चाहकर भी ईरान से अपने सैनिकों की शहादत का बदला नहीं ले पाएगा अमेरिका! ये हैं कारण |…

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चाहकर भी ईरान से अपने सैनिकों की शहादत का बदला नहीं ले पाएगा अमेरिका! ये हैं कारण |…
चाहकर भी ईरान से अपने सैनिकों की शहादत का बदला नहीं ले पाएगा अमेरिका! ये हैं कारण

ईरान के राष्ट्रपति रईसी और अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. जॉर्डन में रविवार को अमेरिकी मिलिट्री बेस पर ड्रोन हमले के बाद से दोनों देशों के रिश्तों में कड़वाहट बढ़ी है. हमले के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि हम जवाब देंगे. वहीं, पेंटागन ने कहा कि हम ईरान से जंग नहीं चाहते, लेकिन कार्रवाई तो जरूर करेंगे. हमले का किस तरह से जवाब दिया अमेरिका फिलहाल इसपर विचार कर रहा है. हालांकि ईरान पर हमला करना अमेरिका के लिए इतना आसान भी नहीं है. ईरान न्यूक्लियर पॉवर देश और यही वजह है कि अमेरिका ईरान से जंग नहीं चाहता है.

ईरान के पास एक से एक घातक मिसाइलें हैं. ईरान अपने समृद्ध यूरेनियम के भंडार से कई हथियार बनाने में सक्षम है. ईरान के पास हजारों सटीक बैलिस्टिक मिसाइलें हैं. अमेरिका जानता है कि ईरान के खिलाफ चौतरफा युद्ध से यमन, इराक, सीरिया और लेबनान में नए मोर्चे खुल जाएंगे, जिन्हें पश्चिम में ईरान का रिंग ऑफ फायर भी कहा जाता है.

तेल भी है बड़ा फैक्टर

जंग से तेल और गैस की कीमत बढ़ सकती है, जो यूरोपीय अर्थव्यवस्था और वैश्विक अर्थव्यवस्था को तबाह कर सकती है. इराक पर आक्रमण के विपरीत क्षेत्र का कोई भी देश ईरान के खिलाफ अपनी धरती का उपयोग करने की अनुमति नहीं देगा, जिसके परिणामस्वरूप उनका बुनियादी ढांचा नष्ट हो सकता है.

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अमेरिका और ईरान दोनों में घरेलू राजनीति अभी भी ब्रेक का काम करती है. जानकार बताते हैं कि ईरान अमेरिका में अलोकप्रिय है. और इससे बाइडेन को दोबारा चुनाव जीतने में मदद मिलने की संभावना कम है. इसी तरह ईरान के नेता सत्ता में बने रहना चाहते हैं और अपने शासन को युद्ध में जोखिम में नहीं डालना चाहते हैं. इसके अलावा तेहरान वाशिंगटन की मारक क्षमता की बराबरी नहीं कर सकता, लेकिन यह मध्य पूर्व और दुनिया भर में अराजकता फैला सकता है.

यही नहीं, साइबरस्पेस में ईरान अमेरिका के लिए बड़ा खतरा है. 2011 से शुरू होकर, ईरान ने जेपी मॉर्गन चेज और बैंक ऑफ अमेरिका सहित 40 से अधिक अमेरिकी बैंकों पर हमला किया. हमले के कारण बैंकों को अपने ग्राहकों को सेवा देने में परेशानी हुई. 2012 में ईरान ने एक प्रमुख तेल कंपनी सऊदी अरामको के नेटवर्क में मैलवेयर जारी किया, जिसने कंपनी के लगभग 75 प्रतिशत कंप्यूटरों पर दस्तावेज, ईमेल और अन्य फाइलें मिटा दीं. उनकी जगह जलते हुए अमेरिकी ध्वज की फोटो लगा दी गई.

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