ICICI Bank Loan Fraud Case: CBI को हाई कोर्ट से लगी लताड़,…- भारत संपर्क


दीपक कोचर और चंदा कोचरImage Credit source: File Photo : PTI
आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व एमडी-सीईओ चंदा कोचर और उनके कारोबारी पति दीपक कोचर की गिरफ्तारी को बंबई हाई कोर्ट ने पहले ही ‘अवैध’ घोषित कर दिया था. सोमवार को जब इस बाबत हाईकोर्ट का डिटेल्ड आदेश सामने आया, तो सीबीआई की कार्रवाई को कई पहलुओं पर कठघरे में खड़ा किया गया है. सीबीआई को भारी ‘लताड़’ लगाते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि उसने ‘सत्ता का दुरुपयोग’ करते हुए कोचर कपल की गिरफ्तारी को अंजाम दिया.
बंबई हाई कोर्ट ने 6 फरवरी को ही कोचर कपल की गिरफ्तारी को ‘अवैध’ बताने वाला आदेश पारित कर दिया था. साथ ही उनकी अंतरिम जमानत को भी मंजूरी दे दी थी. हालांकि इस मामले में अदालत का पूरा आदेश सोमवार 19 फरवरी को ही उपलब्ध हुआ है.
‘चंदा-दीपक को चुप रहने का अधिकार’
मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई ने दलील दी थी कि कोचर कपल जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे, इसलिए उन्हें गिरफ्तार किया गया. इस पर हाई कोर्ट ने सीबीआई को कानून का पाठ पढ़ाते हुए कह कि आरोपी को पूछताछ के दौरान चुप रहने का अधिकार है. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 20(3) उन्हें ‘मौन’ रहने का अधिकार प्रदान करता है. ये उनका मौलिक अधिकार है. उनके इस व्यवहार की तुलना ‘जांच में असहयोग’ से नहीं की जा सकती. इस आधार पर अदालत ने सीबीआई की दलील को खारिज कर दिया.
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अदालत यहीं नहीं रुकी, उसने दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा-41A के तहत कोचर कपल की गिरफ्तारी को भी कठघरे में खड़ा किया. अदालत ने कहा कि इस सेक्शन के तहत गिरफ्तारी रुटीन अरेस्ट को तो हटाती है, लेकिन इसकी भी अपनी सीमाएं हैं. इस प्रावधान के तहत गिरफ्तारी तभी की जा सकती है, जब पुलिस को आरोपी के अपराध करने का पूरा भरोसा हो. साथ ही इसके लिए सहयोगी साक्ष्य भी हों. वहीं सीबीआई अपनी शक्तियों के तहत आरोपी से पूछताछ कर सकती है, जबकि इसका गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई को अंजाम देना पूरी तरह से न्यायिक समीक्षा के दायरे में आता है.
चंदा-दीपक कोचर की जमानत पर कोर्ट की मुहर
बॉम्बे हाई कोर्ट में न्यायमूर्ति अनुजा प्रभुदेसाई और न्यायमूर्ति एन.आर. बोरकर की खंडपीठ ने 6 फरवरी को अपने ही जनवरी 2023 के एक आदेश की पुष्टि की थी. तब हाईकोर्ट की एक अन्य बेंच ने अंतरिम आदेश पारित करके चंदा और दीपक कोचर को उनकी गिरफ्तारी के तुरंत बाद अंतरिम जमानत दे दी थी.
कोचर कपल की गिरफ्तारी का मामला चंदा कोचर के आईसीआईसीआई बैंक का प्रमुख रहते वीडियोकॉन ग्रुप को कथित तौर पर गलत तरीके से लोन देने से जुड़ा है. उन्होंने अपने पद का फायदा उठाते हुए वीडियोकॉन को ये लोन उपलब्ध कराया. इसके एवज में वीडियोकॉन ने चंदा कोचर के पति दीपक कोचर की कारोबार में मदद की, जो रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में काम करते हैं.
सीबीआई ने मामले में कोचर दंपति के अलावा वीडियोकॉन समूह के संस्थापक वेणुगोपाल धूत को भी गिरफ्तार किया था. उन्हें भी जनवरी 2023 में हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश में जमानत दे दी थी.