नवा रायपुर को ग्रीनफील्ड सिटी बनाने का नया मास्टरप्लान, सेक्टर-12 में बनेंगे 348 नए लग्जरी मकान और 704 फ्लैट्स

नवा रायपुर में आशियाने का सपना होगा पूरा
HighLights
- नवा रायपुर को देश की अग्रणी ग्रीनफील्ड सिटी बनाने पर जोर
- सेक्टर-12 में बनेंगे 348 नए लग्जरी मकान और 704 फ्लैट्स
- 30 प्रतिशत बुकिंग होने के बाद ही टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ेगी
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, रायपुर। नवा रायपुर को देश की अग्रणी ग्रीनफील्ड सिटी के रूप में विकसित करने के साथ आवासीय सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। आवास व पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने सोमवार को सेक्टर-12 फेस-2 में राज्य गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की 119.89 करोड़ रुपये की आवासीय परियोजना का भूमिपूजन किया। परियोजना में एचआइजी और एमआइजी श्रेणी के 348 भवन बनाए जाएंगे।
आवासों की बढ़ती मांग को देखते हुए इसी सेक्टर में अगले चरण में 704 नए फ्लैट भी बनाए जाएंगे। इस अवसर पर मंत्री ने कहा कि अब हाउसिंग बोर्ड बिना मांग के किसी स्थान पर आवासीय परियोजना शुरू नहीं करेगा। परियोजना में 60 प्रतिशत बुकिंग या पहले तीन माह में 30 प्रतिशत बुकिंग होने के बाद ही टेंडर प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
उन्होंने कहा कि केवल सरकारी एसओआर (शेड्यूल आफ रेट्स यानी दर अनुसूची) के आधार पर काम करने की अपेक्षा आवश्यकता के अनुसार उचित गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग किया जाएगा। आधुनिक टाइल्स, फिटिंग्स और आकर्षक रंगों के साथ हाउसिंग बोर्ड की कालोनियों को बेहतर स्वरूप देने पर जोर दिया। उन्होंने रेसिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) को मजबूत करने और कालोनियों का समय पर हैंडओवर सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।
मंत्री ने बताया कि हाउसिंग बोर्ड पर पूर्व में करीब 700 करोड़ रुपये का ऋण था, जिसे चुकाकर बोर्ड को कर्जमुक्त किया गया। अब मांग आधारित परियोजनाओं और बेहतर आवासीय सुविधाओं पर फोकस किया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत मंत्री चौधरी ने पीपल का पौधा रोपा। उन्होंने कहा कि नवा रायपुर के करीब एक-तिहाई हिस्से को रिक्रिएशनल क्षेत्र और 28 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र को हरियाली के रूप में विकसित किया गया है। कार्यक्रम में मंडल अध्यक्ष अनुराग सिंह देव समेत अन्य उपस्थित रहे।
704 फ्लैट में ईडब्ल्यूएस से एचआइजी तक
सेक्टर-12 फेस-2 में आगामी चरण में बनने वाले 704 फ्लैट में 128 एचआइजी, 320 एमआइजी और 256 एलआइजी श्रेणी के आवास शामिल होंगे। इनका प्रस्तावित बेस विक्रय मूल्य 16.76 लाख से 40.47 लाख रुपये तक है। वर्तमान परियोजना के 348 भवनों का बेस विक्रय मूल्य 45.70 लाख से 85.17 लाख रुपये तक निर्धारित किया गया है।