपयोगी मवेशियों को पकड़कर निकायों के शेल्टर या पंजीकृत गौशालाओं में सुरक्षित पहुंचाया जाएगा। सुपुर्दगी के समय इसकी जानकारी डिजिटल डाटाबेस में दर्ज होगी और पशु मालिक को रसीद भी दी जाएगी। नगरीय निकायों को पूरी कार्रवाई की प्रगति रिपोर्ट संचालनालय को भेजनी होगी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से निकला बड़ा संदेश
सुप्रीम कोर्ट ने संगरूर के मामले में लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद पीड़ित परिवार को राहत देते हुए 15 लाख रुपये एकमुश्त देने का आदेश दिया था। अदालत ने कहा था कि इतने वर्षों बाद पीड़ित को केवल दीवानी अदालत में जाने के लिए छोड़ना न्यायसंगत नहीं होगा। हालांकि यह 15 लाख रुपये की राशि इसी मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर दी गई है और इसे सामान्य मुआवजे की दर नहीं माना जाएगा।
यह भी पढ़ें- भूमि अधिग्रहण के बदले दामाद को नौकरी दिलाने का दावा, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने खारिज की याचिका
सुप्रीम कोर्ट की अहम बातें
- मवेशियों से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों के लिए मुआवजा व्यवस्था विकसित करने पर विचार।
- पशुओं की पहचान और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के लिए टैगिंग व डिजिटल रिकॉर्ड।
- अनुपयोगी मवेशियों को सड़कों पर छोड़ने के बजाय सुरक्षित आश्रय में पहुंचाने की व्यवस्था।
- पशु मालिकों की जवाबदेही तय करने और आश्रय व्यवस्था की निगरानी के लिए अधिकारियों की नियुक्ति।
- सुप्रीम कोर्ट के फैसले की जानकारी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक भेजी गई है। छत्तीसगढ़ में अब नगरीय प्रशासन ने इसी के अनुपालन में सभी नगरीय निकायों को कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
Leave a Reply