Farmer Protest: इटली में बेकाबू हुआ किसान आंदोलन, राजधानी रोम में ट्रैक्टरों के साथ… – भारत संपर्क

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Farmer Protest: इटली में बेकाबू हुआ किसान आंदोलन, राजधानी रोम में ट्रैक्टरों के साथ… – भारत संपर्क
Farmer Protest: इटली में बेकाबू हुआ किसान आंदोलन, राजधानी रोम में ट्रैक्टरों के साथ घुसे प्रदर्शनकारी

इटली के रोम में विरोध प्रदर्शन करते हुए किसान

भारत ही नहीं पूरी दुनिया में किसान आंदोलनों का अपना इतिहास रहा है. भारत के किसानों का आंदोलन इन दिनों खबरों में बना हुआ है लेकिन यूरोप के कई देशों में भी किसान सरकार की नीतियों के खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं. यूरोप के करीब 10 देशों में जनवरी से ही किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है. इन देशों में फ्रांस, पोलैंड, स्पेन, जर्मनी, इटली, ग्रीस, रोमानिया, बेल्जियम, पुर्तगाल, लिथुआनिया शामिल हैं.

गुरुवार को इटली के रोम में विरोध प्रदर्शन करते हुए किसानों ने प्राचीन सर्कस मैक्सिमस पर धावा बोल दिया. किसान सर्कस मैक्सिमस के चारों और अपने ट्रैक्टर दौड़ाने लगे, इस प्रदर्शन के दौरान पुलिस और किसानों के बीच गहगहमी भी हुई. इसके अलावा किसानों का एक ग्रुप प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी के दफ्तर के पास भी इकट्ठा हुआ. इसके अलावा किसान अपनी मांगो को लेकर यूरोपीय यूनियन के ऑफिस भी पहुंचे जहा उन्होंने अपना शिकायत पत्र अधिकारियों को सौंपा.

इटली का राजधानी का ये मंजर ऐसा था जैसे 26 जनवरी 2021 को दिल्ली की सड़कों पर देखने को मिला था. आंदोलन कर रहे किसान आईटीओ के रास्ते ट्रैक्टरों से दिल्ली में दाखिल हो गए थे. किसानों ने यहां ट्रैक्टर दौड़ाए थे. फिर किसान लाल किले की तरफ बढ़ गए थे. किसानों के ट्रैक्टर आंदोलन की ऐसी ही कुछ तस्वीर रोम में देखने को मिली.

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क्यों कर रहें हैं यूरोप के किसान प्रदर्शन?

यूरोप में तेजी से बदलते जलवायु परिवर्तन को देखते हुए यूरेपीय यूनियन ने कानूनों में कई बदलाव किए हैं. इसके अलावा यूक्रेन जंग शुरू होने के बाद से ही पूरे यूरोप में महंगाई बढ़ी हुई है. किसान अपनी आय में गिरवट और बढ़ती महंगाई से चिंतित है. उनकी शिकायतें ईंधन की कीमत से लेकर जलवायु परिवर्तन को कम करने के लिए बनाए गए यूरोपीय यूनियन के पर्यावरण कानूनों तक हैं. किसानों का मानना है कि सरकार की ये सब नीतिया उनकी आजीविका को नुकसान पहुंचा रही हैं.

किसानों का पक्ष

किसानों के प्रतिनिधियों में से एक पीनो कंवर्टिनी ने बताया, “किसानों के पास कीमतों पर सौदेबाजी की शक्ति नहीं है, हमारे पास ऊपर से चुने गए राजनीतिक विकल्पों पर सौदेबाजी की शक्ति नहीं है. तो हमें क्या करना चाहिए?” किसानों का कहना है उनको जलवायु परिवर्तन नियमों से बाहर रखा जाए कृषि में कीटनाशकों के उपयोग पर पाबंदी न लगाई जाए.

यूरोप के कई देशों में इस साल चुनाव होने है जिसकी वजह से सरकार पर इन प्रदर्शनों का बड़ा दबाव है. पिछले हफ्ते यूरोपीय आयोग ने किसानों को कुछ रियायतें भी दी हैं, इटली की प्रधानमंत्री मेलानी ने शुक्रवार को किसानें के साथ एक गोलमेज बैठक की, जहां उन्होंने किसानों को टेक्स में छूट देने का वादा किया.

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